केरल विधानसभा चुनाव में गांधी परिवार की साख सबसे ज्यादा दांव पर लगी है। गांधी परिवार के लिए केरल में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट की सरकार बनाना अपनी साख को बचाये रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
वर्तमान में केरल से प्रियंका गांधी वाड्रा सांसद हैं। पूर्व में इस सीट से उनके भाई राहुल गांधी सांसद रह चुके हैं। प्रियंका ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत ही केरल से की है। वह इस परिवार की पहली सदस्य हैं, जिन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत किसी दक्षिणी राज्य से की। प्रियंका से पूर्व इंदिरा गांधी, सोनिया गांधी और राहुल गांधी भी दक्षिणी राज्यों से अपनी राजनीति को धार दे चुके हैं।
राजनीतिक वजूद पर संकट तब आई दक्षिण की याद
आश्चर्यजनक तथ्य है कि गांधी परिवार को दक्षिणी राज्यों की याद तब आई जब उनका राजनीतिक वजूद संदेह के घेरे में था । इंदिरा गांधी 1977 में रायबरेली से चुनाव हारने के बाद चिकमंगलूर से राजनीतिक सफर का नया मोड़ दिया। 1977 में रायबरेली में हारने के बाद पार्टी में इंदिरा की पकड़ कमजोर हो रही थी। इसलिए उन्होंने डीबी चंद्रगौड़ा से इस्तीफा करवाकर यहां से चुनाव जीतकर पार्टी में फिर से स्थित मजबूत की। इसके बाद 1980 में इंदिरा गांधी इस सीट से चुनाव लड़ने का सहस नहीं जुटा सकीं और रायबरेली के साथ आन्ध्रप्रदेश के मेडक से चुनाव लड़ीं। 1984 में मेडक में कांग्रेस, तेलगु देशम पार्टी से चुनाव हार गई थी। सोनिया गांधी ने 1999 में अमेठी में अपनी स्थिति को कमजोर आंकते हुए कर्नाटक के बेल्लारी से चुनाव लड़ा। 1999 में भाजपा के मजबूत होते कदमों से सोनिया गांधी इतनी विचलित थीं कि वह सिर्फ अमेठी से चुनाव लड़ने का सहस नहीं जुटा सकी थीं। 1999 में सोनिया के बेल्लारी से चुनाव लड़ने के बाद 2004, 2009, 2014 और 2019 में कांग्रेस बेल्लारी से चुनाव हार गई थी।
राहुल को अमेठी से हार का डर था तो पहुंचे वायनाड
2019 में राहुल गांधी को अमेठी में हार का संशय हुआ तो वह केरल में वायनाड से चुनाव लड़े। अमेठी से चुनाव हार गए और वायनाड ने उनके राजनीतिक जीवन को समाप्त होने से बचाया। 2021 तक केरल में कांग्रेस पार्टी नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट और माकपा नीत लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट में सत्ता के अदल-बदल का इतिहास था। यह 1982 से शुरू हुआ और 2021 तक जारी रहा मगर 2021 में जब यूडीएफ की वापसी की बारी थी तो 1982 के बाद पहली बार माकपा नीत एलडीएफ ने सत्ता में वापसी की और यूडीएफ की सीट पहले से घट गई। यह दक्षिण की राजनीति के लिए बड़ा परिवर्तन था क्योंकि केरल में भी एलडीएफ और यूडीएफ के बीच उसी तरह सत्ता की अदल-बदल होती थी जैसा की राजस्थान और हिमाचल प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के बीच 1993 से हो रहा है।
केरल में यूडीएफ की हार, गांधी परिवार की हार
2021 में केरल में यूडीएफ की हार तब हुई जब पहली बार गांधी परिवार के सदस्य राहुल गांधी वायनाड से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। यूडीएफ की हार गांधी परिवार की निजी हार के तौर पर देखा गया था। अब इस बार लगातार दो बार विपक्ष में रहने के बाद यूडीएफ फिर से चुनावी संघर्ष में जा रही है । केरल से मिल रहे राजनीतिक रुझानों के अनुसार इस बार भी यूडीएफ काफी पीछे चल रही है। अगर वह इस बार केरल में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाती है तो यह पार्टी से अधिक गांधी परिवार की हार मानी जाएगी।

















