अमेरिका ने ये नहीं सोचा था कि ईरान इस तरह से तन कर खड़ा रहेगा। इस युद्ध के कारण अमेरिका का बहुत सा संसाधन और पैसा खर्च हो रहा है। ऐसे में अब अमेरिका खाड़ी के देशों से इसके लिए पैसे मांगने की तैयारी कर रहा है। ये खुलासा खुद व्हाइट हाउस ने किया है।
क्या है पूरा मामला
मामला कुछ यूं है कि ईरान युद्ध में अमेरिका को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसी को लेकर व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लेविट ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप अरब देशों से युद्ध के खर्च के लिए मदद मांगने के बारे में सोच रहे हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या अरब देश युद्ध का खर्च उठाएंगे, तो लेविट ने जवाब दिया, “मैं राष्ट्रपति ट्रंप की तरफ से नहीं बोल सकती, लेकिन मुझे लगता है कि वे ऐसा करने में बहुत रुचि रखेंगे।”
उन्होंने आगे कहा, “यह उनके मन में एक विचार है और मुझे लगता है कि आप जल्द ही उनसे इसके बारे में और सुनेंगे।” अमेरिका ने कांग्रेस से युद्ध के लिए अतिरिक्त 200 बिलियन डॉलर की मांग भी की है, लेकिन वहां विरोध हो रहा है।
धमकी भी दे रहे ट्रंप
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उनकी सरकार ईरान के साथ गंभीर बातचीत कर रही है ताकि सैन्य कार्रवाई खत्म हो सके। उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर जल्दी कोई समझौता नहीं हुआ, तो खाड़ी देशों के ऊर्जा संसाधनों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया जा सकता है।
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ट्रंप ने ईरान को सीधे कहा कि अगर हॉर्मुज जलडमरूमध्य तुरंत व्यापार के लिए नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के सभी बिजली उत्पादन प्लांट, तेल के कुएं और खार्ग द्वीप को पूरी तरह नष्ट कर देगा। उन्होंने कहा, “अगर किसी भी वजह से जल्दी समझौता नहीं हुआ, जो कि बहुत संभावित है, और अगर हॉर्मुज तुरंत व्यापार के लिए नहीं खुला, तो हम ईरान में अपनी कार्रवाई इन सबको बम से उड़ा कर खत्म कर देंगे।”
हम तय करेंगे कब खत्म होगा युद्ध-ईरान
वहीं दूसरी तरफ ईरान ने अमेरिका को दो टूक कहा है कि खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल इब्राहिम जोल्फिकारी ने कहा कि ईरान कभी युद्ध शुरू नहीं करता, लेकिन यह तय करता है कि युद्ध कब और कैसे खत्म होगा। उन्होंने ट्रंप की धमकियों को खारिज करते हुए कहा कि ईरानी सशस्त्र बल हमेशा यही स्पष्ट करते रहे हैं।
अमेरिका से कोई सीधी बातचीत नहीं
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बागई ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि अमेरिका के साथ अब तक कोई सीधी बातचीत नहीं हुई है। सिर्फ मध्यस्थों के जरिए संदेश आए हैं। उन्होंने कहा कि जब अमेरिका बातचीत और कूटनीति की बात करता है, तो संवेदनशीलता बढ़ जाती है, लेकिन यह भी साफ नहीं है कि अमेरिका खुद इन दावों को कितना गंभीरता से लेता है।
बागई ने कहा कि दुनिया भर में अमेरिकी कूटनीतिक दावों पर भरोसा कम है। ईरान की स्थिति हमेशा साफ और स्थिर रही है, जबकि दूसरी तरफ बार-बार रुख बदलता है और विरोधाभासी बयान आते हैं। जो प्रस्ताव ईरान तक पहुंचे हैं, उनमें 15-पॉइंट प्लान या अन्य रूप में बहुत ज्यादा, अव्यावहारिक और तर्कहीन मांगें हैं। ईरान ने अमेरिका द्वारा मध्यस्थों के जरिए भेजे गए प्रस्तावों को ठुकरा दिया है।

















