दिल्ली पुलिस लगातार अवैध बांग्लादेशियों समेत अन्य के खिलाफ अभियान चला रही है। इसी क्रम में उत्तर-पश्चिमी जिले में 7 अवैध बांग्लादेशियों को गिरफ्तार किया गया है। ये सभी रेड सिग्नल पर महिलाओं के भेष में वसूली किया करते थे। लेकिन, पुलिस को एक बात चौंकाने वाली पता चली कि ये सभी स्मार्टफोन चलाते थे और सुरक्षित नेटवर्क के जरिए लगातार बांग्लादेश के संपर्क में थे। ये नेटवर्क IMO।
लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस की फॉरेनर सेल को गिरफ्तार किए गए सातों बांग्लादेशियों में से पांच किन्नर और दो पुरुष थे। इसके अलावा पुलिस ने इन बांग्लादेशियों के पास से पांच स्मार्टफोन भी मिला है। हिरासत में इनसे पूछताछ के दौरान इन सभी ने इस बात को स्वीकार किया कि ये अवैध तरीके से भारत में घुसे थे। इसके अलावा ये सभी रात के अंधेरे में अवैध गतिविधियों में भी शामिल पाए गए हैं।
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क्या है आईएमओ
अहम बात ये कि इन सभी के पास से जो स्मार्टफोन मिले हैं। उसमें इन लोगों ने IMO एप इंस्टाल कर रखे थे। इसी के जरिए ये बांग्लादेश में लगातार संपर्क में थे। इस ऐप की खासियत ये है कि ये मुफ़्त, सरल और सुरक्षित इंस्टेंट मैसेजिंग और वीडियो कॉलिंग की सुविधा देता है। लो इंटरनेट पर भी ये बहुत ही अच्छे से काम करता है। इसमें व्हाट्सएप की ही तरह एंड टू एंड इन्क्रिप्टेड मैसेज और कॉल की सुविधा है। इस कारण से इसे ट्रैक कर पाना मुश्किल होता है।
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, आईएमओ ऐप भारत में प्रतिबंधित है। इन ऐप्स का इस्तेमाल पाकिस्तान में बैठे आतंकवादी जम्मू-कश्मीर में सक्रिय कार्यकर्ताओं और अन्य गुर्गों को कोडेड संदेश भेजने के लिए कर रहे थे।
बांग्लादेश के अलग-अलग शहरों के हैं
पकड़े गए बांग्लादेशी मुख्यत: फरीदपुर, ढाका, बरीसाल,चटगांव और जमालपुर के रहने वाले हैं। डीसीपी भीष्म सिंह इस मामले में कहते हैं कि हमें इनपुट मिला था कि कुछ संदिग्ध लोग मुकुंदपुर फ्लाईओवर के आसपास देखे गए हैं। इसके बाद जब हमारी टीम ने पड़ताल की और इन्हें पकड़ा तो इसका खुलासा हुआ। ये सभी फ्लाईओवर के आसपास भीख मांग रहे थे।
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दिल्ली कैंट से भी पकड़े गए पांच बांग्लादेशी
इसके साथ ही दिल्ली कैंट से भी पांच बांग्लादेशियों को पकड़ा गया है, जिसमें जिम्मू खातून, उसका 40 दिन का बेटा, उकिल अमीन, अब्दुल रहीम और मोहम्मद जहीदुल इस्लाम शामिल है।

















