PM नरेंद्र मोदी बोले- राजनीति में ‘फुल स्टॉप’ नहीं होता, जनसेवा सदन के बाहर भी जारी रहती है
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PM नरेंद्र मोदी बोले- राजनीति में ‘फुल स्टॉप’ नहीं होता, जनसेवा सदन के बाहर भी जारी रहती है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को अप्रैल से जुलाई के बीच सेवानिवृत्त हो रहे राज्यसभा के 59 सदस्यों को विदाई देते हुए कहा कि राजनीति में कभी 'पूर्ण विराम' नहीं होता।

Written byएजेंसीएजेंसी — edited by Lalit Fulara
Mar 18, 2026, 01:57 pm IST
inभारत

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को अप्रैल से जुलाई के बीच सेवानिवृत्त हो रहे राज्यसभा के 59 सदस्यों को विदाई देते हुए कहा कि राजनीति में कभी ‘पूर्ण विराम’ नहीं होता और जनसेवा का कार्य सदन के बाहर भी निरंतर जारी रहता है। उन्होंने कहा कि संसद केवल कानून बनाने का मंच नहीं, बल्कि एक ‘ओपन यूनिवर्सिटी’ है, जहां हर सदस्य को सीखने, विचार साझा करने और खुद को विकसित करने का अवसर मिलता है।

राज्यसभा में आयोजित विदाई समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सदन में विभिन्न विषयों पर होने वाली चर्चाओं में हर सदस्य का महत्वपूर्ण योगदान होता है। उन्होंने स्वीकार किया कि कार्यकाल के दौरान खट्टे-मीठे अनुभव भी सामने आते हैं, लेकिन विदाई के समय सभी दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर एक समान भावना व्यक्त करते हैं।

राजनीति में कोई फुल स्टॉप नहीं होता…
प्रधानमंत्री ने कहा कि विदाई ले रहे कुछ सदस्य भविष्य में फिर से सदन में लौट सकते हैं, जबकि कुछ अपने अनुभवों के आधार पर सामाजिक जीवन में नए योगदान की दिशा में आगे बढ़ेंगे। उन्होंने कहा, “जो सदस्य जा रहे हैं, उन्हें मैं कहना चाहता हूं कि राजनीति में कोई फुल स्टॉप नहीं होता है। भविष्य आपका इंतजार कर रहा है और आपका अनुभव राष्ट्र जीवन में हमेशा उपयोगी रहेगा।”

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने एचडी देवगौड़ा, मल्लिकार्जुन खरगे और शरद पवार आदि वरिष्ठ नेताओं के योगदान का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि लंबे संसदीय अनुभव वाले नेताओं से नई पीढ़ी को बहुत कुछ सीखने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इन नेताओं ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा संसदीय कार्यप्रणाली को समर्पित किया है और उनका अनुभव लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

संसदीय प्रणाली में “सेकंड ओपिनियन” की अवधारणा लोकतंत्र की बड़ी ताकत
प्रधानमंत्री ने राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश की सराहना करते हुए उन्हें मृदुभाषी और कुशल संचालक बताया। उन्होंने कहा कि सदन को सुचारु रूप से चलाने में उनकी भूमिका सराहनीय रही है। साथ ही उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि हरिवंश सदन के बाहर भी युवाओं के बीच सक्रिय रहते हैं और उन्हें देश की परिस्थितियों से अवगत कराने का कार्य करते हैं।

इस दौरान प्रधानमंत्री ने रामदास अठावले के हास्यपूर्ण और व्यंग्यात्मक अंदाज का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में 24×7 मीडिया के कारण सदन में हास्य-विनोद के अवसर कम हो गए हैं, लेकिन अठावले अपने अंदाज से वातावरण को सहज बनाए रखते हैं और लोगों को जोड़ने का कार्य करते हैं। प्रधानमंत्री ने संसदीय प्रणाली में “सेकंड ओपिनियन” की अवधारणा को लोकतंत्र की बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि एक सदन में लिए गए निर्णय दूसरे सदन में विचार के लिए जाते हैं, जिससे निर्णय प्रक्रिया और अधिक समृद्ध और व्यापक बनती है। यह व्यवस्था लोकतांत्रिक संतुलन बनाए रखने में सहायक होती है।

संसद में बिताए गए 6 वर्ष सदस्य के जीवन को गढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं
उन्होंने कहा कि हर दो वर्ष में राज्यसभा के एक बड़े समूह का कार्यकाल समाप्त होता है, लेकिन यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है। नए सदस्यों को पुराने सदस्यों के अनुभव का लाभ मिलता है, जिससे सदन की कार्यप्रणाली में निरंतरता बनी रहती है। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि जो सदस्य अभी सदन में बने रहेंगे, वे नए सांसदों का मार्गदर्शन करेंगे और संस्था को और मजबूत बनाएंगे। प्रधानमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि विदाई ले रहे कई सांसदों को पुराने और नए दोनों संसद भवनों में कार्य करने का अवसर मिला, जो उनके सार्वजनिक जीवन की एक विशेष उपलब्धि और यादगार अनुभव रहेगा। उन्होंने कहा कि नए संसद भवन के निर्माण और उसकी कार्यप्रणाली में भागीदारी इन सदस्यों के लिए एक महत्वपूर्ण स्मृति के रूप में हमेशा बनी रहेगी।

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि संसद में बिताए गए छह वर्ष किसी भी सदस्य के जीवन को गढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह केवल निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बनने का अवसर नहीं होता, बल्कि व्यक्तिगत विकास और राष्ट्रीय दृष्टिकोण को व्यापक बनाने का भी माध्यम होता है। उन्होंने विदाई ले रहे सभी सांसदों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनका अनुभव राष्ट्र निर्माण में आगे भी उपयोगी रहेगा, चाहे वे किसी भी भूमिका में क्यों न हों। प्रधानमंत्री ने सभी सदस्यों के योगदान की सराहना करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

Topics: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीPrime Minister Narendra ModiRajya Sabhaराज्यसभा विदाई समारोहBJP
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