तेलंगाना के जयशंकर भूपालपल्ली जिले में बहने वाली एक नदी से भगवान विष्णु की करीब 900 वर्ष पुरानी मूर्ति मिलने का मामला प्रकाश में आया है, जिसके बाद इलाके के लोगों में काफी चर्चा में है। बताया जा रहा है कि ये करीब 5 फीट ऊंची ये मूर्ति काकतीय काल की है। हालांकि, अभी तक ऑर्कियोलॉजिकल सर्वे की टीम के द्वारा इसकी जांच नहीं हो सकी है।
क्या है पूरा मामला
तेलंगाना टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, ये मूर्ति पेड़ावागू नाम की एक नदी (स्ट्रीम) से निकाली गई है, जो महामुथारम मंडल के मदारम गांव के पास बहती है। तीन साल पहले जब पानी कम हुआ था, तब इसकी सिर वाली हिस्सा रेत में दिखा था, लेकिन पूरी तरह नहीं निकाली जा सकी। हाल ही में फिर पानी घटा तो मूर्ति फिर से दिखाई दी। सोशल मीडिया पर इसके वीडियो वायरल होने के बाद हैदराबाद से एक शख्स आया और चिंतकानी व जग्गैया पल्ली गांव के लोगों की मदद से इसे बाहर निकाला।
मूर्ति की खासियत
ये मूर्ति काले ग्रेनाइट पत्थर की एक ही टुकड़े से बनी है, जो करीब पांच फीट ऊंची है। बहुत बारीक नक्काशी वाली है, जो उस समय के शिल्पकारों की कला दिखाती है। ज्यादातर हिस्सा सही-सलामत है, लेकिन नाक और कुछ उंगलियां थोड़ी क्षतिग्रस्त हैं – शायद पहले किसी तलाश करने वालों ने कोशिश की होगी। हाथों की मुद्रा, मुकुट और सजावट देखकर कुछ लोग इसे चेन्नाकेशव स्वामी की मूर्ति मान रहे हैं।
मूर्ति की सटीक उम्र की पुष्टि नहीं
लोगों का मानना है कि ये काकतीय काल की है, यानी करीब 800-900 साल पुरानी हो सकती है। अभी तक आर्कियोलॉजिकल डिपार्टमेंट ने इसकी वैज्ञानिक जांच नहीं की है, इसलिए सटीक उम्र या इतिहास की पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी, ये मूर्ति स्थानीय लोगों में काफी उत्सुकता पैदा कर रही है, क्योंकि ये उस दौर की बेहतरीन शिल्पकला का नमूना लगती है।
मूर्ति को अभी किसी खास जगह पर सुरक्षित नहीं रखा गया है। जग्गैया पल्ली के लोगों ने इसे अपने गांव ले जाने की जिद की। वहीं, मदारम गांव के एक किसान ने अपनी जमीन पर ही मंदिर बनाने की बात कही, क्योंकि मूर्ति उसके खेत के पास मिली है। आर्कियोलॉजिकल अथॉरिटी को जल्द जांच कर रिपोर्ट देनी है, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक एक्शन या घोषणा नहीं हुई है।











