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आखिर कितने तरुण मारे जाएंगे !

दिल्ली के हस्तसाल जेजे कॉलोनी में होली के दिन जिहादी भीड़ द्वारा पीट-पीटकर की गई तरुण की हत्या उस घृणित मानसिकता को उजागर करती है, जो हमेशा कट्टरपंथी करते आए हैं।

Written byआदित्य भारद्वाजआदित्य भारद्वाज
Mar 14, 2026, 02:20 pm IST
in दिल्ली
मृतक तरुण

मृतक तरुण

जरा सोचिए, पानी की कुछ बूंदें क्या किसी का ईमान खराब कर सकती हैं? ईमान खराब होने की बात कहकर इतनी मामूली सी बात पर क्या किसी की बर्बरता से हत्या की जा सकती है? इसका जवाब है नहीं। हत्या तो किसी भी सूरत में, किसी भी परिस्थिति में जायज नहीं ठहराई जा सकती। लेकिन दिल्ली के हस्तसाल इलाके में होली पर ऐसा ही हुआ। जहां एक छोटी सी बच्ची द्वारा फेंके गए गुब्बारे के पानी के कुछ छींटे एक मुस्लिम महिला पर जा गिरे।

वह बच्ची उस महिला पर गुब्बारा फेंक भी नहीं रही थी। वह दुकान से अपने ताऊ के लौटने का इंतजार कर रही थी कि ताऊ आएंगे तो वह उसी गुब्बारे से पानी डालेगी। यह बात उस मुस्लिम महिला सायरा काले (50) को इतनी नागवार गुज़री कि उसने शोर मचा दिया।

उसके परिवार के लोग और रिश्तेदार इकट्ठे हो गए। हाथों में रॉड, डंडे और सरिए लेकर उस बच्ची के घर पर धावा बोल दिया। जमकर गाली-गलौज की। दरवाजा तक तोड़ डाला। कई लोगों को चोटें आईं। खैर, आस-पड़ोस के लोगों के बीच में आने के बाद मामला शांत हो गया, लेकिन मुस्लिम परिवार कुछ और ही सोचकर बैठा था। देर रात करीब 11 बजे, जब उस बच्ची का चचेरा भाई तरुण (26) घर लौट रहा था, तो पहले से घात लगाकर बैठे मुस्लिम परिवार के लोगों ने उसे घेर लिया और बर्बरता से पीट-पीटकर उसकी हत्या कर दी।

योजनाबद्ध तरीके से किया हमला

तरुण के चाचा टेकचंद ने बताया कि तरुण के लौटने से पहले वे लोग परिवार के साथ मारपीट कर चुके थे। हमें लग रहा था कि मामला शांत हो गया है, अब कुछ नहीं होगा। हम सब अपने घरों पर थे। सायरा के परिवार वालों और रिश्तेदारों ने मिलकर गली के कोने पर तरुण को घेर लिया। कोई उसकी मदद न कर सके, इसलिए आस-पड़ोस के लोगों के दरवाजे बाहर से बंद करके कुंडी लगा दी। लाठी-डंडों से उस पर हमला किया। उसके सिर पर अनगिनत सरिए मारे गए।

यही नहीं, जब वह मरणासन्न हो गया तो गली में पड़ी सिल्ली उठाकर उसकी छाती और सिर पर मारी गई। पड़ोस के एक व्यक्ति ने आकर हमें इस बारे में बताया। जब हम वहां पहुंचे तो सब भाग चुके थे। तरुण को लेकर हम अस्पताल पहुंचे। डॉक्टरों ने कहा कि बचने की उम्मीद बेहद कम है। अगले दिन 5 फरवरी को उसने दम तोड़ दिया।

हत्या के बाद भड़का आक्रोश

तरुण की मौत की खबर जैसे ही इलाके में फैली, हस्तसाल जेजे कॉलोनी ही नहीं बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी आक्रोश फैल गया। स्थानीय लोग बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए। कई हिंदू संगठनों ने भी विरोध प्रदर्शन किए। पुलिस ने हत्या समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस ने इस मामले में हत्या की धाराओं के साथ-साथ अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएं भी जोड़ीं। इस मामले में अब तक 14 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें एक नाबालिग भी शामिल है। जिस महिला सायरा के चलते यह विवाद हुआ, उसे भी हिरासत में लिया गया है।

आरोपियों की संपत्ति पर चला बुलडोजर

तरुण की हत्या के बाद बढ़ते जनाक्रोश और इलाके में बने तनाव के बीच प्रशासन ने भी सख्त रुख अपनाया है। दिल्ली नगर निगम ने आरोपियों से जुड़ी एक संपत्ति पर बुलडोजर चलाकर अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया है। निगम अधिकारियों का कहना था कि यह कार्रवाई अवैध निर्माण के खिलाफ की गई है। आज सवाल केवल यह नहीं है कि तरुण के साथ क्या हुआ। सवाल यह भी है कि क्या हम ऐसी घटनाओं से कोई सबक लेंगे? क्योंकि यदि समाज समय रहते नहीं चेता, तो किसी न किसी त्योहार पर कोई और तरुण मारा जाएगा। ‘हिंदुओं को जिहादियों की भाषा में उत्तर देने को विवश न किया जाए’

होली के दिन तरुण खटीक की जिहादियों की भीड़ द्वारा की गई मॉब लिंचिंग की विश्व हिंदू परिषद ने कठोर शब्दों में निंदा की है। विहिप के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ. सुरेंद्र जैन ने कहा है कि दिल्ली के उत्तम नगर में सात साल की मासूम बच्ची ने अपने ताऊ पर पानी का गुब्बारा फेंका था, जिसके चंद छींटे वहां से गुजर रही एक मुस्लिम महिला के कपड़ों पर गिर गए। पहले तरुण के माता-पिता और ताऊ जी को निर्ममता से पीटा गया। फिर तरुण की तलवारों, पत्थरों व लाठियों से सरेआम नृशंस हत्या कर दी गई। क्या उस महिला को नहीं पता था कि होली रंगों का त्योहार है और उसके छींटे किसी पर भी गिर सकते हैं?

तरुण के हत्यारोपियों के घर पर हुए अवैध निर्माण पर चला बुलडोजर

उस महिला का होली पर बाहर निकलना और पानी के छींटे गिरते ही 25-30 जिहादियों की भीड़ का हथियारों के साथ तुरंत बाहर आकर हिंसा का नंगा नाच करना महज संयोग नहीं हो सकता। देश भर में यह देखा गया है कि जिहादी अक्सर दंगाई महिलाओं और अवयस्कों को ही आगे करते हैं, जिससे वे कानूनी कार्रवाई से बच सकें। अब उनकी इस रणनीति पर भी रोक लगाने का समय आ गया है।

हिंदू त्योहारों व शोभा यात्राओं पर हमले तथा मॉब लिंचिंग कर हिंदुओं की हत्या करने का यह एकमात्र उदाहरण नहीं है। इसी वर्ष पावन होली पर हिंदुओं के खून से होली खेलने के लिए 11 से अधिक हमले किए गए। पिछले 10 वर्षों में केवल होली पर हमलों की 42 से अधिक शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं।

होली ही नहीं, हिंदुओं का कोई भी पर्व ऐसा नहीं है, जिस पर जिहादी हिंदुओं पर हमले न करते हों। पिछले 10 वर्षों में हिंदुओं के त्योहारों पर 240 से अधिक बार प्राणघातक हमले किए गए, जिनमें कई हिंदुओं को घेरकर मारा गया। हिंदुओं के प्रति क्रूरता और घृणा बढ़ती जा रही है।

उधर हिंदू समाज का आक्रोश भी बढ़ रहा है। वह सिर्फ कानूनी कार्रवाई की प्रतीक्षा में हाथ पर हाथ रखकर बैठने वाला नहीं है। रामास्वामी उदयार मामले में माननीय उच्च न्यायालय की यह टिप्पणी सबको स्मरण रखनी चाहिए कि अगर एक वर्ग हिंदुओं को अपने उत्सव व शोभा यात्राओं के आयोजन में बाधा डालता है, तो उस वर्ग को भी सोचना पड़ेगा कि वह वहां अपने मजहबी आयोजन कैसे कर सकेगा, जहां वह अल्पसंख्यक है। विश्व हिंदू परिषद कट्टरपंथियों और उनके साथ गठजोड़ करने वाले कथित सेक्युलर नेताओं को चेतावनी देती है कि वे हिंदू समाज को उस तरीके से जवाब देने के लिए मजबूर न करें, जिन तरीकों का उपयोग हिंदुओं के विरुद्ध हो रहा है।

‘दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा’

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली सचिवालय में उत्तम नगर की दुखद घटना में मारे गए युवक तरुण के परिवार से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और भरोसा दिलाया कि इस कठिन समय में दिल्ली सरकार पूरी मजबूती के साथ उनके साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि परिवार का दुख बहुत बड़ा है और सरकार उनकी पीड़ा को समझती है। दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। सरकार पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता देगी. परिवार की सुरक्षा और संरक्षण के लिए भी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

Topics: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ताकट्टरपंथी मानसिकताविश्व हिंदू परिषद (VHP)हस्तसाल जेजे कॉलोनीउत्तम नगर कांडतरुण खटीक हत्या मामलादिल्ली मॉब लिंचिंगहोली पर हमलाकानून व्यवस्थाहिंदू त्योहारों पर हमलेजिहादी हिंसाFEATUEDपाञ्चजन्य विशेष
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