वोटर लिस्ट को सफाई करने के इरादे से चुनाव आयोग के द्वारा चलाए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में अधिकारियों को दिक्कतें ममता बनर्जी शासित पश्चिम बंगाल में ही हो रही है। ऐसे ही एक मामले में पश्चिम बंगाल के न्यायिक अधिकारी को उन्मादी भीड़ ने घेर लिया। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की कि राज्य का कानून व्यवस्था पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने इस हरकत को पूरी तरह से सोची-समझी रणनीति के तहत अधिकारियों का मनोबल तोड़ने की कोशिश करार दिया।
क्या है पूरा मामला
रिपोर्ट के अनुसार, एक दिन पहले दोपहर को करीब चार बजे मालदा के कालियाचक-2 ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिस में ये अधिकारी SIR के काम से जुड़े थे। कुछ लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए थे। वे लोग ऑफिसरों से मिलने की मांग लेकर पहुंचे। जब उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया तो उन्होंने विरोध शुरू कर दिया। भीड़ ने ऑफिस के आसपास घेराव कर लिया और रास्ता ब्लॉक कर दिया। इस वजह से अधिकारी शाम से लेकर रात भर तक अंदर फंसे रहे। फंसे हुए लोगों में सात ज्यूडिशियल ऑफिसर थे, जिनमें तीन महिलाएं भी शामिल थे। इसके अलावा अधिकारियों के घर पर एक 5 साल का बच्चा भी फंसा था।
भीड़ ने काफी देर तक हंगामा करती रही। अधिकारियों को बचाने आए एसपी की टीम पर भी हमला किया गया, जिसमें कुछ गाड़ियों को भी नुकसान पहुंचाया गया। महिलाओं की गाड़ियों पर भी हमला हुआ। मालदा के दूसरे इलाकों में भी सड़कें जाम कर दी गईं, जिससे आम लोगों को परेशानी हुई। आखिरकार रात करीब एक बजे बड़ी संख्या में पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स पहुंची। उन्होंने भीड़ को हटाया और अधिकारियों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाया। इस पूरी घटना में अधिकारियों को करीब नौ घंटे तक घिरे रहना पड़ा।
बर्बाद हो गई है राज्य की कानून व्यवस्था-सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना पर काफी गंभीर रुख अपनाया। कोर्ट ने इसे बंगाल में कानून-व्यवस्था के पूरी तरह टूटने का मामला बताया। जस्टिस ने कहा कि यह निंदनीय है। उन्होंने इसे “सोची-समझी रणनीति से प्रेरित” यानी सोचा-समझा प्रयास करार दिया, जिसका मकसद ज्यूडिशियल ऑफिसरों का मनोबल तोड़ना और चुनावी प्रक्रिया बाधित करना था।कोर्ट ने बंगाल के चीफ सेक्रेटरी और डीजीपी को नोटिस जारी किया। उनसे पूछा गया कि उन्होंने क्यों कुछ नहीं किया। कोर्ट ने इसे कर्तव्य से मुंह मोड़ना कहा। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की कि किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने या अधिकारियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव डालने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
कोर्ट के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह चुनाव आयोग को इसकी जानकारी दे और अधिकारियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों की मांग करे। कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग चाहे तो सीबीआई या एनआईए से जांच करा सकता है। साथ ही सभी राजनीतिक नेताओं से अपील की कि इस मुद्दे को राजनीतिक रंग न दें और अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।















