बिहार : बदलते आंकड़े, बढ़ती चुनौती
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 बिहार : बदलते आंकड़े, बढ़ती चुनौती

बांग्लादेश से हो रही घुसपैठ ने सीमांचल क्षेत्र में लगातार मुसलमानों की जनसंख्या बढ़ रही है। बात यहां सिर्फ आबादी की नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, संसाधनों और सामाजिक संरचना के भविष्य की भी है

Written byअभय कुमारअभय कुमार
Mar 9, 2026, 10:50 pm IST
inविश्लेषण, बिहार
इस साल 1 जनवरी को एसएसबी ने तीन बांग्लादेशी घुसपैठियों और उनका साथ देने वाले एक स्थानीय व्यक्ति को गिरफ्तार किया था।

इस साल 1 जनवरी को एसएसबी ने तीन बांग्लादेशी घुसपैठियों और उनका साथ देने वाले एक स्थानीय व्यक्ति को गिरफ्तार किया था।

हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तीन दिन तक बिहार में सीमाचंल के इलाके का दौरा किया। सीमाचंल के चार जिले किशनगंज, कटिहार, अररिया और पूर्णिया हैं। यह क्षेत्र पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश से सटा हुआ है। इस इलाके में बहुत तेजी से मुस्लिम आबादी बढ़ रही है। यह माना जाता है कि इसके पीछे घुसपैठ एक बहुत बड़ा कारण है। अररिया, कटिहार, पूर्णिया और किशनगंज जिले में मुस्लिम आबादी सामान्य औसत से ज्यादा बढ़ रही है।

1991 की जनगणना के बाद 2011 में हुई जनगणना में बिहार के सीमांचल में मुसलमानों की जनसंख्या 38.2% से बढ़कर 42.7% हो गई है। उनकी आबादी में लगभग 4.5% की वृद्धि हुई। वहीं 1991 में पूरे भारत में मुस्लिम आबादी 12.6% थी, जो 2011 की जनगणना में बढ़कर 14.2% हो गई। यानी 20 साल में भारत में 1.6% मुस्लिम आबादी बढ़ी। यानी सीमांचल में तेजी से आबादी में वृद्धि हुई। वहीं पूरे बिहार में 1991 में 14.8% मुस्लिम आबादी थी, जो 2023 में बिहार सरकार द्वारा कराई गई जातिगत जनगणना में बढ़कर 17.7% हो गई।

ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि अगली जनगणना में पूरे भारत की तुलना में सीमांचल में मुसलमानों की जनसंख्या में बढ़ोतरी का आंकड़ा इससे भी ज्यादा चौंकाने वाला होगा। सीमांचल इलाके की मुस्लिम जनसंख्या की वृद्धि दर को भारत या बिहार राज्य की मुस्लिम जनसंख्या से तुलना करते हैं तो पाते हैं कि यह वृद्धि दर अप्रत्याशित है। सवाल यह है कि सीमांचल में आखिर जनसंख्या इतनी तेजी से क्यों बढ़ रही है? औद्योगिक महानगरों में आबादी बढ़ना एक सामान्य प्रक्रिया है क्योंकि देश के अन्य हिस्सों से आमजन रोजगार की तलाश में वहां पहुंचते हैं। मगर सीमांचल एक पिछड़ा इलाका है।

यहां बाढ़ के कारण किसानों को कृषि कार्यों में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। सीमांचल इलाके में ऐसी कौन सी फैक्ट्रियां या कंपनियां हैं जो रोजगार के अवसर प्रदान कर रही हैं, जिस कारण यहां इतनी तेजी से मुस्लिम आबादी बढ़ रही है? इसका एकमात्र कारण बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठ है। बिहार या भारत के किसी भी इलाके के संसाधनों पर सिर्फ भारत के निवासियों का अधिकार है, भले ही किसी भी मजहब, मत और पंथ के क्यों न हों, लेकिन बिहार के सीमांचल में बांग्लादेश से आए घुसपैठिए लगातार भारत के लोगों के संसाधनों का दोहन कर रहे हैं।

सुरक्षा के लिए खतरा

सीमांचल में विदेशी घुसपैठ सिर्फ चुनाव को ही प्रभावित नहीं करती बल्कि वह देश की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा है। सीमांचल का इलाका देश की सुरक्षा के लिए बहुत संवेदनशील माना जाता है क्योंकि यह सिलीगुड़ी गलियारा, जिसे चिकन नेक भी कहा जाता है, से सटा हुआ है। सिलीगुड़ी गलियारा काफी संवेदनशील इलाका है, अतः यह क्षेत्र सामरिक रूप से बेहद अहम है। सिलीगुड़ी गलियारा बहुत संकरा रास्ता है, जिसके माध्यम से पूरा पूर्वोत्तर इलाका देश के बाकी हिस्से से जुड़ा हुआ है। सिलीगुड़ी गलियारा कुछ जगहों पर महज 22 कि.मी. चौड़ा है। अगर यह हिस्सा किसी गलत हाथ में चला गया तो पूर्वोत्तर से भारत का संपर्क टूट सकता है। जाहिर है कि यह देश की सुरक्षा से जुड़ा हुआ एक अहम मुद्दा है।

कांग्रेस पार्टी या इसके सहयोगी दल कभी भी घुसपैठ के खिलाफ कोई वक्तव्य देने से बचते रहते हैं। बल्कि ये दल और इनके समर्थक गाहे-बगाहे घुसपैठ का समर्थन करते दिखते हैं। इन दलों को घुसपैठियों में अपना वोटबैंक नजर आता है। कांग्रेस पार्टी और राजद सीमांचल को अपना गढ़ बनाए रखने के लिए घुसपैठ के मुद्दे पर मौन रहते हैं। वर्तमान में बिहार में कांग्रेस पार्टी के तीन सांसद हैं, जिनमें दो इसी इलाके से हैं। वर्तमान में कटिहार और किशनगंज लोकसभा सीट के सांसद कांग्रेस पार्टी से हैं। कांग्रेस पार्टी अब तक किशनगंज लोकसभा सीट 10 बार जीत चुकी है।

2009 से लगातार कांग्रेस पार्टी इस सीट पर जीत दर्ज कर रही थी। 2019 में राहुल गांधी जब अमेठी के अलावा एक अन्य सीट की तलाश कर रहे थे, जिसमें वायनाड के साथ ही किशनगंज सीट भी उनकी प्राथमिकता में थी। पिछली विधानसभा में कांग्रेस पार्टी के भागलपुर के तीसरी बार के विधायक अजीत शर्मा विधायक दल के नेता थे, मगर उन्हें बिना किसी कारण के पार्टी ने हटाकर सीमांचल इलाके के कदवा के दूसरी बार के विधायक शकील अहमद खान को विधायक दल का नेता नियुक्त कर दिया। क्या कांग्रेस पार्टी ने यह बदलाव घुसपैठियों को कोई बड़ा संदेश देने के मकसद से किया था?

सीमांचल का प्रश्न केवल जनसंख्या का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संसाधनों, सीमाई संतुलन और सामरिक सुरक्षा का विषय बन चुका है। अब यह तय करना नीति-निर्माताओं और जनता दोनों के हाथ में है कि सीमांचल का भविष्य किस दिशा में जाएगा।

घुसपैठ पर गृहमंत्री सख्त

बिहार के सीमांचल क्षेत्र के तीन दिवसीय दौरे पर पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 25 से 27 फरवरी तक किशनगंज, कटिहार, अररिया और पूर्णिया जिलों में विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लिया। दौरे के अंतिम दिन शुक्रवार (27 फरवरी, 2026) को पूर्णिया जिले में भारत-नेपाल सीमा से जुड़े सुरक्षा मुद्दों की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि घुसपैठ किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बैठक में सीमावर्ती जिलों में सीमा प्रबंधन को और अधिक मजबूत करने, घुसपैठ पर कड़ी निगरानी रखने तथा अंतर-एजेंसी समन्वय बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। गृह मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध निर्माण, अतिक्रमण, अवैध प्रवासन, नकली भारतीय मुद्रा (एफआईसीएन) के प्रसार और अनधिकृत वित्तीय लेन-देन जैसी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए संयुक्त अभियान चलाए जाएं।

दौरे के दौरान उन्होंने सीमा चौकियों का उद्घाटन किया और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की विभिन्न परियोजनाओं का ई-उद्घाटन और ई-शिलान्यास किया। गृह मंत्री ने निर्देश दिए कि संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान के लिए घर-घर सर्वेक्षण अभियान चलाया जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि सत्यापन के दौरान अनुपस्थित पाए गए व्यक्तियों की जांच हो, लेकिन किसी भी वास्तविक भारतीय नागरिक या मतदाता का नाम त्रुटिवश सूची से न हटे। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सीमावर्ती इलाकों में विकास कार्यों को गति देने के साथ-साथ सुरक्षा तंत्र को आधुनिक तकनीक से लैस किया जाए, ताकि सीमा पार से होने वाली अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके।

Topics: पाञ्चजन्य विशेषविदेशी घुसपैठकिशनगंजचिकन नेकभारत-नेपाल सीमाअप्रत्याशित वृद्धि दरखुफिया विभागसंसाधनों का दोहनकटिहारबाहरी घुसपैठिएमतदाता सूचीसिलीगुड़ी गलियाराराष्ट्रीय सुरक्षासामरिक संवेदनशीलतासशस्त्र सीमा बलनागरिकता सत्यापनवोट बैंक की राजनीतिदेश की अर्थव्यवस्था
अभय कुमार
अभय कुमार
अभय कुमार, सीएसडीएस (CSDS ), इप्सोस (IPSOS) सहित कई रिसर्च और मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। भारतीय राजनीति सामाजिक और अंतरराष्ट्रीय मामलो से जुड़े मुद्दों पर खास दिलचस्पी है और इसके लिए लिखते रहते हैं। [Read more]
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