हाल ही में पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी पर एक काॅफी-टेबल पुस्तक प्रकाशित हुई है। जैसे ही यह कॉफी-टेबल पुस्तक हाथ में आती है, बिना खोले ही इसकी भव्यता का आभास हो जाता है। आवरण पृष्ठ पर अंकित अटलजी का सजीव चित्र तुरंत ध्यान आकर्षित करता है।
ऐसा लगता है मानो वे उस भारत के भविष्य को निहार रहे हों, जो आज सशक्त, आत्मविश्वासी और विश्व मंच पर अग्रणी रूप में खड़ा है। उनकी दृष्टि में एक गहराई है, एक पूर्वानुमान है मानो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ वर्ष की भव्य यात्रा जो समाज के हर वर्ग से होकर यहां तक पहुंची है व आगे का सशक्त मार्ग तय करने को है, उसे उन्होंने बहुत पहले ही देख लिया हो।
विजय गोयल द्वारा संकलित ‘Atal Bihari Vajpayee: The Eternal Statesman’ केवल एक कॉफी-टेबल बुक नहीं, बल्कि अटलजी के जीवन, विचार और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण का एक सजीव, दृश्यात्मक और भावनात्मक दस्तावेज है। यह कृति उनके जन्मशताब्दी वर्ष पर एक गरिमामय श्रद्धांजलि के रूप में प्रस्तुत की गई है।
पुस्तक में अटलजी के जीवन के विभिन्न चरणों- बाल्यकाल, छात्र जीवन, संघ से जुड़ाव, जनसंघ का संघर्ष, भारतीय जनता पार्टी की आधारशिला, प्रधानमंत्री काल तथा उसके साथ व पश्चात के सार्वजनिक जीवन-को दुर्लभ और ऐतिहासिक चित्रों के माध्यम से अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
इस कृति में अटलजी का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से गहरा और आत्मिक जुड़ाव विशेष रूप से उभरकर सामने आता है। स्वयंसेवक के रूप में प्राप्त संस्कारों ने उन्हें केवल राजनीतिक ही नहीं, बल्कि वैचारिक और संगठनात्मक रूप से भी सुदृढ़ बनाया। साथ ही, ‘पाञ्चजन्य’ के संपादक के रूप में उनकी भूमिका उनके बौद्धिक और वैचारिक नेतृत्व को भी रेखांकित करती है।
पुस्तक अटलजी की दूरदर्शी नेतृत्व क्षमता को भी प्रभावशाली ढंग से सामने लाती है। उन्होंने न केवल अपने समय को दिशा दी, बल्कि भविष्य के नेतृत्व को भी पहचाना और उसे विकसित होने का अवसर दिया। इसका सशक्त उदाहरण वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी हैं, जिनकी यात्रा एक प्रचारक से देश के सर्वोच्च नेतृत्व तक पहुंची। पुस्तक के कई पृष्ठ इस प्रसंग को प्रमाणित करते हैं।
पुस्तक में सम्मिलित प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का संदेश इस कृति को विशेष गरिमा प्रदान करता है। उन्होंने अटलजी को अपने लिए सदैव एक मार्गदर्शक शक्ति बताया है और उनके दृढ़ संकल्प तथा राष्ट्रहित के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को स्मरण किया है। विशेष रूप से 1998 के पोखरण में ‘ऑपरेशन शक्ति’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने रेखांकित किया है कि किस प्रकार अटलजी के नेतृत्व में भारत ने सभी वैश्विक दबावों के बावजूद परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र बनाने का साहसिक निर्णय लिया।
विजय गोयल का अटलजी से निकट संबंध इस कृति को विशेष प्रामाणिकता प्रदान करता है। एक पारिवारिक मित्रता, सहयोगी और मंत्री के रूप में उनके अनुभव इस पुस्तक में आत्मीयता और विश्वसनीयता का भाव जोड़ते हैं। यह कृति भारतीय राजनीति की उस ऐतिहासिक यात्रा को भी प्रस्तुत करती है, जिसमें जनसंघ से भारतीय जनता पार्टी तक का विस्तार हुआ-दो सीटों से 303 सीटों तक का सफर जो विचार, विश्वास और जनसमर्पण की सशक्त गाथा है। समग्र रूप से, यह एक ऐसी कृति है, जो केवल देखी नहीं जाती, बल्कि महसूस की जाती है-एक ऐसे युगद्रष्टा की दृष्टि के रूप में, जिसने भारत के भविष्य को बहुत पहले ही देख लिया था।

















