मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला मामले में मुस्लिम पक्ष को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुनवाई करते हुए बुधवार (1 अप्रैल) को स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट सभी आपत्तियों पर उचित तरीके से विचार करेगा।
उन्होंने कहा, ”सुप्रीम कोर्ट को हाईकोर्ट पर पूरा भरोसा है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि उच्च न्यायालय एएसआई सर्वे के दौरान की गई वीडियोग्राफी का अवलोकन करेगा और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुसार सभी आपत्तियों पर निर्णय लेगा।” साथ ही कोर्ट ने सुनवाई पर रोक लगाने से इनकार करते हुए साफ किया कि अगर किसी पक्ष को कोई शिकायत है तो वह हाईकोर्ट का रुख कर सकता है। अब इस मामले में गुरुवार (2 अप्रैल) को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट सुनवाई करेगा।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने इस मामले पर सुनवाई की। इस दौरान जस्टिस बागची ने बताया कि सर्वे रिपोर्ट में कुछ आपत्तियां दर्ज हैं, जबकि बाकी पर अभी सुनवाई होनी बाकी है। उन्होंने कहा कि कोर्ट में वीडियोग्राफी चलाई जाएगी, जिससे सभी पक्ष उसकी सत्यता पर सवाल उठा सकेंगे।
मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी ने दायर की याचिका
यह मामला मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। सोसायटी ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर कर ASI सर्वे की वीडियो रिकॉर्डिंग और फोटो प्रस्तुत करने की मांग की थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस याचिका पर तत्काल सुनवाई न करते हुए कहा था कि इसे अंतिम सुनवाई के समय देखा जाएगा। इसके बाद याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
मुस्लिम पक्ष की दलील
मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने सुप्रीम कोर्ट में आज कई दलीलें पेश कीं। उन्होंने कोर्ट से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में 2 अप्रैल को होने वाली सुनवाई को टालने और सर्वेक्षण से जुड़ी वीडियोग्राफी व रंगीन तस्वीरें मस्जिद कमेटी को उपलब्ध कराने मांग की। उन्होंने कहा कि सर्वे के दौरान खुदाई की गई, जो पहले दिए गए निर्देशों के विपरीत है और इस पर मस्जिद प्रबंधन ने आपत्तियां भी दर्ज कराई हैं।
खुर्शीद के अनुसार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट पर जवाब देने के लिए मुस्लिम पक्ष को पर्याप्त समय नहीं दिया गया और बिना पूरी सामग्री उपलब्ध कराए जल्दबाजी में सुनवाई की जा रही है।
हिंदू पक्ष की दलील
हिंदू पक्ष की ओर से एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने कहा कि हाईकोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की मांग को खारिज नहीं किया है और न अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। यह मामला अभी लंबित है, जिस पर सभी आपत्तियों पर अंतिम सुनवाई के दौरान विचार किया जाएगा।
गौरतलब है कि धार में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में चल रही याचिका पर दो अप्रैल को पहले से सुनवाई निर्धारित है, लेकिन कमाल मौलाना वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष ने इससे पहले ही सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी। हाईकोर्ट ने हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका पर सुनवाई के दौरान भोजशाला स्थल के निरीक्षण की अनुमति का आदेश दिया था। याचिका में इस स्थल को देवी वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर घोषित करने की मांग की गई है। दरअसल, हिंदू समुदाय भोजशाला को देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर मानता है। मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद कहता है।















