अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर को लेकर बातचीत गुरुवार को खत्म हो गई, लेकिन बिना किसी समझौते के। ये बातचीत जेनेवा में हुई थी और ओमान ने इसमें मध्यस्थ की भूमिका निभाई। अब अगले हफ्ते वियना में टेक्निकल लेवल पर फिर से बात होगी।
बातचीत का मौजूदा हाल
ये तीसरा राउंड था, जो अप्रत्यक्ष तरीके से हुआ। दो सेशन हुए थे। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इसे अब तक का सबसे लंबा और तीव्र दौर बताया और कहा कि अच्छी प्रगति हुई है। ओमानी मध्यस्थ ने भी कहा कि नई बातें आईं और उम्मीद है, लेकिन कोई ब्रेकडाउन नहीं हुआ। अमेरिकी टीम, जिसका नेतृत्व विशेष दूत स्टीव विटकॉफ कर रहे थे, ईरान के प्रस्तावों से निराश दिखी। दूसरा सेशन काफी छोटा रहा। दोनों पक्षों मुख्य मुद्दों पर जैसे यूरेनियम संवर्धन का अधिकार और ईरान के पास मौजूद हाईली एनरिच्ड यूरेनियम स्टॉक पर कोई सहमति नहीं बनी। ईरान कहता है कि वो गैर-न्यूक्लियर मुद्दों पर बात नहीं करेगा। IAEA के डायरेक्टर जनरल राफेल ग्रॉसी की भूमिका अहम है, क्योंकि किसी भी समझौते में लो-लेवल एनरिचमेंट का सत्यापन उनके जरिए होगी।
अमेरिका का रुख और धमकी
अमेरिका ईरान से परमानेंट गारंटी मांग रहा है कि वो न्यूक्लियर हथियार नहीं बनाएगा। इसमें यूरेनियम एनरिचमेंट पर स्थायी रोक, सख्त इंस्पेक्शन और बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पर भी बात शामिल है। सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो ने कहा कि ईरान मिसाइल रेंज पर बात करने से इनकार कर रहा है, जो बड़ी समस्या है। ईरान की मिसाइलें हर साल रेंज बढ़ा रही हैं, जो अमेरिकी बेस या यहां तक कि अमेरिकी धरती को भी खतरा पहुंचा सकती हैं। रुबियो ने बुधवार को कहा, “वे अभी एनरिच नहीं कर रहे, लेकिन वे उस पॉइंट तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं जहां वे आखिरकार कर सकें।” ट्रंप प्रशासन ने मिडिल ईस्ट में बड़ी सैन्य तैनाती की है – दो एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप्स, अटैक एयरक्राफ्ट, रिफ्यूलिंग प्लेन और टॉमहॉक मिसाइल वाली पनडुब्बियां। इससे या तो टारगेटेड स्ट्राइक हो सकती है या रिजीम चेंज के लिए बड़ा हमला। ट्रंप पर घरेलू दबाव भी है, डेमोक्रेट्स कांग्रेस में वोट चाहते हैं। एक पोल में 56% अमेरिकी ट्रंप के मिलिट्री फैसलों पर भरोसा नहीं करते।
ईरान का जवाब
ईरान न्यूक्लियर हथियार नहीं चाहता और अमेरिका की डिमांड ठुकरा रहा है- हमेशा के लिए जीरो एनरिचमेंट, न्यूक्लियर फैसिलिटीज़ को डिसमेंटल करना या यूरेनियम स्टॉक अमेरिका को ट्रांसफर करना। एक ईरानी अधिकारी ने कहा, “जीरो एनरिचमेंट फॉर एवर, फैसिलिटी डिसमेंटल और स्टॉक ट्रांसफर पूरी तरह अस्वीकार है।” ईरान कहता है कि 3-5 साल बाद लो-लेवल एनरिचमेंट UN सुपरविजन में हो सकता है और हाईली एनरिच्ड स्टॉक को ईरान में ही डाइल्यूट किया जा सकता है। बैलिस्टिक मिसाइल को डिफेंसिव मानता है और उस पर या रेजिस्टेंस ग्रुप्स पर बात नहीं करेगा। अराघची ने प्रगति होने का दावा किया।
क्या है पूरा मामला
पिछले साल जून में अमेरिका ने ईरान की न्यूक्लियर साइट्स – फोर्डो, नतांज और इस्फहान पर हमला किया था। ट्रंप ने कहा था कि प्रोग्राम खत्म हो गया, लेकिन IAEA को डैमेज चेक करने नहीं दिया गया। 2015 के JCPOA में ईरान को एनरिचमेंट का अधिकार मिला था। IAEA के मुताबिक ईरान के पास 400 किलो नीयर वेपन्स-ग्रेड यूरेनियम (5-6 बम के लिए काफी) है, जिसकी लोकेशन अज्ञात है, और 8,000 किलो 20% या उससे कम एनरिच्ड। ये आंकड़े पिछले साल मई के हैं। ईरान स्टॉक को डाइल्यूट कर सकता है या रूस/अमेरिका को एक्सपोर्ट, लेकिन एक्सपोर्ट बड़ा कंसेशन होगा।
















