ममता बनर्जी की कम होती लोकप्रियता विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी समस्या दिख रही है। ममता बनर्जी की व्यक्तिगत लोकप्रियता का आंकलन दो चुनाव परिणामों से किया जा सकता है। पहला कि ममता बनर्जी खुद का 2021 का चुनाव नंदीग्राम विधानसभा सीट से हार गई थीं। दूसरा उनके वर्तमान भबानीपुर विधानसभा सीट पर लोकसभा चुनाव में पार्टी का कमतर प्रदर्शन ममता बनर्जी और उनके पार्टी के लिए अत्यंत चिंता का विषय है। भबानीपुर विधानसभा सीट पर ममता बनर्जी 2021 के उपचुनाव में 58835 मतों से जीती थीं, जो कुल पड़े मतों का 49.61 प्रतिशत था।

मगर 2024 के लोकसभा चुनाव में कोलकता दक्षिण लोकसभा सीट के अंतर्गत भाबनीपुर विधानसभा की सीट पर तृणमूल कांग्रेस के बढ़त का अंतर घटकर महज 8269 मतों का रह गया है, जो कुल पड़े मतों का महज 6.21 प्रतिशत है। यह ममता बनर्जी की गिरती लोकप्रियता दिखाता है, क्योंकि तृणमूल कांग्रेस उस सीट पर भी अच्छी बढ़त नहीं बना सकी, जिसका प्रतिनिधितव खुद ममता बनर्जी कर रही हैं।
भबानीपुर विधानसभा का 2024 लोकसभा चुनाव का परिणाम

2021 का विधानसभा चुनाव नंदीग्राम से हारने के बाद ऐसी उम्मीद लगाई जा रही थी कि ममता बनर्जी किसी अन्य पार्टी नेता को मुख्यमंत्री का पद सौंप कर उपचुनाव जीतने के बाद मुख्यमंत्री का पद ग्रहण करेंगी, मगर ममता बनर्जी ने ऐसा बिलकुल नहीं किया और खुद ही चुनाव हारने के बाद मुख्यमंत्री बन गईं।
ममता को अपने ही नेताओं पर नहीं है भरोसा
ऐसा करने का एकमात्र कारण था कि ममता बनर्जी को अपने पार्टी के नेताओं पर विश्वाश नहीं हैं। 1996 में केरल में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट ने वी.एस. अच्युतानंदन को अपना मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाकर चुनाव लड़ा, मगर एलडीएफ के चुनाव जीतने के बावजूद भी वी.एस. अच्युतानंद मुख्यमंत्री नहीं बन सके थे, क्योंकि वो अपना ही चुनाव हार गए थे। 1996 में वी.एस. अच्युतानंद मारारिकुलम विधानसभा सीट से 1965 मतों से चुनाव हार गए थे और एलडीएफ ने ई के नायनार को मुख्यमंत्री बनाया। वहीं ममता बनर्जी ने 2021 में चुनावी हार के बावजूद भी मुख्यमंत्री का पद ग्रहण करके अन्य हारे हुए नेताओं के लिए दरवाजा खोल दिया है।
भाजपा की बढ़ती लोकप्रियता
2021 के उपचुनाव से 2024 के लोकसभा के चुनाव के बीच जहाँ भाजपा का वोट इस सीट पर लगभग दुगुना हो गया है। वहीं तृणमूल कांग्रेस का वोट ममता बनर्जी की व्यक्तिगत सीट होने के बावजूद भी दो तिहाई ही रह गया। यह ना सिर्फ तृणमूल कांग्रेस की गिरती लोकप्रियता बल्कि ममता बनर्जी की कम होती जनस्वीकार्यता को भी दर्शाता है। भबानीपुर विधानसभा सीट पर आश्वचर्यजनक तौर पर भाजपा और माकपा का वोट तो बढ़ा मगर तृणमूल कांग्रेस के वोट में एक तिहाई से अधिक की गिरावट दर्ज़ की गई। ममता बनर्जी अपनी खुद की और पार्टी की गिरती जनाधार से अंदर ही अंदर काफी परेशान हैं।
















