मिजोरम में क्या करने गए थे एक अमेरिकी मैथ्यू वैनडाइक और 6 यूक्रेनी? एनआईए ने उन्हें क्यों हिरासत में लिया? एक और अति गंभीर सवाल है कि जो गिरफ्तारी बहुत पहले हो जानी चाहिए थी, आखिर इतनी देर में जाकर क्यों हुई ? बड़ी हैरानी की बात है कि जब भारत किसी भी देश में सत्तापलट में शमिल नहीं है, तो मैथ्यू वैनडाइक और 6 यूक्रेनी भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निपटाने और सरकार को गिराने क्यों लगे हुए थे! इसका उत्तर सुरक्षा एजेंसियों को देना ही होगा। क्या ये उनके साथ वही करना चाह रहे थे जो वेनेजुएला के निकोला मादुरो के साथ किया गया है?
एनआईए ने दिल्ली और लखनऊ सहित कई प्रमुख ट्रांजिट प्वाइंट्स से इन छह यूक्रेनी नागरिकों को पकड़ा। इसके अलावा एक अमेरिकी नागरिक को कोलकाता एयरपोर्ट से हिरासत में लिया गया, जिसकी पहचान मैथ्यू वैनडाइक के रूप में हुई है। इन सभी के खिलाफ यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया है।

मामले की पृष्ठभूमि और गिरफ्तारी
भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र से जुड़ी यह साजिश अब कूटनीतिक स्तर पर तूल पकड़ती जा रही है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए ने यहां छह यूक्रेनी नागरिकों को हिरासत में लिया है। इन पर अवैध रूप से मिजोरम में प्रवेश करने और फिर पड़ोसी देश म्यांमार जाकर उग्रवादियों को लड़ाई की प्रशिक्षण देने का आरोप है। इन सभी के खिलाफ विदेशी अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया है।
इन सभी पर आरोप है कि ये भारत के संवेदनशील इलाकों में बिना अनुमति के गए। इनमें से एक अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक है, जिसका दुनिया भर के संघर्षों में लड़ने का इतिहास रहा है। उसने गद्दाफी के खिलाफ लड़ाई लड़ी, आईएसआईएस के खिलाफ बंदूक उठाई और वेनेजुएला तथा यूक्रेन में भी सक्रिय रहा है। ऐसे में भारत की खुफिया एजेंसियों ने सतर्कता दिखाई और उसे धर दबोचा। सबसे ज्यादा चर्चा मैथ्यू आरोन वैनडाइक को लेकर है। खुद को डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर, पूर्व पत्रकार और ‘फ्रीडम फाइटर’ बताने वाला 46 वर्षीय वैनडाइक आखिर है कौन ?
विषय की गंभीरता को समझने की जरूरत है, आखिर हुआ क्या है? एनआईए की एफआईआर और शुरुआती जांच से साफ होता है कि यह मामला सीधे भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमाई इलाकों से जुड़ा हुआ है। जांच में सामने आया है कि वैनडाइक और उसके यूक्रेनी सहयोगी टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे। यूक्रेनी नागरिकों की पहचान पेट्रो हुरबा, तारास स्लिवियाक, इवान सुकमानोव्स्की, मारियन स्टेफनकिव, मैक्सिम होंचारुक और विक्टर कामिंस्की के रूप में हुई है।

अंतरराष्ट्रीय साजिश और सुरक्षा चिंताएं
उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी और देश के वरिष्ठतम सुरक्षा सलाहकारों में से एक, विक्रम सिंह का कहना है कि आए दिन ये लोग सवाल करते थे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कब मणिपुर का दौरा करेंगे, ताकि उन पर हमला किया जा सके। उन्होंने कहा कि दूसरे विश्वयुद्ध के बाद से ही अमेरिका की यह रुचि रही है कि दूसरे देशों में दखलंदाजी करे और वहां की सरकारों को तख्तापलट कर अपने पिट्ठू बिठाए।
इस प्रकार के उदाहरण अफगानिस्तान, इराक, लीबिया, कांगो और वेनेजुएला आदि में देखने को मिले हैं। पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी उसने चुनाव से बनी सरकार को पलटने में भूमिका निभाई,ऐसे आरोप लगाए जाते रहे हैं। 1945 से अब तक अमेरिका ने 15 देशों में तख्तापलट करवाकर वहां पर ऐसी कठपुतली सरकारें बनवाईं, जो उसके इशारों पर काम करें।
मशहूर शायर और संपादक “एमएमसी न्यूज़” के मुमताज आलम रिजवी ने कहा है:
“अमेरिका को जंग से जबरदस्त प्यार है,
क्योंकि उसे बेचने अपने हथियार बेशुमार हैं!”
सूत्रों के अनुसार, 14 यूक्रेनी नागरिक अलग-अलग तारीखों में टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे। वे गुवाहाटी पहुंचे और फिर आवश्यक दस्तावेजों के बिना मिजोरम गए। यहां जाने के लिए “रिस्ट्रिक्टेड एरिया परमिट” (आरएपी) और “इनर लाइन परमिट” (आईएलपी) लेना पड़ता है। उन्होंने इसे बिना लिए यहां प्रवेश किया। यही नहीं उन्होंने म्यांमार में सक्रिय जातीय सशस्त्र संगठनों (ईएजीस) से संपर्क स्थापित किया। जांच एजेंसियों का कहना है कि इन संगठनों के संबंध भारत के पूर्वोत्तर में सक्रिय उग्रवादी गुटों से भी जुड़े हैं। उनका उद्देश्य म्यांमार में इन समूहों को ड्रोन वॉरफेयर की ट्रेनिंग देना था।

और भी होंगी गिरफ्तारियां
एनआईए ने अभी तक केवल 7 नागरिकों की ही गिरफ्तारी बताई है, मगर अभी और गिरफ्तारियां संभव हैं। जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क यूरोप से बड़ी मात्रा में ड्रोन भारत के रास्ते म्यांमार पहुंचा रहा था। एनआईए ने आरोप लगाया है कि यह समूह हथियारों की आपूर्ति, उग्रवादियों को ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल सिखाने पर काम कर रहा था। वैनडाइक और उसके साथियों पर आरोप है कि वे म्यांमार के विद्रोही गुटों को प्रशिक्षण दे रहे थे। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क के भारत के अंदर कोई स्थानीय कनेक्शन हैं या नहीं। जब्त किए गए मोबाइल फोन की जांच की जा रही है और आगे की कार्रवाई जारी है।
मार्च 2025 में मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने चेतावनी दी थी कि विदेशी भाड़े के सैनिक मिजोरम के रास्ते म्यांमार में प्रवेश कर रहे हैं। वहीं, बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भी तख्तापलट से पहले पहले अमेरिका पर आरोप लगाया था कि वह भारत से सटे इलाकों में एक ईसाई राज्य बनाना चाहता है। जाहिर है ऐसी परिस्थितियों में भारत सरकार की जांच एजेंसियां इस घटना को हल्के में
नहीं लेंगी।
‘था तो मोहरा, कहता था इतिहास का रुख बदलना चाहता हूं’
म्यांमार में उग्रवादी समूहों को प्रशिक्षण देने के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और ड्रोन तस्करी मामले में एनआईए द्वारा गिरफ्तार किए गए अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डाइक इस पूरे नेटवर्क का सरगना है। उसका एक पुराना वीडियो भी वायरल है, जिसमें वह यह कहता नजर आता है कि इतिहास का रुख बदलना चाहता हूं’ उसका नाम कई बार विवादों और संवेदनशील मामलों में भी सामने आता रहा है। वह पहली बार 2011 में चर्चा में आया, जब उसने लीबिया गृहयुद्ध में विद्रोही गुटों का साथ दिया. उस समय देश में गद्दाफी के खिलाफ आंदोलन चल रहा था। वह अवैध रूप से लीबिया में दाखिल हुआ, विद्रोहियों के साथ जुड़ा और और लड़ाई के दौरान घायल भी हुुआ। वहां उसकी गिरफ्तारी भी हुई। इसके बाद करीब 6 महीने तक उसे जेल में रहना पड़ा, अगस्त 2011 में जेल के कैदियों ने सेल का ताला तोड़ दिया, इसके चलते वह वहां भागने में सफल हो गया। उसका नाम हमेशा विवादों से जुड़ता रहा है।
















