पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी 2025 में केंद्रशासित प्रदेश दिल्ली की तर्ज़ पर ही ममता बनर्जी पार्टी नीत तृणमूल कांग्रेस पार्टी के खिलाफ चुनाव लड़कर जीतने की जुगत में हैं। विदित हो कि 2025 में आम आदमी पार्टी 2013, 2015 और 2020 में लगातार तीन विधानसभा चुनाव जीतने के बाद 2025 में चौथी बार सत्ता वापसी के लिए चुनाव लड़ रही थी।
पश्चिम बंगाल में भी ममता बनर्जी 2011, 2016 और 2021 के लगातार तीन विधानसभा चुनाव जीतने के बाद 2026 में चौथी बार सत्ता में वापसी के लिए प्रयासरत हैं। इतना ही नहीं, बल्कि दिल्ली में जिस प्रकार भाजपा और आप की लड़ाई में कांग्रेस पार्टी विधानसभा में शून्य सीट पर पहुंच गई थी, ठीक उसी तरह पश्चिम बंगाल में भी तृणमूल कांग्रेस और भाजपा की लड़ाई में कांग्रेस पार्टी शून्य सीट पर पहुंच गई है।
पश्चिम बंगाल में भाजपा की सबसे बड़ी ऊर्जा
मगर पश्चिम बंगाल में भाजपा को 2026 के विधानसभा चुनाव के लिए सबसे बड़ी ऊर्जा 2021 के नंदीग्राम विधानसभा सीट के चुनाव परिणाम से मिल रहा है। विगत 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम विधानसभा सीट पर भाजपा के सुवेंदु अधिकारी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को करारी शिकस्त मात दी थी। ममता बनर्जी ने चुनाव बाद मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अपने पुराने विधानसभा सीट भाबनीपुर से चुनाव लड़कर विधानसभा की सदस्य्ता प्राप्त की थी। 2021 में नंदीग्राम में चुनावी हार ममता बनर्जी के राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी हार थी।
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ममता बनर्जी इस हार से इतना विचलित थी कि वो अपने परम्परागत और आजमाए भाबनीपुर सीट से ही उपचुनाव लड़ी। ममता बनर्जी किसी अन्य सीट से उपचुनाव लड़ने का साहस नहीं जुटा सकी। नंदीग्राम में ममता बनर्जी की 2021 की हार में भाजपा के 2026 के जीत का फार्मूला छुपा हुआ है। 2021 में नंदीग्राम में सुवेंदु अधिकारी की जीत 2013 में अरविंद केजरीवाल के नई दिल्ली विधानसभा सीट पर जीत के ही सामान था क्योंकि दोनों स्थितियों में इन दोनों नेताओं ने तत्कालीन मुख्यमंत्री को चुनावी शिकस्त दी थी।
2013 में केजरीवाल के नई दिल्ली विधानसभा सीट पर जीत का असर 2015 के विधानसभा चुनाव में देखने को मिला जब आम आदमी पार्टी ने कुल 70 सीटों के विधानसभा में 62 सीट जीतकर सरकार बनाने में कामयाब हुई थी। ठीक उसी तरह 2021 में नंदीग्राम विधानसभा सीट पर भाजपा के जीत का असर 2026 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में देखने को मिल रहा है और भाजपा जीत की ओर अग्रसर हो रही है।
ममता की दरक रही जमीन
ममता बनर्जी 2021 में नंदीग्राम सीट पर हार और 2024 के लोकसभा चुनाव में अपनी वर्तमान विधानसभा सीट भबानीपुर में तृणमूल कांग्रेस पार्टी के भाजपा से महज़ 8297 मतों से आगे रहने के कारण काफी परेशान हैं। इतना ही नहीं बल्कि हाल के दिनों में पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता विपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने भाबनीपुर विधानसभा सीट पर अपनी चहलकदमी बढ़ा दिया है, जिससे ममता बनर्जी इस बार विधानसभा चुनाव सिर्फ एक सीट से नहीं बल्कि दो सीटों से लड़ेंगी इसकी पूरी समभावना है।
क्यों मुश्किल में है टीएमसी
दरअसल, जब भी कोई मुख्यमंत्री दो सीटों से चुनाव लड़ता हैं तो उसके चुनाव खुद के और उसके पार्टी के चुनाव जीतने की संभावना काफी कम हो जाती है और अधिकतर बार मुख्यमंत्री अपना चुनाव हार जाते हैं और उनकी पार्टी भी चुनाव हार जाती है। 2024 में पश्चिम बंगाल का पडोशी राज्य ओडिशा में मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने दो सीटों से चुनाव लड़ा और एक सीट पर खुद चुनाव हार गए और उनकी पार्टी भी लगातार पांच बार सत्ता में रहने के बाद चुनाव बुरी तरह से हार गई। इसी तरह 2005 में हरियाणा में मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने दो सीटों से चुनाव लड़ा और एक सीट पर चुनाव हारने के साथ ही उनकी पार्टी इंडियन नेशनल लोकदल भी बुरी तरह चुनाव हार गई थी। 2022 में पंजाब में मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी दो सीट से विधानसभा का चुनाव लड़ा और दोनों सीट से खुद के चुनाव हारने के साथ ही उनकी पार्टी भी बुरी तरह चुनाव हार गई।
2017 में उत्तराखंड में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत दो सीटों से चुनाव लड़े और दोनों सीटों से चुनाव हारने के साथ ही उनकी सत्तारूढ़ पार्टी भी बुरी तरह चुनाव हार गई। 2017 के बाद अब तक उत्तराखंड में भाजपा की सरकार है। अतएव ममता बनर्जी के आगामी विधानसभा चुनाव कई चुनौतियों के लेकर आनेवाला हैं।

















