ईरान युद्ध में विपक्षी प्रोपागेंडा पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अपनी ही पार्टी से अलग केंद्र सरकार का समर्थन किया है। उन्होंने ईरान मुद्दे पर केंद्र सरकार की चुप्पी को सही ठहराया है। उनका कहना है कि यह कोई नैतिक रूप से पीछे हटना नहीं, बल्कि जिम्मेदार विदेश नीति है।
दरअसल, पिछले महीने अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले किए, जिसमें कई आम नागरिक मारे गए और सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई समेत कई बड़े नेता मारे गए थे। इस पर भारत सरकार ने कोई बयान नहीं दिया। इसी को लेकर कांग्रेस केंद्र पर सवाल उठा रही है कि आखिर मोदी सरकार इसकी आलोचना क्यों नहीं करती। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि भारत को एकतरफा सैन्य कार्रवाई की निंदा करते हुए “नैतिक रूप से स्पष्ट” कर लेना चाहिए। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने खामेनेई की हत्या पर भारत की चुप्पी को “निष्पक्षता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से मुंह मोड़ना” बताया।
सरकार के बचाव में उतरे शशि थरूर
थरूर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के हिसाब से यह संघर्ष सही नहीं है और भारत हमेशा से संप्रभुता और गैर-आक्रामकता के सिद्धांतों का समर्थन करता आया है। लेकिन फिर भी नई दिल्ली की चुप्पी को गलत नहीं ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने लिखा कि “इस संदर्भ में चुप्पी कायरता नहीं है। यह हमारे राष्ट्रीय हितों और इलाके की हकीकत के बीच के गहरे संबंध को समझने का शांतिपूर्ण तरीका है।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की चुप्पी युद्ध का समर्थन नहीं है, बल्कि यह समझ है कि राष्ट्रीय हित में सावधानी बरतनी जरूरी है, न कि दिखावा करना। अगर हम बिना सोचे-समझे निंदा करते हैं तो हमारे हितों को नुकसान पहुंच सकता है। वह बताते हुए कहते हैं कि भारत के गल्फ देशों के साथ गहरे आर्थिक संबंध हैं। वहां करीब 90 लाख भारतीय काम करते हैं। सालाना लगभग 200 अरब डॉलर का व्यापार होता है, ऊर्जा की आपूर्ति होती है और रेमिटेंस भी आते हैं। अगर हम नैतिकता के नाम पर अमेरिका-इजरायल की निंदा कर बैठें तो इन रिश्तों में अड़चन आ सकती है।
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विदेश नीति कोई सेमिनार नहीं
उनका कहना है, “विदेश नीति कोई अकादमिक सेमिनार नहीं है। बिना परिणामों को देखे निंदा की मांग करना सिर्फ शब्दों का लग्जरी है, जिम्मेदारी नहीं।” थरूर ने माना कि सरकार ने खामेनेई की मौत पर देर से शोक संदेश दिया, लेकिन फिर भी सरकार को इस वजह से दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए।
विपक्ष को दिखाया आईना
थरूर ने पुराने उदाहरण देते हुए कहा कि शीत युद्ध के समय भारत ने रूस से दोस्ती रखी, भले ही रूस कभी-कभी अंतरराष्ट्रीय कानून तोड़ता रहा। उसी तरह आज रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान पर हमले में भी हमें समझदारी दिखानी चाहिए, न कि नैतिक पोस्टर बनना। उन्होंने साफ कहा, “हमारे हित ग्रैंडस्टैंडिंग यानी बड़े-बड़े दिखावे से नहीं सधते। जब तक हम परिणाम झेलने की क्षमता नहीं रखते, तब तक चुप रहना ही रणनीति हो सकती है।” थरूर ने याद दिलाया कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तहत अमेरिका न तो हमारा दोस्त है और न ही भरोसेमंद साथी, लेकिन फिर भी रक्षा, टेक्नोलॉजी और चीन के मुकाबले के लिए स्थिर संबंध बनाए रखने की जरूरत है।












