देहरादून: राजधानी देहरादून में 15 साल की नाबालिग लड़की को प्रेमजाल में फंसाकर धर्म परिवर्तन करने का मामला सामने आया है। पीड़िता की मां की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने एक महिला समेत कुल तीन लोगों पर धर्मांतरण कानून के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
क्या है पूरा मामला
मामला डोईवाला थाना क्षेत्र का है, जहां नाबालिग अपनी मां और अपने भाई के साथ किराए पर रहती थी और उसी के पड़ोस में किराए पर एक और मुस्लिम परिवार रहता था। पीड़िता की मां ने बताया कि दोनों परिवारों के बीच अच्छे संबंध थे और उनका एक दूसरे के घर आना जाना भी था। पीड़िता की मां ने पुलिस में शिकायत देकर बताया कि आरोपी कई बार उनकी गैर मौजूदगी में उनके घर पर आता था और बेटी को मुस्लिम धर्म के कपड़े पहनने के लिए प्रेरित करता था।
वहीं, थाना प्रभारी प्रदीप कुमार राणा के अनुसार, मामले की जांच उपनिरीक्षक भावना को सौंपी गई है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस्लामिक कन्वर्जन की कोशिश
शिकायत में पीड़िता की मां ने आरोप लगाया गया कि जब भी वह घर में नहीं होती तो आरोपी घर में आकर उसकी नाबालिक बेटी को अपने प्रेमजाल में फंसाकर मुस्लिम धर्म के अनुसार कपड़े, बोलचाल और व्यवहार के लिए प्रेरित करता था।
ऐसा काफी दिनों तक चलता रहा और धीरे-धीरे बेटी भी मुस्लिम धर्म को मानने लगी और धर्म को पसंद करने लगी। अब नाबालिग की मां ने डोईवाला थाने में मामले की लिखित शिकायत देते हुए आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
झूठे प्रेमजाल में फंसाया
पीड़िता की मां ने पुलिस को बताया कि वह पिछले चार साल से किराए पर रह रही हैं। उनके पड़ोस में रहने वाले गुलिस्तां, उसका भाई सारिक और एक अन्य व्यक्ति राशिद का उनके घर आना-जाना था। आरोप है कि मां की गैरमौजूदगी में राशिद अक्सर घर आता था और नाबालिग बेटी को अपने प्रेमजाल में फंसाकर मुस्लिम धर्म के अनुसार कपड़े पहनने, बोलचाल और व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित करता था। धीरे-धीरे किशोरी उस धर्म को मानने और पसंद करने लगी।
धर्म परिवर्तन के लिए उकसाया
पीड़िता की मां का आरोप है कि आरोपियों ने मिलकर उसकी बेटी को बहलाया-फुसलाया और धर्म परिवर्तन के लिए उकसाया। उन्होंने पुलिस से आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। डोईवाला पुलिस ने 21 मार्च को शाम 7:52 बजे मामला दर्ज किया। आरोपियों राशिद, गुलिस्तां और सारिक के खिलाफ उत्तराखंड धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2018 की धारा 3 और 5 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।














