कांग्रेस पार्टी को राज्यसभा चुनाव में गहरा झटका लगा हैं। बिहार में कांग्रेस पार्टी के आधे विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में मतदान में हिस्सा ही नहीं लिया है। साथ ही ओडिशा में भी कांग्रेस पार्टी के तीन विधायकों ने पार्टी लाइन के खिलाफ मतदान किया है। यह कांग्रेस पार्टी के घटती राजनीतिक रसूख का स्पष्ट घोतक है। यह दर्शाता है कि कांग्रेस पार्टी से अब सिर्फ जनता ही नहीं बल्कि अब उसके निर्वाचित जनप्रतिनिधि भी दूरी बनाने लगे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई अवसरों पर आगाह किया है कि कांग्रेस पार्टी में एक और भी विभाजन हो सकता है अब पार्टी उसी दिशा में आगे बढ़ती दिख रही है।
नेतृत्व की कमी से जूझती कांग्रेस
कांग्रेस पार्टी की बिहार और अन्य राज्यों में ऐसी बुरी स्थिति उसके खुद के नेतृत्व क्षमता में कमी के कारण देखने को मिल रही है। कांग्रेस के बिहार विधानसभा में वर्तमान में छह विधायक हैं, मगर पार्टी ने किसी भी विधायक को दल का नेता, उपनेता या सचेतक नियुक्त नहीं किया हैं। बिहार में कांग्रेस पार्टी की संगत का असर उसके सहयोगी राजद पर भी दिखने लगा है और उसके भी एक विधायक फैसल रहमान ने अपनी ही पार्टी के राज्यसभा उम्मीदवार अमरेन्द्रधारी सिंह के लिए मतदान करने से दूरी बना लिया है। कांग्रेस पार्टी के तीन विधायक वाल्मीकि नगर के विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा, फारबिसगंज के विधायक मनोज विश्वास और मनिहारी के विधायक मनोहर प्रसाद सिंह ने राज्यसभा चुनाव में मतदान में ही हिस्सा नहीं लिया।
ओडिशा में भी मुंह के बल गिरे
ओडिशा में कांग्रेस पार्टी की स्थिति और भी बुरी है। पार्टी के तीन विधायकों ने पार्टी व्हिप का उल्लंघन करके भाजपा समर्थित उम्मीदवार दिलीप रे के पक्ष में वोट दिया हैं। कांग्रेस पार्टी के साथ ही बीजू जनता दल के आठ विधायकों ने अपनी पार्टी के व्हिप को छोड़कर भाजपा समर्थित दिलीप रे के पक्ष में मतदान किया है। विदित हो कि राज्य सभा चुनाव में ओडिशा में कांग्रेस पार्टी और बीजद का गठबंधन था। हरियाणा में भी कई कांग्रेस विधायकों का पार्टी लाइन के खिलाफ मतदान करने की खबरे सामने आ रही हैं। आखिर कांग्रेस पार्टी को यह सोचने की जरूरत है कि केवल इसी पार्टी के विधायक क्यों पार्टी छोड़ रहे हैं, जबकि अन्य पार्टियों के विधायक ऐसा नहीं कर रहे हैं?
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दिन ब दिन पतन की ओर अग्रसर कांग्रेस
कांग्रेस पार्टी का दिनों दिन राजनीतिक ह्रास तेजी से होता जा रहा है। कांग्रेस पार्टी ने 2023 में मेघालय विधानसभा चुनाव में पांच सीटों पर चुनाव जीतने में सफल हुई थी। मगर पार्टी के चार विधायक जिसमें तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष भी शामिल हैं, कांग्रेस पार्टी को छोड़कर सत्तारूढ़ नेशनल पीपल्स पार्टी में शामिल हो गए। वहीं एक विधायक सालेंग संगमा के सांसद बनने के बाद हुए उपचुनाव में उनकी सीट भी नेशनल पुपिल्स पार्टी जीत गई और कांग्रेस पार्टी मेघालय विधानसभा में शून्य सीट पर पहुंच गई। एक समय मेघालय कांग्रेस पार्टी का गढ़ हुआ करता था। गोवा में 2022 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के 11 विधायक निर्वाचित हुए थे मगर 8 विधायकों ने पार्टी छोड़ दिया हैं। कई अन्य राज्यों में भी कांग्रेस पार्टी के विधायकों का पार्टी से मोहभंग होने और पार्टी के टूट की खबरे समय समय पर मिलती रहती हैं।
हालत ये है कि कांग्रेस के वर्तमान में कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश में एक भी विधायक नहीं हैं। पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, केंद्रशासित प्रदेश दिल्ली, नागालैंड, मेघालय और सिक्किम में कांग्रेस पार्टी का कोई भी सदस्य नहीं हैं। साथ ही कांग्रेस पार्टी का उत्तर प्रदेश विधान परिषद में भी कोई सदस्य नहीं है।

















