हल्द्वानी बनभूलपुरा रेलवे अतिक्रमण: क्या कांग्रेस सपा की राजनीति से उलझा मामला?
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हल्द्वानी बनभूलपुरा रेलवे अतिक्रमण: क्या कांग्रेस सपा की राजनीति से उलझा मामला?

सुप्रीम कोर्ट ने हल्द्वानी बनभूलपुरा में रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया। ईद के बाद पात्र परिवारों के लिए PMAY पुनर्वास कैंप लगेंगे। राजनीतिक विवाद और झूठे दावों पर कार्रवाई की चेतावनी।

Written byउत्तराखंड ब्यूरोउत्तराखंड ब्यूरो — edited by कुलदीप सिंह
Feb 27, 2026, 11:06 am IST
inउत्तराखंड
प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

देहरादून: नैनीताल जिले में हल्द्वानी रेलवे स्टेशन की पटरियों के किनारे हुए अतिक्रमण मामले में सुप्रीम कोर्ट का अंतिम निर्णय आना बाकि है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है ये रेलवे और राज्य सरकार की भूमि पर अतिक्रमण है इसे खाली कराया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के समक्ष राज्य सरकार और रेलवे के तरफ से ये आश्वस्त किया गया कि प्रभावित को पात्रता के आधार पर पीएम आवास योजना स्कीम के अंतर्गत पुनर्वास किया जा सकता है जैसे कि गुजरात में हुए ऐसे ही एक अन्य मामले में भी किया गया था। जिसे आदेश सुप्रीम कोर्ट ने ही दिए थे।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश

जिला प्रशासन को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देशित किया है कि वो ईद के बाद दस दिनों में कैंप लगाकर पात्र लोगों का चयन करे और इसकी जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दें। जिला अधिकारी ललित मोहन रयाल ने बैठक करके इसकी तैयारी शुरू कर दी है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जो पात्र है वे अपने साक्ष्यों के आधार पर अपने आवेदन करे। जिला प्रशासन, जिला विधिक प्राधिकरण की देखरेख में ये कैंप लगाएगा।

प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि झूठे साक्ष्य या एफिडेविट देने वालों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई होगी। दरअसल, जिला प्रशासन ऐसी प्रकिया अपनाना चाहता है, जिससे समय खराब न हो और सुप्रीम कोर्ट में भी जानकारियां सत्यापन के आधार पर दी जाएं। ऐसी जानकारी भी सामने आ रही है कि यहां प्रभावित परिवारों को ये भली भांति पता है कि वो अवैध रूप से सरकारी भूमि पर बसे हुए हैं और उन्हें एक न एक दिन हटाना ही पड़ेगा। लिहाजा सम्पन्न लोगों ने अपनी वैकल्पिक व्यवस्थाएं भी कर ली है।

बहुत से ऐसे लोग हैं जो कि बाहरी राज्यों से यहां आए और उन्होंने स्टांप पेयर पर जमीनों के सौदे कर अपनी बसावट कर ली। ऐसे में ये लोग अपने राज्य में जाकर ही आवास योजनाओं का लाभ ले पाएंगे उत्तराखंड में नहीं। रेलवे के पास अपनी भूमि नहीं है, उत्तराखंड सरकार यहां के पात्र लोगों को कहां पीएम आवास योजनाओं का लाभ देगी ये भी अभी तय नहीं।क्योंकि नगरी क्षेत्र में भूमि का आभाव है। फिलहाल, जिला प्रशासन स्कूटनी प्रकिया को सरल आसान बनाना चाहता है और ये भी सख्त चेतावनी दे रहा है कि झूठे साक्ष्य और दावा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई वो करेगा।

इसे भी पढ़ें: ‘हम जिएंगे आजाद, मरेंगे आजाद’: चंद्रशेखर आजाद के बलिदान की अमर गाथा

कांग्रेस सपा नेताओं की राजनीति से उलझा मामला

जानकर बताते हैं कि पूर्व में हाईकोर्ट के आदेशों के तहत यदि रेलवे के अतिक्रमण को हटाने की कारवाई यदि हो जाती तो राजस्व की भूमि के अतिक्रमण की नौबत न आती और सरकार भी उसका कोई समाधान निकाल लेती। दरअसल, कोर्ट ने पटरी के ऊपर बसी ढोलक गफूर बस्ती को ही सबसे पहले संज्ञान लिया था कि ये रेलवे का अतिक्रमण है ये कब्जेदार, स्थानीय भी नहीं थे यदि ये हटा दिए जाते तो रेलवे को पर्याप्त स्थान मिल जाता किंतु कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेताओं ने तुष्टिकरण, वोटबैंक की राजनीति की आगे रख कर सभी अतिक्रमणकारियों की सहानभूति बटोरने की कोशिशों में ये मामला कोर्ट दर कोर्ट पहुंचाया और वहां बड़े बड़े वकील खड़े कर कब्जेदारो के हितैषी बनने के ताने बाने बुने।

कांग्रेस और सपा के वोटबैंक हैं अतिक्रमणकारी

बीजेपी इस प्रकरण में सरकारी पक्ष की तरह रही क्योंकि ज्यादातर अतिक्रमणकारी कांग्रेस और सपा वोटबैंक से जुड़े थे अब यदि अतिक्रमण हटेगा तो उसे भी राजनीतिक फायदा तो मिलेगा ही, गौरतलब बात ये भी है अतिक्रमण, डेमोग्राफी चेंज के विषय पर सोशल मीडिया पर बनभूलपूरा  पर खूब सुर्खियां बनी है बाहरी यू ट्यूबर्स ने अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए यहां के लोगों के साथ एक तरह से खिलवाड़ ही किया और उसका परिणाम स्थानीय लोगों को भुगतना पड़ा है।

बहरहाल, अब सुप्रीम कोर्ट में अंतरिम निर्देश आने पर स्पष्ट हो गया कि अतिक्रमण हटेगा और अब वो यू ट्यूबर्स भी एक बार फिर यहां आयेंगे और स्थानीय लोगों को भावनात्मक रूप से प्रचारित करने का काम करेंगे। जिसकी शुरुआत हो भी चुकी है। ऐसे में जिला प्रशासन को चौकसी बरतनी पड़ेगी कि वो ऐसे दुष्प्रचार को रोके और इस समस्या का स्थाई समाधान दिए जाने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

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