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48 वर्षों बाद पुरी श्रीजगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की सूचीकरण प्रक्रिया शुरू

ओडिशा के पवित्र श्री जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार में सुरक्षित बहुमूल्य आभूषणों और धरोहरों की बहुप्रतीक्षित सूचीकरण (इन्वेंट्री) एवं सत्यापन प्रक्रिया 25 मार्च से आरंभ हो गई है।

Written byडॉ. समन्वय नंदडॉ. समन्वय नंद
Mar 25, 2026, 01:28 pm IST
inओडिशा

भुवनेश्वर: ओडिशा के पवित्र श्री जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार में सुरक्षित बहुमूल्य आभूषणों और धरोहरों की बहुप्रतीक्षित सूचीकरण (इन्वेंट्री) एवं सत्यापन प्रक्रिया 25 मार्च से आरंभ हो गई है। लगभग 48 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद यह महत्वपूर्ण कार्य एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत किया जाएगा, जिसे प्रशासनिक पारदर्शिता और धार्मिक मर्यादा के संतुलन के साथ तैयार किया गया है।

मंदिर प्रशासन के अनुसार, यह प्रक्रिया शुभ मुहूर्त में दोपहर 12:09 बजे से 1:45 बजे के बीच शुरू हुई। जिससे परंपराओं का पूर्ण पालन सुनिश्चित हो सके। यह केवल आभूषणों की गणना नहीं, बल्कि पीढ़ियों से श्रद्धालुओं द्वारा भगवान श्री जगन्नाथ को अर्पित आस्था और भक्ति की धरोहर का पुनः अभिलेखीकरण भी है।

1978 की सूची से होगा मिलान
अधिकारियों ने बताया कि इस प्रक्रिया के तहत रत्न भंडार में मौजूद प्रत्येक आभूषण का मिलान वर्ष 1978 में तैयार की गई सूची से किया जाएगा, जो अब तक का अंतिम आधिकारिक रिकॉर्ड है। प्रत्येक आभूषण को सावधानीपूर्वक जांचा जाएगा, उसका वजन किया जाएगा और उसे टैग कर पहचान सुनिश्चित की जाएगी। इस दौरान आभूषणों का कोई मौद्रिक मूल्यांकन नहीं किया जाएगा, बल्कि केवल दस्तावेजीकरण और सत्यापन पर ध्यान केंद्रित रहेगा।

आधुनिक तकनीकों का होगा उपयोग
इस बार सूचीकरण प्रक्रिया को अधिक सटीक और सुरक्षित बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया जा रहा है। डिजिटल फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और 3D मैपिंग के माध्यम से प्रत्येक आभूषण का विस्तृत डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। यह भविष्य में संदर्भ के लिए एक स्थायी और विश्वसनीय दस्तावेज के रूप में कार्य करेगा।

कड़ी सुरक्षा और दो समितियों का गठन
पूरी प्रक्रिया कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच संपन्न होगी। राज्य सरकार ने इसके लिए दो समितियों का गठन किया है—एक पर्यवेक्षण समिति , जो पूरे कार्य की निगरानी करेगी, और दूसरी हैंडलिंग समिति, जो सीधे तौर पर सूचीकरण कार्य में शामिल होगी। इस कार्य में विशेषज्ञों की भी भागीदारी सुनिश्चित की गई है। इस बार दो जेमोलॉजिस्ट (रत्न विशेषज्ञ), एक मेटलर्जिस्ट, राष्ट्रीयकृत बैंकों द्वारा अनुशंसित दो स्वर्णकार, मंदिर के पारंपरिक स्वर्णकार और भारतीय रिजर्व बैंक के दो वरिष्ठ अधिकारी भी प्रक्रिया का हिस्सा होंगे। उल्लेखनीय है कि 1978 की सूचीकरण प्रक्रिया में जेमोलॉजिस्ट शामिल नहीं थे।

चरणबद्ध तरीके से होगा कार्य
सूत्रों के अनुसार, यह प्रक्रिया चरणबद्ध ढंग से पूरी की जाएगी। पहले दैनिक अनुष्ठानों में उपयोग होने वाले आभूषणों का सत्यापन होगा। इसके बाद बाहरी कक्ष (बाहार भंडार) में रखे विशेष अवसरों पर उपयोग होने वाले आभूषणों की सूची तैयार की जाएगी। अंत में आंतरिक कक्ष (भीतर भंडार), जहां सबसे बहुमूल्य धरोहरें रखी गई हैं, का सूचीकरण किया जाएगा।

अनुष्ठानों पर नहीं पड़ेगा कोई असर
मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान भगवान के दैनिक अनुष्ठान (निति) और पूजा-पाठ पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। श्रद्धालुओं की आस्था को ध्यान में रखते हुए दर्शन व्यवस्था भी जारी रहेगी, हालांकि सुरक्षा कारणों से भक्तों को ‘बहारा कथा’ से ही दर्शन की अनुमति दी जाएगी।

प्रशासन की अपील और महत्व
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के मुख्य प्रशासक अरविंद पाढी ने इसे पुरी के इतिहास का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया है। उनके अनुसार, यह प्रक्रिया प्राचीन परंपराओं और आधुनिक संरक्षण प्रणाली के बीच एक सेतु का कार्य करेगी। वहीं, ओडिशा के विधि मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने कहा कि पूरी प्रक्रिया को पारदर्शिता और एसओपी के अनुरूप सख्ती से लागू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रत्येक आभूषण का नाम, वजन, आकार, गुणवत्ता और उसमें जड़े रत्नों की संख्या तक का विस्तृत विवरण दर्ज किया जाएगा। बाद में इन आभूषणों को मुलायम कपड़े में लपेटकर सुरक्षित संदूकों में रखा जाएगा।

न्यायालय की निगरानी
ओडिशा उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि इस सूचीकरण प्रक्रिया को तीन महीने के भीतर पूरा किया जाए। हालांकि, मंत्री ने कहा कि कार्य की जटिलता को देखते हुए निश्चित समयसीमा तय करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

श्रद्धालुओं में खुशी
इस लंबे समय से लंबित प्रक्रिया की शुरुआत को लेकर श्रद्धालुओं में संतोष और खुशी का माहौल है। भक्तों का मानना है कि इससे मंदिर की धरोहरों का संरक्षण और पारदर्शिता दोनों सुनिश्चित होंगे। अंततः, यह प्रक्रिया केवल स्वर्ण, रत्न और आभूषणों की गणना भर नहीं, बल्कि उन करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान है, जिन्होंने सदियों से भगवान जगन्नाथ को अपनी श्रद्धा अर्पित की है। रत्न भंडार के द्वार खुलने के साथ ही जहां प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाई जाएगी, वहीं यह आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण का भी एक ऐतिहासिक क्षण होगा।

Topics: OdishaShri Jagannath TempleVerification Processverification process begins at Jagannath Temple
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