कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की भारत यात्रा से पहले वहां की सरकार ने जिस तरह यह कहा कि उनके देश में होने वाले अपराधों का भारत से कोई संबंध नहीं, वह केवल भूल सुधार ही नहीं, बल्कि इसका प्रमाण है कि जस्टिन ट्रुडो के नेतृत्व वाली पिछली सरकार किस तरह अपने संकीर्ण राजनीतिक कारणों से भारत विरोधी एजेंडे पर चल रही थी। चलो चाहे देर से ही सही, कनाडा के नेतृत्व को अब अपनी भूल का एहसास तो हुआ परंतु अब उसे केवल शब्दों से ही नहीं बल्कि अपनी कार्रवाईयों से दिखाना होगा कि वे भारत के प्रति कितने सुहृदय हैं।
खालिस्तानी नेता जगमीत के दबाव में थे ट्रुडो
जैसा कि सभी जानते हैं कि कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो ने भारत से भागे और अवैध तरीके से कनाडा में प्रवेश करने वाले खालिस्तान समर्थक आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराते हुए ऐसे बेतुके बयान दिए थे कि इस हत्याकांड में भारत का हाथ होने के पुख्ता आरोप सामने आए हैं। प्रमाण के बजाय आरोप की हास्यास्पद बात करके उन्होंने अपनी जगहंसाई तो कराई ही थी, यह भी सिद्ध किया था कि वे खालिस्तान समर्थक नेता जगमीत सिंह के इशारे पर भारत से संबंध खराब करने पर तुल गए थे। यह ठीक है कि उनकी अल्पमत सरकार जगमीत की पार्टी के समर्थन की मोहताज थी, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि वे उसके दबाव प्रभाव में भारत से संबंध बिगाडऩे की हद तक चले जाते। आम तौर पर अल्पमत सरकारें घरेलू मामलों में समर्थक दलों के दबाव में आती हैं, लेकिन ट्रूडो सरकार तो विदेश नीति पर जगमीत की पार्टी के समक्ष नतमस्तक हो गई।
ट्रुडो के शासनकाल में भारत विरोध को मिला सरकारी प्रोत्साहन
समस्या केवल इतनी ही नहीं थी कि जस्टिन ट्रूडो खालिस्तान समर्थक नेताओं के एजेंडे को आगे बढ़ा रहे थे, बल्कि यह भी थी कि वे भारत विरोधी तत्वों की पीठ पर हाथ रखे हुए थे। इसका दुष्परिणाम यह था कि कनाडा में सक्रिय खालिस्तान समर्थक अतिवादी आए दिन भारत के खिलाफ उग्र-हिंसक प्रदर्शन करते थे। वे भारत के साथ-साथ भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों को भी धमकाते थे, पर जस्टिन मौन साधे रहते थे। इस कारण भारत को भी उनके खिलाफ कठोर रवैया अपनाना पड़ा।
मार्क कार्नी को पिछली सरकार के पापों को धोना होगा
यह अच्छा हुआ कि उनकी जगह प्रधानमंत्री बने मार्क कार्नी पहले दिन से भारत से संबंध सुधार के प्रयास कर रहे हैं, पर भारतीय नेतृत्व केवल इतने से संतुष्ट नहीं हो सकता कि नई सरकार पिछली सरकार की गलतियां ठीक कर रही है। भारत को यह देखना होगा कि कनाडा में भारत के खिलाफ सुनियोजित दुष्प्रचार करते रहने वाले खालिस्तान समर्थकों के खिलाफ कोई ठोस कानूनी कार्रवाई होती है या नहीं? मार्क कार्नी को अपनी बातों को लागू भी करके दिखाना होगा।
कनाडा में खालिस्तानी वायरस अभी भी हावी
भारत इसकी अनदेखी नहीं कर सकता कि कनाडा में खालिस्तानी वायरस अभी भी भारतीय हितों के लिए खतरा बने हुए हैं। भारत यह भी नहीं भूल सकता कि तीन सौ से अधिक यात्रियों की जान लेने वाले एयर इंडिया के विमान को विस्फोट से उड़ाने वाले खालिस्तान समर्थक आतंकियों को कोई कठोर सजा नहीं दी जा सकी है और वहां जब-तब उनका महिमामंडन भी होता रहता हैं। संबंधों में वास्तविक सुधार के लिए यह सब बंद होना चाहिए।
भारत विरोधियों को स्पष्ट संदेश देना होगा
कनाडा में सत्ता बदली है और सरकार का दृष्टिकोण भी बदला हुआ लगता है परंतु अभी यह कहना जल्दबाजी होगा कि वहां सबकुछ बदल गया है। वहां पर भारत में आतंकी घोषित, भगोड़े, गैंगस्टर व अपराधी आज भी न केवल स्वच्छंद घूम रहे हैं बल्कि सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा भी लेते हैं। इन असमाजिक तत्वों ने वहां के गुरुद्वारों की प्रबंधक कमेटियों पर कब्जा किया हुआ है और इन गुरुद्वारों में भारत विरोधी गतिविधयां संचालित की जा रही हैं। मार्क कार्नी को अगर भारत और कनाडा के बीच संबंध मधुर बनाने हैं तो इन तत्वों के खिलाफ सख्ती से पेश आना होगा।















