गुजरात के मेहसाणा जिले के बहुचराजी तालुका का चांदणकी गांव अब दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 130वें संस्करण में इस गांव की खास पहल का उल्लेख करते हुए यहां की साझी रसोई की प्रशंसा की थी। चांदणकी गांव की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पिछले लगभग 15 वर्ष से यहां किसी भी घर में अलग से चूल्हा नहीं जलता।
चांदणकी में लगभग 260 घर हैं और यहां के अधिकतर युवाओं ने रोजगार के लिए विदेश में बसना चुन लिया है। इस कारण गांव में ज्यादातर बुजुर्ग ही रहते हैं। बुजुर्गों के लिए रोजाना खाना बनाना कठिन होने लगा था। लगभग 15 वर्ष पहले गांव के बुजुर्ग रतिलाल पटेल के मन में एक साझी रसोई का विचार आया। इसके बाद गांव वालों ने मिलकर इसके लिए स्थान तलाशने का निर्णय लिया। उन्होंने बताया कि सबसे पहले गांव के पुराने और बंद पड़े स्कूल भवन को साझी रसोई में बदलने का फैसला किया गया।
सभी ग्रामीणों ने मिलकर आर्थिक सहयोग दिया और स्कूल भवन की मरम्मत कराई। इस भवन में अब रसोईघर, भोजन कक्ष और भंडार कक्ष की व्यवस्था है। भोजन बनाने के लिए एक दंपती को रखा गया है, जो गांव के बुजुर्गों के लिए प्रतिदिन भोजन तैयार करता है। हर व्यक्ति से प्रतिमाह लगभग 1500 रुपये लिए जाते हैं, जिसके बदले बुजुर्गों को दिन में दो बार भोजन मिलता है।
यह साझी रसोई केवल भोजन की व्यवस्था ही नहीं करती, बल्कि गांव के बुजुर्गों के सामाजिक मेल-जोल का भी केंद्र बन गई है। यहां झूले लगाए गए हैं, जहां बुजुर्ग बैठकर लंबे समय तक बातचीत करते हैं। आने वाले समय में यहां 80 इंच का एलईडी टीवी लगाने की भी योजना है। इस रसोई की एक और विशेषता यह है कि यह सौर ऊर्जा से संचालित सोलर रूफटॉप व्यवस्था पर चलती है। साथ ही 24 घंटे ठंडा पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए विशेष वाटर कूलर भी लगाया गया है।
चांदणकी गांव की एक और खासियत इसके सख्त सामाजिक नियम हैं। गांव ने अपने कुछ नियम बनाए हैं, जिनका पालन करना सभी के लिए अनिवार्य है। यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर थूकता हुआ पाया जाता है तो उस पर 1000 रुपये का जुर्माना लगाया जाता है, जबकि पानी बर्बाद करने पर 5000 रुपये का जुर्माना देना पड़ता है। ऐसे कई नियम पिछले चार वर्ष में बनाए गए हैं। शुरुआत में इन नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना वसूला जाता था, लेकिन अब गांव के लोग स्वयं ही इनका पालन करने लगे हैं।
गांव की एक और उल्लेखनीय बात यह है कि यहां आज तक कोई पुलिस मामला दर्ज नहीं हुआ है। इसके बावजूद पूरे गांव में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इन सीसीटीवी कैमरों को विदेश में रहने वाले गांव के युवाओं के मोबाइल फोन से जोड़ा गया है, जिससे वे दूर रहकर भी अपने माता-पिता और गांव की स्थिति पर नजर रख सकते हैं। इस तरह चांदणकी गांव की साझी रसोई और सामूहिक जीवन व्यवस्था आज सामाजिक सहयोग और सामुदायिक एकता की एक अनूठी मिसाल बन चुकी है।

















