अमेरिका के द्वारा ईरानी तेल पर से प्रतिबंधों को हटाए जाने के बाद भारत की तेल रिफाइनरी कंपनियां अब ईरान से फिर से क्रूड ऑयल खरीदने की तैयारी में जुट गई हैं। मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और जंग की वजह से वैश्विक स्तर पर ऊर्जा का संकट गहरा गया है, और ऐसे में सस्ता और नजदीकी तेल मिलना भारत के लिए राहत की बात है। लेकिन अभी असल खरीदारी नहीं हो पाई है, क्योंकि कंपनियां भारत सरकार की औपचारिक हरी झंडी का इंतजार कर रही हैं।
क्यों फिर से ईरान की तरफ ध्यान?
ईरानी क्रूड ऑयल भारत के लिए हमेशा आकर्षक रहा है। इसका कारण ये है कि ये काफी सस्ता पड़ता है, और जहाज से भारत पहुंचने में समय भी कम लगता है। होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते सप्लाई जल्दी हो जाती है, जिससे घरेलू ईंधन की कीमतों पर दबाव कम रहता है। अमेरिका ने अब प्रतिबंधों में थोड़ी छूट दी है, खासकर उन तेल के लिए जो पहले से लोड हो चुका है या मार्च-अप्रैल के आसपास डिस्चार्ज होगा। इससे एशिया के दूसरे देशों के साथ-साथ भारतीय रिफाइनर भी इसे मौका मान रहे हैं।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रिफाइनिंग कंपनियां अब ईरानी तेल खरीदने के प्लान बना रही हैं। तीन सूत्रों ने बताया कि वो खरीदना चाहते हैं, लेकिन सरकार से साफ निर्देश और वाशिंगटन से पेमेंट जैसे डिटेल्स पर क्लैरिटी का इंतजार है। कोई भी अनुबंध या असल डील बिना सरकारी अनुमति के नहीं होगी। कंपनियां बहुत सतर्क हैं, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय नियम और अमेरिकी नीतियां बदलती रहती हैं।
ईरान की तरफ से क्या स्थिति है?
ईरान के तेल मंत्रालय ने कहा है कि उनके पास अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए कोई एक्स्ट्रा तेल या सरप्लस नहीं बचा है। वो बेहतर कीमतें और शर्तें मांग रहे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य पर उनकी मजबूत पकड़ है, और वो इसे रणनीतिक तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। भारतीय जहाज जैसे ‘पाइन गैस’ और ‘जग वसंत’ सुरक्षित रास्ते की तलाश में हैं। अगर ईरान अपना रवैया नहीं बदला, तो भारत को सऊदी, इराक, रूस या दूसरे स्रोतों पर ज्यादा निर्भर होना पड़ेगा।
सतर्क है भारत सरकार
इस बीच भारतीय तेल रिफाइनरों ने स्पष्ट कर दिया है कि वो सरकार की मंजूरी के बिना कोई कदम नहीं उठेगा। अमेरिकी छूट मिलने के बावजूद भारत सावधानी बरत रहा है। क्योंकि मिडिल ईस्ट का संकट चल रहा है, और भारत की क्रूड स्टॉक काफी कम है। बताया जा रहा है कि ये केवल 25 दिनों तक का ही है। ऐसे में सरकार हर कदम सोच-समझकर उठा रही है ताकि घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल या एलपीजी की कोई कमी न हो।

















