ईरान में इस साल के आरंभ में जनता ने विद्रोह किया था, मगर सरकार ने इस आवाज को दबा दिया था। उसने यह जनता को विश्वास में लेकर नहीं, बल्कि दमन के माध्यम से किया था। यह समाचार आने लगे थे कि कैसे नृशंस तरीके से सरकार ने अपने ही नागरिकों को मारना शुरू कर दिया था। अब अमेरिका और इजरायल के साथ संघर्ष के समय भी उन नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है, जिन्होंने उस समय सरकार का विरोध किया था।
हाल ही में तीन किशोरों को फांसी दी गई है। मानवाधिकार के लिए काम करने वालों का कहना है कि उन्हें आशंका है कि युद्ध के बाद इन प्रदर्शनकारियों पर हिंसा और तेज होगी। सोशल मीडिया से लेकर अन्य मंचों तक ऐसे तमाम नाम शामिल हैं, जो इस खतरे के विषय में बता रहे हैं और साथ ही उन लोगों की कहानियां भी साझा कर रहे हैं, जो अब ईरान की सरकार के हाथों मौत की सजा पा सकते हैं।
22 मार्च को ऐसी ही एक रिपोर्ट सामने आई है, जो यह बताती है कि कैसे प्रदर्शनकारियों के साथ नृशंसता की सारी सीमा पार की जा रही है। express.com के अनुसार एमनेस्टी इन्टरनेशनल ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने यह आरोप लगाया कि अधिकारियों ने सरकार का विरोध करने वाली महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ यौन हिंसा की है। 30 जनवरी को ही यह रिपोर्ट जारी की गई थी कि जिन प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है, उनके साथ अत्याचार किये जाने की आशंका है।
तेहरान में दो नर्सों के साथ बलात्कार
ईरान इन्टरनेशनल पोर्टल के अनुसर ईरान की सुरक्षा एजेंसियों के एजेंट्स ने विरोध प्रदर्शन करने वालों की सहायता करने वाली दो नर्सों के साथ सामूहिक बलात्कार किया। 15 मार्च 2026 की इस रिपोर्ट के अनुसार तेहरान आधारित सूत्रों ने सुरक्षा की दृष्टि से गोपनीय रहते हुए यह बताया कि कैसे दो नर्सों के साथ यह जघन्य अपराध सरकार के अधिकारियों द्वारा किया गया। दिसंबर और जनवरी में ईरान में फैले विरोध प्रदर्शनों के समय ये दोनों नर्स तेहरान के Rajaei Cardiovascular मेडिकल और रिसर्च सेंटर में काम करती थीं।
इन दोनों में से एक नर्स की उम्र 33 वर्षीय थी। उसके साथ हिरासत में यौन दुर्व्यवहार किया गया। सूत्रों के अनुसार, उंगलियों से उसके साथ जबरदस्ती करने के अलावा, एजेंटों ने लगातार कई दिनों तक दो या तीन के समूहों में उसके साथ बलात्कार किया। उन्होंने उसकी गुदा में कोई बाहरी वस्तु डालकर भी उसके साथ बलात्कार किया, जिससे उसके शरीर से काफी खून बह गया। उसे और अन्य गिरफ्तार महिलाओं को एक सुनसान स्थान पर ले जाकर एक छोटे गड्ढे जैसी जगह पर डाल दिया। उस महिला के घाव इतने गहरे थे कि डॉक्टर को उसकी आंत का एक हिस्सा निकालना पड़ा था। उसके गर्भाशय को भी काफी नुकसान पहुंचा था।
एक और नर्स के साथ भी सामूहिक बलात्कार किया गया। उसके साथ इस सीमा तक नृशंसता हुई कि डॉक्टर्स को उसका गर्भाशय भी हटाना पड़ा। सूत्र यह भी बताते हैं कि इन दोनों नर्सों में से एक नर्स के परिवार को उसकी रिहाई सुनिश्चित करने के लिए पैसे भी देने पड़े थे।
कई किशोर और किशोरियों पर लटक रही है फांसी की तलवार
एक्स पर इस समय कई पोस्ट्स उन किशोर और किशोरियों के नामों और तस्वीरों के साथ आ रही हैं, जिन्हें ईरान की सरकार ने दिसंबर-जनवरी में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार कर लिया था और अब उन्हें मौत की सजा सुनाई जा रही है। ऐसी ही एक 18 वर्षीय किशोरी है मेलिका अजीजी। जिसे रात में उसके घर से गिरफ्तार कर लिया था और फिर उसे लकन जेल में रखा गया था। उसे मौत की सजा सुनाई गई तो भी वह शांत रही और उसने अपने जीवन की भीख नहीं मांगी।
एक यूजर ने एक बच्ची की तस्वीर साझा की है। महसा सरली, जो महज 14 वर्ष की है और उसे आईआरजीसी ने गिरफ्तार कर लिया है।
There is an empty chair at a dinner table tonight. A school desk is vacant. A bedroom is cold. Mahsa Saril, just 14 years old, has been stolen from her family by the IRGC. For the "crime" of asking for a future, she now faces execution. She is a child. SHE IS A CHILD. Say her… pic.twitter.com/IQXrl1kKwW
— APADRA 🇮🇷 (@DGascoign3) March 22, 2026
जिन लोगों को ईरान की सरकार ने गिरफ्तार किया है, उनके विषय में कोई भी जानकारी देने से इनकार कर दिया है और न ही उनके परिजनों के पास और न ही वकीलों, कार्यकर्ताओं आदि के पास उनकी कोई जानकारी है।
30 जनवरी की एमनेस्टी की रिपोर्ट में भी यह आरोप थे कि 9 जनवरी को ईरानी सुरक्षा बलों ने ईरान के गिलान प्रांत के रश्त में, प्रदर्शनकारी अमीरहुसैन कादरज़ादेह के पारिवारिक घर पर छापा मारा; इस दौरान उन्हें और उनकी दो बहनों को यौन हिंसा का शिकार बनाया गया।
ऐसे एक नहीं कई मामले हैं, जो सोशल मीडिया पर हैं। कई ऐसे चेहरे सोशल मीडिया पर हैं, जिनकी आंखों में जीवन है, मगर यह निश्चित नहीं है कि उनकी आंखों में यह जीवन कब तक रहे। परंतु उससे भी बड़ा दुर्भाग्य यह है कि इन खोते हुए जीवनों पर विमर्श भी नगण्य है।

















