झारखंड में बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठियों की जड़ें अब इतनी गहरी हो चुकी हैं कि उनसे निपटना दिन-ब-दिन चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। यह समस्या विशेष रूप से संथाल परगना क्षेत्र यानी साहिबगंज, पाकुड़, गोड्डा, दुमका, देवघर और जामताड़ा में साफ तौर पर दिखाई देती है। हालांकि, इसका प्रभाव केवल इन्हीं क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा कोल्हान क्षेत्र सहित राज्य के अन्य कई जिलों में भी धीरे-धीरे फैलता जा रहा है।
इस कारण कई क्षेत्रों में ‘जमीन जिहाद’ और ‘लव जिहाद’ की भी घटनाएं सामने आ रही हैं। इसका असर स्थानीय जनसंख्या पर भी हो रहा है। कई स्थानों की जनसंख्या पूरी तरह बदल चुकी है। जहां पहले हिंदू अधिक होते थे, वहां अब मुसलमान अधिक हो चुके हैं। इतना ही नहीं, पहचान बदलकर स्थानीय लोगों के बीच रहना, आपराधिक गतिविधियों में शामिल होना, स्थानीय चुनावों में भाग लेना या उन्हें प्रभावित करने जैसी गतिविधियों के आरोप भी सामने आते रहे हैं। आश्चर्य की बात तो यह है कि संथाल परगना क्षेत्र से ही वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन चुनाव जीत कर आते हैं।
साहिबगंज जिला पिछले कई दशकों से बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठ और उनके द्वारा भारतीय दस्तावेजों के दुरुपयोग का केंद्र बना हुआ है। एक रिपोर्ट के अनुसार, 7 अगस्त, 2014 को केरल में सोना चोरी के आरोप में मोहम्मद फारुख हुसैन उर्फ फुरात हुसैन की गिरफ्तारी उधवा प्रखंड में हुई थी। केरल पुलिस की पूछताछ में खुलासा हुआ कि वह मूलतः बांग्लादेश के ठाकुरगांव जिले का निवासी है। वह उधवा के बेगमगंज और पियारपुर में अपनी पहचान बदलकर रह रहा था। चौंकाने वाली बात यह थी कि उसने पियारपुर पंचायत से आधार कार्ड तक बनवा लिया था। गिरफ्तारी के वक्त वह एक स्थानीय मस्जिद का गुंबद बनाने वाले राजमिस्त्री के रूप में काम कर रहा था।
अब सवाल उठता है कि इतनी आसानी से ये लोग घुसपैठ कैसे कर पा रहे हैं? इसका उत्तर इन्हीं घुसपैठियों से मिलता है। 18 मार्च, 2016 को एक रिपोर्ट आई थी, जिसमें उधवा के पियारपुर में एक बड़ा खुलासा हुआ था। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि एक बांग्लादेशी युवक अफजल शेख ने बीएलओ की मदद से न केवल मतदाता सूची में नाम जुड़वाया, बल्कि पैन कार्ड और पासपोर्ट भी बनवा लिया। अफजल मूलतः बांग्लादेश के हरिपुर थाना क्षेत्र का रहने वाला था। स्थानीय पारा शिक्षक और बीएलओ सफीउद्दीन शेख ने उसे अपने परिवार का सदस्य बताकर कागजात तैयार करवाए थे। मामला तब उजागर हुआ, जब पुलिस ने जाली नोटों के साथ अन्य युवकों को पकड़ा और उनके तार अफजल से जुड़े।
ऐसी ही एक घटना 14 मई, 2018 को देखने को मिली थी। पश्चिमी प्राणपुर पंचायत में एक बांग्लादेशी नागरिक अताउर शेख का नाम फर्जी तरीके से मतदाता सूची में दर्ज कराने के आरोप में मुखिया बदसु शेख और बीएलओ फिरोज शेख सहित 13 लोगों पर प्राथमिकी दर्ज हुई। रियासुद्दीन शेख की शिकायत पर हुई इस कार्रवाई में पता चला कि अताउर ने बांग्लादेश में अपराध कर यहां शरण ले रखी थी और उसने स्थानीय महिला से शादी भी कर ली थी।
अवैध तरीके से फर्जी दस्तावेज बनाने का यह खेल नया नहीं है। एक आंकड़े के अनुसार, 1951 में जनजातीय समाज की आबादी 44.67 प्रतिशत थी, जो घट कर 2011 में 28.11 प्रतिशत ही रह गई है। दूसरी ओर मुस्लिम आबादी 9.44 प्रतिशत से बढ़कर 22.73 प्रतिशत हो चुकी है। इसी तरह कुछ तत्व सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से घुसपैठियों को मतदाता बनवा देते हैं। इसका असर यह पड़ रहा है कि धीरे-धीरे अब यही लोग स्थानीय चुनाव पर भी अपना असर डालने लगे हैं, जिससे जनजातीय वोट बैंक पर सीधा खतरा बना हुआ है।
जनजातीय समाज की आबादी घटने का मुख्य कारण लैंड जिहाद करके उनकी जमीन को हड़प लेना, लव जिहाद के जरिए उनकी बेटियों से शादी करके उनकी पूरी संस्कृति को बदल देना रहा है। सिर्फ इतना ही नहीं, कई जगहों से ऐसी भी खबरें आई हैं, जहां लव जिहाद करके जनजाति बेटियों से शादी की गई और उसके बाद उन्हें स्थानीय चुनाव में खड़ा किया गया, फिर उन्हीं की मदद से कई लोगों के फर्जी दस्तावेज भी तैयार कराए गए।
समय-समय पर इन मामलों को कई मीडिया, जनजातीय संगठनों और नेताओं ने भी विधानसभा से लेकर लोकसभा तक उठाया है। इस मामले को भाजपा सांसद निशिकांत दुबे संसद में उठा चुके हैं। वे कहते रहे हैं, ”संथाल परगना में जनजातीय आबादी लगातार घटती जा रही है। घुसपैठिए जनजातीय महिलाओं को झूठे प्रेम जाल में फंसाकर उनसे शादी कर रहे हैं, उनकी जमीन पर कब्जा कर रहे हैं और इन क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय परिवर्तन हो चुका है। इसीलिए यहां एनआरसी बेहद जरूरी है।”
घुसपैठिए पहचान बदलकर स्थानीय लोगों के रोजगार और संसाधनों पर कब्जा तो कर ही रहे हैं, इसके साथ ही वे भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए भी खतरा बनते रहे हैं। 22 जनवरी, 2016 को एक रिपोर्ट में बताया गया था कि राधानगर थाना क्षेत्र के पलाश गाछी निवासी मेहंदी हुसैन, यार मोहम्मद और आलमगीर को तत्कालीन एसपी सुनील भास्कर के नेतृत्व में 6 लाख रुपये के जाली नोटों के साथ पकड़ा गया। ये आरोपी बंगाल से जाली नोट लेकर मुंबई जाने की फिराक में थे। इस सिंडिकेट के तार सीमा पार से जुड़े होने की आशंका जताई गई थी।
इसी तरह की एक और घटना 2018 के नवंबर महीने में आई थी, जब साहिबगंज जिले के उधवा प्रखंड में घुसपैठियों को मिल रहे संरक्षण का सबसे बड़ा प्रमाण मिला था। यहां कोलकाता एसटीएफ और एनआईए ने जाली नोट तस्करी में तैमूर शेख को पकड़ा था। जांच में पता चला कि अताउर रहमान (अताउर शेख) बांग्लादेश के बरुआल क्षेत्र का सक्रिय मतदाता है, लेकिन उसने मुखिया और बीएलओ की मिलीभगत से राजमहल विधानसभा की मतदाता सूची में भी अपना नाम दर्ज करा लिया था। तत्कालीन एसपी हरदीप पी. जनार्दन के समक्ष आए गवाहों ने पुष्टि की कि घुसपैठियों को जनप्रतिनिधियों का संरक्षण प्राप्त था।
झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने 22 मई, 2025 को बांग्लादेशी घुसपैठ को लेकर हेमंत सरकार पर आरोप लगाया था कि सरकार इस घुसपैठ को रोकने के लिए कोई पहल नहीं कर रही और इसे स्वीकार करने से भी इनकार कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सभी राज्यों को अवैध बांग्लादेशी नागरिकों की जांच और निर्वासन के लिए समिति गठित करने का निर्देश दिया था, लेकिन झारखंड सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया।
श्री मरांडी ने यह भी दावा किया कि घुसपैठिए फर्जी दस्तावेजों से सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं, जिससे संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है और मूल निवासियों को उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है।
बांग्लादेशी घुसपैठिए संथाल परगना से बाहर अब कोल्हान में भी तेजी से बसते जा रहे हैं। पूर्वी सिंहभूम जिले के चाकुलिया स्थित गांव में जहां कोई भी मुस्लिम परिवार नहीं रहता, वहां 3 हजार मुस्लिम बच्चों का आधार कार्ड बन जाना झारखंड की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।
मस्जिद मदरसों…
— Babulal Marandi (@yourBabulal) April 26, 2025
घुसपैठ के कई मामले संथाल परगना के बाद अब कोल्हान क्षेत्र में भी देखने को मिल रहे हैं। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और प्रतिपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने भी 26 जनवरी, 2025 को ट्वीट करते हुए बताया था कि बांग्लादेशी घुसपैठिए संथाल परगना से बाहर अब कोल्हान में भी तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। पूर्वी सिंहभूम के चाकुलिया स्थित गांव में, जहां कोई मुस्लिम परिवार नहीं रहता था, वहां 3000 मुस्लिम बच्चों के आधार कार्ड बन चुके हैं, जो झारखंड की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मस्जिद-मदरसों में घुसपैठियों को शरण देकर उनका वैध दस्तावेज तैयार किया जा रहा है। इसके बावजूद हेमंत सरकार बांग्लादेशी घुसपैठ की जांच रुकवाने सर्वोच्च न्यायालय पहुंच जा रही है।
आपको बता दें कि झारखंड उच्च न्यायालय ने भी घुसपैठ के मामले को बेहद गंभीर बताया है। न्यायालय ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा माना है और राज्य सरकार के साथ-साथ केंद्र सरकार को भी फटकार लगाई है। जुलाई, 2024 में उच्च न्यायालय ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि बांग्लादेशी घुसपैठियों का झारखंड में प्रवेश बहुत ही खतरनाक है। वे दूसरे राज्यों में भी फैलेंगे और वहां की आबादी को भी प्रभावित करेंगे।
न्यायालय ने सितंबर, 2024 में इस मामले की गंभीरता को देखते हुए ‘इंडिपेंडेंट फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी’ गठित करने की बात कही थी, ताकि घुसपैठ की जांच, पहचान और सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें।
आश्चर्य की बात यह है कि वर्तमान में जनजातियों की सरकार कही जाने वाली हेमंत सरकार ने इसे गंभीरता से तो नहीं ही लिया, बल्कि इस मामले को वह सर्वोच्च न्यायालय चली गई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी घुसपैठ को बेहद गंभीर मामला बताते हुए 2024 में जमशेदपुर की रैली में कहा था कि संथाल परगना में जनसांख्यिकी तेजी से बदल रही है। झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस घुसपैठियों को वोट बैंक बना रहे हैं। फिर भी सरकार की नींद नहीं टूट रही।
अब वक्त आ गया है कि जनजातीय समाज और सनातन सरना संस्कृति की रक्षा के लिए एनआरसी और सख्त कानून लागू हों, वरना आने वाली पीढ़ियां इतिहास के पन्नों में खो जाएँगी।
साहिबगंज के ही रहने वाले हिंदू धर्म रक्षा मंच के केंद्रीय अध्यक्ष सह अधिवक्ता संत कुमार घोष का कहना है कि ये घटनाएं केवल छिटपुट मामले नहीं हैं, बल्कि एक संगठित तंत्र की ओर इशारा करती हैं। फर्जी आधार, पैन कार्ड और वोटर आईडी के सहारे घुसपैठिए न केवल हमारी सुरक्षा में सेंध लगा रहे हैं, बल्कि जनसांख्यिकीय परिवर्तन का कारण भी बन रहे हैं। प्रशासन को इन ‘स्लीपर सेल्स’ और उनके मददगारों पर कड़ी कार्रवाई करने की आवश्यकता है।

















