नक्सलवाद के खात्मे पर लोकसभा में चर्चा का जवाब देते हुए अमित शाह ने कांग्रेस और माओवाद के गठजोड़ को उजागर किया। उन्होंने इंदिरा गांधी के सत्तर के दशक का उदाहरण दिया और यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार ने माओवाद को प्रश्रय दिया।
माओवाद के प्रभाव में रहीं इंदिरा जी
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि 1970 में इंदिरा जी ने संजीव रेड्डी के खिलाफ अपना प्रत्याशी उतारा और उस समय आधार तलाश रही माओवादी पार्टी ने इंदिरा गांधी को समर्थन दिया। इंदिरा गांधी ने उस समर्थन को स्वीकार कर लिया। इसके बाद वे माओवादी विचारधारा के प्रभाव में रहीं और माओवाद धीरे-धीरे देश में फैल गया। विशेषज्ञों का कहना है कि सत्ता के समर्थन के बिना रेड कॉरिडोर बन ही नहीं सकता।
अन्याय के खिलाफ माओवादी नहीं थे
अमित शाह ने कहा कि माओवादी उग्रवादियों को अन्याय के खिलाफ हथियार उठाने वाला समझने की गलती नहीं करनी चाहिए थी। इन्होंने अपना वैचारिक आधार खो दिया, इसलिए ये किसी भी तरह अपने अस्तित्व को बचाने में लगे रहे। देश के स्वाभाविक असंतोष को हथियारों के माध्यम से दिशा देकर एक वैक्यूम बनाना इनका उद्देश्य था।
कांग्रेस के शासन में माओवाद फैला
भारत में नक्सल हिंसा 1970 के दशक में नक्सलबाड़ी से शुरू हुई। 1980 के दशक में पीपल्स वॉर ग्रुप के ज़रिए यह महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और ओडिशा तक फैली। 1990 के दशक में वामपंथी गुटों का आपस में विलय शुरू हुआ। इसके बाद सीपीआई (माओवादी) का गठन हुआ और इसके बाद नक्सल हिंसा ने गंभीर रूप ले लिया। इस पूरे कालखंड में अधिकांश समय कांग्रेस पार्टी का शासन रहा।
गरीबी और विकास से नक्सलवाद का कोई वास्ता नहीं
अमित शाह ने नक्सलवाद की साजिश का उल्लेख करते हुआ कहा कि नक्सलवाद की जड़ें गरीबी और विकास से जुड़ी नहीं हैं। साठ के दशक के कुछ क्षेत्रों का उदाहरण देना चाहता हूं – बक्सर में साक्षरता दर 35%, सहरसा में 33% और बलिया में 31% थी। इन सभी स्थानों पर साक्षरता दर और प्रति व्यक्ति आय लगभग समान थी, फिर भी नक्सलवाद बस्तर में पनपा, जबकि बक्सर और सहरसा में नहीं पनपा। यदि विकास ही इसका पैमाना होता, तो यह वहाँ भी पनपता; लेकिन इन क्षेत्रों का भूगोल ऐसा नहीं था जहाँ वे छिप सकते थे।
वनवासियों को बरगलाया गया
माओवादियों ने भोले-भाले आदिवासियों को बरगला कर अपनी विचारधारा का अनुयायी बनाया। उन्हें डर था कि यदि ये पढ़-लिख गए, तो हमारे साथ नहीं रहेंगे; इसलिए इन्होंने स्कूल जला दिए। इनके बैंक अकाउंट खुल गए, तो ये हमारे साथ नहीं रहेंगे – इसलिए बैंक भी जला दिए। दवाखाने भी जला दिए और फिर कहा कि विकास वहाँ पहुँचा ही नहीं। वास्तव में, वामपंथी उग्रवाद ने इन क्षेत्रों में विकास को पहुँचने ही नहीं दिया, जबकि आज मोदी जी के नेतृत्व में विकास वहाँ पहुँच रहा है।
नक्सलियों ने माओ को आदर्श माना
अमित शाह ने कहा कि हमारे 10 हजार साल के इतिहास में कितने महान महापुरुष हुए हैं। नक्सलियों ने तिलका मांझी, भगवान बिरसा मुंडा, भगत सिंह और सुभाष बाबू को आदर्श नहीं माना; इन्होंने माओ को अपना आदर्श माना। ये अपने आदर्श भी विदेश से इंपोर्ट करते हैं। क्या है माओवादी विचारधारा? हमें सिखाया गया है ‘सत्यमेव जयते’, यानी सत्य की हमेशा विजय होती है। इनका ध्रुव वाक्य है – ‘सत्ता बंदूक की नली से निकलती है’।
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