डिजिटल भारत की दमदार उड़ान बना UPI, दुनिया के कई देश अपना रहे भारतीय भुगतान मॉडल
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डिजिटल भारत की दमदार उड़ान बना UPI, दुनिया के कई देश अपना रहे भारतीय भुगतान मॉडल

लेनदेन की कुल वैल्यू भी उल्लेखनीय रूप से बढ़कर 26.84 लाख करोड़ रुपये हो गई, जो सालाना आधार पर 22 प्रतिशत की वृद्धि है। यह दर्शाता है कि डिजिटल भुगतान के प्रति लोगों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है।

Written byडाॅ. मयंक चतुर्वेदीडाॅ. मयंक चतुर्वेदी — edited by Mahak Singh
Mar 1, 2026, 02:43 pm IST
inभारत
यूपीआई नियमों में बदलाव

यूपीआई नियमों में बदलाव

भारत की डिजिटल क्रांति का सबसे मजबूत स्तंभ बन चुका यूनाइटेड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) अब देश के भीतर लेनदेन का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन गया है, वहीं, ये वैश्विक स्तर पर भी अपनी ताकत का एहसास करा रहा है। फरवरी 2026 में यूपीआई के जरिए होने वाले लेनदेन की संख्या में सालाना आधार पर 27 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसी के साथ इसकी कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू भी 22 प्रतिशत बढ़कर 26.84 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।

दरअसल यह आंकड़े दिखाते हैं कि भारत का डिजिटल भुगतान तंत्र कितनी तेजी से आगे बढ़ रहा है और विश्‍व के कई देश अब इस भारतीय मॉडल को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार फरवरी में यूपीआई के जरिए कुल 20.39 अरब ट्रांजेक्शन दर्ज किए गए। यह पिछले वर्ष की तुलना में 27 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।

लेनदेन की कुल वैल्यू भी उल्लेखनीय रूप से बढ़कर 26.84 लाख करोड़ रुपये हो गई, जो सालाना आधार पर 22 प्रतिशत की वृद्धि है। यह दर्शाता है कि डिजिटल भुगतान के प्रति लोगों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। फरवरी के दौरान प्रतिदिन औसतन 728 मिलियन ट्रांजेक्शन दर्ज किए गए, जबकि जनवरी में यह आंकड़ा 700 मिलियन था। वहीं प्रतिदिन औसतन 95,865 करोड़ रुपये का डिजिटल लेनदेन हुआ, जो जनवरी के 91,403 करोड़ रुपये के मुकाबले अधिक है।

जनवरी में भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था यूपीआई

फरवरी से पहले जनवरी 2026 में भी यूपीआई ने नया रिकॉर्ड बनाया था। उस महीने कुल 21.70 अरब ट्रांजेक्शन दर्ज किए गए थे, जो पिछले वर्ष की तुलना में 28 प्रतिशत अधिक थे। जनवरी में लेनदेन की कुल वैल्यू 28.33 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी, जिसमें 21 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई। यह लगातार बढ़ता ग्राफ इस बात का संकेत है कि भारत में डिजिटल भुगतान व्यवस्था बेहद तेजी से आम लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है।

अन्य डिजिटल भुगतान माध्यम भी बढ़े

यूपीआई के साथ-साथ अन्य डिजिटल भुगतान माध्यमों में भी वृद्धि देखी जा रही है। आईएमपीएस (इमीडिएट पेमेंट सर्विस) का मासिक वॉल्यूम फरवरी में 336 मिलियन रहा, जिसमें सालाना आधार पर 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसकी कुल ट्रांजेक्शन वैल्यू 6.42 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इसके अलावा फास्‍टेग के जरिए होने वाले भुगतान भी बढ़ रहे हैं। फरवरी में फास्टैग का मासिक लेनदेन 350 मिलियन रहा, जिसकी कुल वैल्यू 6,925 करोड़ रुपये थी। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 5 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।

नकद भुगतान को पीछे छोड़ चुका है यूपीआई

भारत सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा कराए गए एक स्वतंत्र अध्ययन में यह सामने आया है कि यूपीआई अब देश में सबसे पसंदीदा भुगतान माध्यम बन गया है। हैं। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) की रिपोर्ट के अनुसार भारत में कुल भुगतान लेनदेन का लगभग 57 प्रतिशत हिस्सा यूपीआई के माध्यम से हो रहा है, जबकि नकद लेनदेन का हिस्सा लगभग 38 प्रतिशत रह गया है। इसका सबसे बड़ा कारण यूपीआई की सहजता, तेजी और इंस्टेंट मनी ट्रांसफर की सुविधा है। मोबाइल फोन से कुछ सेकंड में पैसा भेजने या प्राप्त करने की सुविधा ने लोगों की भुगतान आदतों को पूरी तरह बदल दिया है।

विश्‍व भर में फैल रही भारत की डिजिटल ताकत

उल्‍लेखनीय है कि यूपीआई अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। इसकी सफलता को देखते हुए कई देश इसे अपने यहां लागू करने या इसके साथ साझेदारी करने में रुचि दिखा रहे हैं। वर्तमान में यूपीआई संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस, मॉरीशस और कतर सहित आठ से अधिक देशों में सक्रिय है। इन देशों में भारतीय पर्यटक और प्रवासी अब सीधे यूपीआई के माध्यम से भुगतान कर सकते हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय रेमिटेंस आसान हो रही है और सीमा-पार लेनदेन की लागत भी कम हो रही है।

भारत-इजरायल डिजिटल साझेदारी का नया अध्याय

हाल ही में भारत और इजरायल ने डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। दोनों देशों ने यूपीआई के सीमा-पार उपयोग को सक्षम बनाने की घोषणा की है। इस पहल के तहत यूपीआई को इजरायल के घरेलू भुगतान ढांचे से जोड़ा जाएगा, जिससे दोनों देशों के बीच डिजिटल लेनदेन तेज और सस्ता हो सकेगा। यह साझेदारी भारत के फिनटेक इकोसिस्टम की वैश्विक स्वीकार्यता का बड़ा उदाहरण है।

वैश्विक फिनटेक में भारत की मजबूत होती स्थिति

यूपीआई की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय पहुंच से भारत की स्थिति वैश्विक फिनटेक सेक्टर में लगातार मजबूत हो रही है। क्‍योंकि यूपीआई का मॉडल सस्ता, सुरक्षित और इंटरऑपरेबल है, इसलिए कई देश इसे अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं। यह मॉडल डिजिटल भुगतान के लोकतंत्रीकरण का उदाहरण बन चुका है, जिसमें छोटे दुकानदार से लेकर बड़े व्यापारिक संस्थान तक सभी आसानी से शामिल हो सकते हैं।

कहना होगा कि आज भारत की यह डिजिटल तकनीक अब दुनिया के लिए एक सार्वजनिक डिजिटल अवसंरचना (Digital Public Infrastructure) का मॉडल बन रही है। ऐसे में यूपीआई की सफलता यह दिखाती है कि सही तकनीक, मजबूत नीतियों और व्यापक डिजिटल पहुंच के साथ कोई भी देश अपने आर्थिक ढांचे को तेजी से बदल सकता है। अगर यही रफ्तार जारी रही, तो यूपीआई कहना होगा कि जल्‍द भारत की तकनीकी नेतृत्व क्षमता का वैश्विक प्रतीक बन जाएगा।

Topics: Digital payment systemsUPI transaction valueFASTag digital paymentsDigital IndiaUnified Payments InterfaceUPI digital paymentsIndia's digital revolutionNPCI reportFebruary 2026 UPI transactionscashless economy
डाॅ. मयंक चतुर्वेदी
डाॅ. मयंक चतुर्वेदी
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और हिंदुस्थान समाचार से संबद्ध हैं। [Read more]
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