कर्णावती: यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड बिल मंगलवार को गुजरात विधानसभा में बहुमत से पास हो गया। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने यह बिल पेश किया। चर्चा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों ने विचार रखे। कांग्रेस ने बिल का विरोध करते हुए इसे सेलेक्ट कमेटी में भेजने और अगले सत्र में पेश करने की मांग की। बिल पर चर्चा के बाद सदन रात 11 बजे तक चला।
विवाह का रजिस्ट्रेशन जरूरी
यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड बिल पेश करते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि UCC हर वर्ग, समाज और धर्म पर एक जैसा कानून लागू करता है। इस कानून के तहत मैरिज रजिस्ट्रेशन ज़रूरी कर दिया गया है। शादी के 60 दिनों के अंदर मैरिज रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। जो लोग रजिस्ट्रेशन नहीं करवाएंगे, उन्हें जुर्माना और सज़ा हो सकती है। एक से ज़्यादा शादी करने वालों को 7 साल तक की सज़ा होगी।
कोर्ट के बाहर तलाक अमान्य
कोर्ट के बाहर तलाक अब अमान्य माना जाएगा। कोर्ट के बाहर तलाक लेने वालों को 3 साल की सज़ा होगी। तलाक और बच्चों की कस्टडी के मामले अब सभी धर्मों और समुदायों पर एक जैसे नियम लागू होंगे।
लिव इन का रजिस्ट्रेशन जरूरी
लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन भी ज़रूरी कर दिया गया है। जो लोग रजिस्ट्रेशन नहीं करवाते हैं, उन्हें 3 महीने की जेल और 10 हज़ार रुपये का जुर्माना होगा। जो लोग किसी नाबालिग के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहते हैं, उन्हें अब POCSO के तहत सज़ा मिलेगी।
श्रद्धा वाल्कर को किया याद
मुख्यमंत्री ने श्रद्धा वाल्कर के मामले को याद करते हुए कहा कि हम बेटियों को श्रद्धा वाल्कर जैसी भयानक घटनाओं से बचाने के अपने कर्तव्य के तहत यह नया कानून ला रहे हैं। अब गुजरात में उन लोगों के लिए कोई जगह नहीं है जो अपनी पहचान छिपाकर या धोखा देकर शादी करते हैं।
UCC परंपराओं की रक्षा करता है
मुख्यमंत्री ने कहा कि UCC बिल जनजातीय समुदाय को अपनी सदियों पुरानी परंपराओं का पालन करने की आज़ादी देता है, इसलिए, सेक्शन 366 के तहत वनवासियों और सभी अनुसूचित जनजातियों (ST) को इस कानून से छूट दी गई है। अगर किसी अल्पसंख्यक समाज में किसी अजनबी से शादी करने की परंपरा है, तो UCC इस परंपरा की भी रक्षा करता है। UCC कानून भेदभाव को दूर करने के लिए है, संस्कृतियों को मिटाने के लिए नहीं।
हर्ष संघवी ने UCC बिल कमेटी को मिले समर्थन के आंकड़े पेश किए
उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने सदन में कहा कि इस विषय की संवेदनशीलता को समझते हुए बनाई गई कमेटी ने बहुत ज़्यादा पब्लिक आउटरीच किया है। कमेटी ने पोस्ट, ई-मेल और वेब पोर्टल के ज़रिए सुझाव मांगे और करीब 20 लाख सुझाव मिले हैं। देश के इतिहास में किसी भी कानून के लिए इतनी बड़ी जन भागीदारी शायद ही कभी देखी गई हो। हर्ष संघवी ने कहा कि 49% यानी 9.72 लाख सुझाव ई-मेल के ज़रिए आए हैं। 5.5% यानी 1.09 लाख सुझाव वेब पोर्टल के ज़रिए मिले हैं। यह डेटा दिखाता है कि गुजराती अब भेदभाव बर्दाश्त करने को तैयार नहीं हैं।
विवाह पर तलाक पर दिए आंकड़े
हर्ष संघवी ने कमेटी को मिले सपोर्ट का परसेंटेज बताते हुए कहा कि 81% लोगों ने कानून में शादी के लिए बराबर प्रोविज़न शामिल करने का सपोर्ट किया है। 79% लोगों ने तलाक के लिए एक जैसा कानून बनाने पर अपनी मुहर लगाई है। 83% लोगों का मानना है कि फैमिली लॉ में महिलाओं के साथ होने वाला भेदभाव तुरंत खत्म होना चाहिए। 86% लोगों ने शादी या तलाक का रजिस्ट्रेशन ज़रूरी करने का सपोर्ट किया है। 83% लोग सभी कम्युनिटी में तलाक के लिए एक जैसे आधार होने के पक्ष में हैं। 83% लोगों ने महिला विरोधी और भेदभाव वाले तलाक कानूनों को खत्म करने के लिए हाँ कहा है। 83% लोग तलाक के बाद गुज़ारे के लिए एक जैसा कानून होने के भी पक्ष में हैं। सभी कम्युनिटी में महिलाओं और पुरुषों के लिए प्रॉपर्टी/एसेट का बराबर अधिकार होना चाहिए, जिसके लिए भी देश के 83% लोगों ने पुरज़ोर समर्थन किया है।
अब कोई भी सलीम सुरेश बनकर गुजरात की बेटी को धोखा नहीं दे सकता
हर्ष संघवी ने सदन में बताया कि UCC लागू होने से अब कोई भी सलीम सुरेश बनकर अपनी बेटी को धोखा नहीं दे सकता। जो लोग अपनी पहचान छिपाते हैं और झूठी पहचान बताकर लड़कियों को धोखा देते हैं, वे 5 साल तक जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे। मैं ऐसे लोगों को ढूंढ़कर पकड़ूंगा।

















