पश्चिम बंगाल SIR मामला अब संवैधानिक और प्रशासनिक सख्ती के दौर में पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि स्टेटिस्टिकल इंस्पेक्शन रिपोर्ट (SIR) पर किसी भी हाल में रोक नहीं लगेगी। अदालत ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कई मांगों को खारिज करते हुए यह स्पष्ट किया कि कोई भी राज्य इस प्रक्रिया में बाधा नहीं डाल सकता।
चुनाव अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर CJI सूर्यकांत ने बंगाल के DGP को नोटिस जारी किया है।
चुनाव अधिकारियों की तैनाती और सुप्रीम कोर्ट के आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने ममता सरकार को निर्देश दिया कि आज शाम 5 बजे तक 8,555 ग्रुप-बी अधिकारी जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) के समक्ष रिपोर्ट करें। इन अधिकारियों को माइक्रो-ऑब्जर्वर के रूप में तैनात किया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि तैनाती से पहले इन्हें 1–2 दिन का संक्षिप्त प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि SIR प्रक्रिया में किसी तरह की तकनीकी या प्रशासनिक चूक न हो।
माइक्रो-ऑब्जर्वर की भूमिका पर अदालत की स्पष्टता
अदालत ने दो टूक कहा कि माइक्रो-ऑब्जर्वर केवल निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) की सहायता करेंगे। अंतिम फैसला लेने का अधिकार पूरी तरह ERO के पास ही रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि चुनाव आयोग को मौजूदा ERO और AERO को बदलने या उनकी योग्यता के आधार पर सेवाएं जारी रखने का पूरा विवेकाधिकार होगा।
SIR जांच की समयसीमा बढ़ी
चूंकि बड़ी संख्या में नए अधिकारियों को तैनात किया गया है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया को देखते हुए 14 फरवरी के बाद एक सप्ताह का अतिरिक्त समय देने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने कहा कि चुनावी पारदर्शिता के लिए अधिकारियों की पहचान, बायोडाटा और दस्तावेजों की गहन जांच अनिवार्य है।
सुप्रीम कोर्ट के 5 प्रमुख निर्देश
रिपोर्टिंग : 8,505 ग्रुप-बी अधिकारी आज शाम 5 बजे तक रिपोर्ट करें।
अधिकार : ERO और AERO को बदलने का अधिकार चुनाव आयोग के पास रहेगा।
प्रशिक्षण : नए अधिकारियों को 1–2 दिन की संक्षिप्त ट्रेनिंग मिलेगी।
भूमिका : माइक्रो-ऑब्जर्वर केवल सहायक होंगे, अंतिम निर्णय ERO का होगा।
डेडलाइन : SIR जांच के लिए 14 फरवरी के बाद 7 दिन का अतिरिक्त समय।
सुनवाई के दौरान मंदिर का जिक्र और तीखी बहस
सुप्रीम कोर्ट SIR सुनवाई के दौरान उस वक्त माहौल गरमा गया जब मंदिरों का जिक्र सामने आया। राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने मंदिर से जुड़े एक आवेदक की भूमिका पर सवाल उठाया।
इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कड़ा सवाल किया कि मंदिरों के प्रति यह घृणा क्यों है।
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट और आंकड़ों का खुलासा
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दिवान ने बताया कि ड्राफ्ट इलेक्टोरल लिस्ट में लगभग 7.08 करोड़ मतदाता शामिल हैं, जिनमें से 6.75 करोड़ मतदाता मैप किए जा चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मैपिंग का अर्थ है कि इन मतदाताओं का नाम 2002 की मतदाता सूची में मौजूद था या वे किसी रिश्तेदार के माध्यम से पहचाने जा सके।
तथ्यात्मक विवाद नहीं चाहिए : सुप्रीम कोर्ट
अदालत ने साफ निर्देश दिए कि इस मामले में कोई तथ्यात्मक विवाद नहीं होना चाहिए। जिन अधिकारियों को तैनात किया जाना है, उनके नाम, पदनाम और पूरा विवरण विधिवत तरीके से प्रस्तुत किया जाए। कोर्ट ने कहा कि बिना स्पष्ट पहचान के किसी अधिकारी को ड्यूटी पर नहीं भेजा जा सकता।
SIR पर कोई रोक नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने साफ संदेश दे दिया है कि पश्चिम बंगाल SIR प्रक्रिया बिना किसी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव के जारी रहेगी। सर्वोच्च अदालत के सख्त निर्देशों से एक बात तो स्पष्ट है कि चुनावी पारदर्शिता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से किसी भी प्रकार का कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

















