क्रेडिट रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने भारत की आर्थिक वृद्धि (GDP) को लेकर अपने नए अनुमान जारी किए हैं। फिच के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की GDP वृद्धि दर 7.5% हो सकती है। अगले वित्त वर्ष 2026-27 में यह वृद्धि दर 6.7% रहने का अनुमान है। यह पिछली बार दिसंबर में जारी अनुमान से थोड़ा अधिक है, जब फिच ने चालू वित्त वर्ष के लिए 7.4% और अगले वर्ष के लिए 6.4% वृद्धि का अनुमान लगाया था।
घरेलू मांग और निवेश बनाएंगे वृद्धि की नींव- रिपोर्ट में कहा गया है कि 2026-27 के पहले छह महीनों में भारत की वृद्धि थोड़ी धीमी रह सकती है। इसकी मुख्य वजह महंगाई है, जो लोगों की खर्च करने की क्षमता और घरेलू मांग पर असर डाल सकती है। दिसंबर तिमाही में GDP वृद्धि दर 7.8% रही, जबकि सितंबर तिमाही में यह 8.4% थी। फिच के अनुसार, 2025-26 में भारत की आर्थिक वृद्धि का मुख्य आधार घरेलू मांग होगी। उपभोक्ता खर्च में 8.6% की वृद्धि और निवेश में 6.9% की बढ़ोतरी की उम्मीद है। इससे रोजगार बढ़ेगा और अर्थव्यवस्था स्थिर बनी रहेगी। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि घरेलू खपत और निवेश में लगातार वृद्धि से भारत को वैश्विक आर्थिक अस्थिरताओं का भी लाभ मिलेगा। इसके अलावा, सरकार के अवसंरचना और सामाजिक कार्यक्रम भी अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहे हैं।
तेल की कीमतें और आर्थिक मजबूती- तेल की कीमतों पर भी फिच ने ध्यान दिया है। उन्होंने अनुमान लगाया है कि 2026 में कच्चे तेल की औसत कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल रहेगी, जो दिसंबर में 63 डॉलर थी। पश्चिम एशिया में हालिया घटनाओं की वजह से ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 90 डॉलर तक पहुंच गई है। अगर तेल की कीमत 100 डॉलर तक जाती है, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन सकती है। फिच का कहना है कि भारत की अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत है। बैंकिंग प्रणाली में विश्वास बना हुआ है और निवेश तथा व्यावसायिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। घरेलू मांग, निर्यात और निवेश की मदद से भारत की वृद्धि भविष्य में स्थिर और सतत रहने की संभावना है, बशर्ते तेल की कीमतों में अचानक वृद्धि न हो और मौद्रिक नीतियां संतुलित रहें।











