ममता बनर्जी राजनीतिक तौर पर काफी परेशान हैं। ममता बनर्जी एसआईआर का बहाना बनाकर आज से से कोलकाता में धरना देंगी। मगर ममता बनर्जी एसआईआर के कारण कम और मुस्लिम वोट बैंक के बदलते समीकरण के कारण ज्यादा परेशान हैं। पश्चिम बंगाल में मुस्लिम मतदाता 2011 के विधानसभा चुनाव के बाद से पूर्णतः ममता बनर्जी के लिए मतदान कर रहा है। यही कारण है कि 2011, 2016 और 2021 के विधानसभा चुनावों में ममता बनर्जी बड़े बहुमत के साथ सरकार बनाने में कामयाब रही थी। मुस्लिमों ने 2021 में सबसे ज्यादा ममता बनर्जी के लिए सबसे अधिक बढ़-चढ़कर मतदान किया जब कांग्रेस पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टियां शून्य पर सिमट गईं।
मुस्लिम मतदाताओं की मतदान प्रक्रिया में हुआ बड़ा बदलाव
मगर हाल के दिनों में मुस्लिम मतदाताओ के मतदान प्रक्रिया में एक बड़ा बदलाव देखा गया है, जिससे पश्चिम बंगाल भी अछूत्ता नहीं है। ममता बनर्जी के गृह राज्य पश्चिम बंगाल में सागरदिघी विधानसभा सीट का 2023 उपचुनाव का परिणाम ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ा सदमा लेकर आया, जिससे अभी तक वो नहीं उबर सकी है। इस सीट पर उपचुनाव तृणमूल कांग्रेस पार्टी के विधायक सुब्रत साहा के निधन के कारण हुआ था। कांग्रेस पार्टी मुर्शिदाबाद जिले के मुस्लिम बाहुल्य सागरदिघी विधानसभा सीट पर उपचुनाव में तृणमूल कांग्रेस पार्टी को हराकर 1972 के बाद पहली बार इस सीट को जीतने में कामयाब हुई थी।
यह चुनाव परिणाम पश्चिम बंगाल में मुस्लिम मतदाताओं के बदलते मानसिकता का बड़ा उद्धरण है। ममता बनर्जी इस चुनाव परिणाम से काफी परेशान हो गई हैं, क्योंकि उनको आशंका थी कि अगर कांग्रेस पार्टी का विधायक रहेगा तो कांग्रेस पार्टी मुस्लिम मतदाताओं में सेंधमारी करने का प्रयास कर सकती है। अतएव उन्होंने राज्य में उपचुनाव में निर्वाचित इकलौते कांग्रेस पार्टी विधायक बायरन विश्वास को तुरंत ही अपने पार्टी में शामिल करवा लिया। विदित हो कि सागरदिघी विधानसभा सीटपर 64 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं।
पश्चिम बंगाल की सीमा से सट्टे निचली असम इलाके में धुबरी लोकसभा की सीट पर कांग्रेस पार्टी के रकीबुल हुसैन ने आल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के सर्वेसर्वा और बड़े मुस्लिम नेता बदरुद्दीन अजमल को देश में सबसे अधिक 1012476 मतों से पराजित किया है। रकीबुल हुसैन के जीत का अंतर कांग्रेस पार्टी के एक तिहाई से अधिक 34 सांसदों के जीत के अंतर से भी अधिक था। अजमल 2009, 2014 और 2019 के लोकसभा के चुनाव में बड़े मतों के अंतर से इस सीट पर जीत दर्ज़ की थी। मगर 2024 के लोकसभा चुनाव का परिणाम मुस्लिम परस्त पार्टियों को सदमे में डाल दिया है। बदरुद्दीन अजमल इस लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाली 11 विधानसभा सीटों में किसी भी सीट पर प्रथम पायदान पर नहीं आ सके थे।
महाराष्ट्र का हाल
सभी मुस्लिम मतों के लिए लामबंद तथाकथित दल महाराष्ट्र के मालेगांव सेंट्रल विधानसभा सीट के 2024 के चुनाव परिणाम से भी काफी पेशोपेश में हैं। मालेगाव सेंट्रल विधानसभा सीट धुले लोकसभा सीट के अंतर्गत है। कांग्रेस पार्टी ने 2024 लोकसभा चुनाव में धुले लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाली पांच विधानसभा सीटों पर 189172 मतों से पिछड़ने के बावजूद भी सिर्फ मालेगाव सेंट्रल विधानसभा सीट पर 194327 मत से बढ़त प्राप्त करके धुले सीट को 3831 मतों से जीतने में सफल रही थी। कांग्रेस पार्टी को मालेगांव सेंट्रल विधानसभा सीट पर कुल पड़े मतों का 96.73 फीसद प्राप्त हुआ था। मगर महज छह महीने बाद हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी को इस सीट पर महज 3.13 फीसद मत मिला और उसकी जमानत भी जब्त हो गई थी। मुस्लिम मतदाताओं ने विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी को पूर्णतः किनारे करके असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन और स्थानीय दल इंडियन सेक्युलर लार्जेस्ट असेंबली ऑफ़ महाराष्ट्र के पक्ष में मतदान किया था।
दिल्ली में मुस्लिमों ने दिया कांग्रेस को वोट
दिल्ली में लोकसभा चुनाव में मुस्लिम मतदाताओ ने बढ़ चढ़कर कांग्रेस पार्टी के लिए मतदान किया था और कांग्रेस पार्टी मुस्लिम बाहुल्य सुल्तानपुर माजरा, चांदनी चौक, मटियामहल, बल्लीमारान, सीमापुरी, सीलमपुर और बाबरपुर विधानसभा की सीटों पर बढ़त बनाने में कामयाब हुई थी। मगर विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस पार्टी का इन सभी सीटों जमानत जब्त हो गया था। यह मुस्लिम मतदाताओं के चुनाव दर चुनाव बदलते मतदान को परिलक्षित करता है।
ममता बनर्जी हैं चिंतित
पश्चिम बंगाल से सटे बिहार के मुस्लिम बाहुल्य सीमांचल इलाके का विगत 2020 और 2025 के विधानसभा चुनाव में परिणाम से भी ममता बनर्जी विचलित है। यह क्षेत्र कांग्रेस पार्टी और राजद का गढ़ हुआ करता था। अभी भी सीमांचल क्षेत्र के चार लोकसभा की सीटों में तीन पर कांग्रेस पार्टी या उसके सहयोगी का कब्ज़ा है। मगर विधानसभा चुनाव में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ने इस इलाके में कांग्रेस पार्टी और राजद का सूपड़ा साफ़ कर दिया है। महाराष्ट्र में भी हाल में संपन्न हुए निकाय चुनाव में भी कांग्रेस पार्टी, समाजवादी पार्टी और इसके सहयोगी दलों को पुरे राज्य में मुस्लिम मतदाताओं के हाथों मुँह की खानी पड़ी है और मुस्लिम मतदाताओं ने इन दलों के बदले असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन और शेख़ आसिफ शेख़ रशीद की इंडियन सेक्युलर लार्जेस्ट असेंबली ऑफ़ महाराष्ट्र को बड़े पैमाने पर मतदान किया है।
मुस्लिम मतों के लिए ताक लगाए दल 2023 में पश्चिम बंगाल के सागरदिघी विधानसभा सीट, 2024 के धुबरी लोकसभा सीट वो मालेगांव सेंट्रल विधानसभा सीट का चुनाव परिणाम और 2025 में सीमांचल इलाके और महाराष्ट्र स्थानीय निकाय चुनाव परिणामो से काफी त्रस्त हैं।

















