पिथौरागढ़ जिले का कुसौली गांव स्वच्छ भारत अभियान की सफलता की इबारत लिख रहा है। जिला मुख्यालय से सटे विकास खंड विण के कुसौली ग्राम में अभियान का ऐसा असर हुआ है कि यहां कोई भी व्यक्ति रास्ते या सड़क पर कूड़ा तो दूर, कागज तक नहीं फेंकता। तमाम पुरस्कार हासिल कर चुकी ग्राम पंचायत ने पिछले चार वर्षों में विकास के लिए मिलने वाले बजट का ऐसा प्रभावी उपयोग किया है कि यह पूरे प्रदेश के लिए मिसाल बन गई है।
केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का सफल क्रियान्वयन कर इस गांव ने देशभर में एक उदाहरण प्रस्तुत किया है। यही कारण है कि यहां के पूर्व ग्राम प्रधान रघुवीर सिंह को उनके सराहनीय कार्यों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जा चुका है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत कुसौली ग्राम पंचायत ने कई उल्लेखनीय कार्य किए हैं। ग्राम पंचायत के अंतर्गत 223 परिवार निवास करते हैं और प्रत्येक परिवार को कूड़ा निस्तारण के लिए अलग-अलग डस्टबिन उपलब्ध कराए गए हैं। ग्रामीणों में स्वच्छता के प्रति इतनी जागरूकता है कि गांव की सड़कें और रास्ते हमेशा साफ-सुथरे रहते हैं और कहीं भी कूड़ा दिखाई नहीं देता।
गांव में आठ स्थानों पर सार्वजनिक कूड़ेदान लगाए गए हैं। इसके साथ ही जैविक खाद के लिए 80 गड्ढे और 25 सोकपिट बनाए गए हैं। गांव की खुली नालियों को भी पटालों से ढक दिया गया है।
गांव की सुंदरता बढ़ाने के लिए स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र और पंचायत भवन को आकर्षक पेंटिंग से सजाया गया है। इन प्रयासों के चलते कुसौली ग्राम पंचायत को कई पुरस्कार भी मिल चुके हैं। वर्ष 2012 में गांव को निर्मल ग्रामसभा पुरस्कार मिला था, जबकि 2015 में इसे खुले में शौचमुक्त (ओडीएफ) घोषित किया गया। वर्ष 2018 में कुसौली को राज्य स्वच्छता गौरव पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। इसके अलावा अक्टूबर 2018 में उत्कृष्ट पंचायत के लिए ग्राम प्रधान रघुवीर सिंह को सम्मानित किया गया। वर्ष 2018 में राष्ट्रीय स्तर पर दिए जाने वाले पंडित दीनदयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तिकरण पुरस्कार में भी उत्तराखंड के गांवों में कुसौली ने पहला स्थान हासिल किया।
दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय कैबिनेट मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने पंचायत राज मंत्रालय की ओर से पूर्व ग्राम प्रधान रघुवीर सिंह को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया।
रघुवीर सिंह बताते हैं कि गांव में सोलर लिफ्ट पेयजल योजना लागू कराई गई है, आधुनिक सुविधाओं से लैस पंचायत भवन का निर्माण कराया गया है। इसके अलावा जैविक और अजैविक कूड़ा संग्रहण के लिए अलग-अलग कूड़ेदान स्थापित कराए गए हैं। यह उपलब्धि गांव के सभी ग्रामीणों के सहयोग का परिणाम है। इसके साथ ही गांव में सार्वजनिक रसोईघर बनाया गया है, प्राथमिक विद्यालय में बच्चों के लिए झूले लगाए गए हैं और पर्यटकों के लिए अतिथि गृह का निर्माण भी कराया गया है।कुसौली के अलावा उत्तरकाशी जिले की धारी पल्ली, देहरादून के बमराड और डाकपत्थर ग्राम पंचायतों को भी राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। आज कुसौली ग्राम पंचायत स्वच्छता, जनसहभागिता और विकास के क्षेत्र में एक आदर्श मॉडल बनकर उभरी है।

















