भुवनेश्वर: मलकानगिरि जिले में अब माओवादी भय कम होता दिखाई दे रहा है। विकास की राह पर आगे बढ़ रहे दूरदराज़ क्षेत्रों के लोगों ने स्वयं को माओवादी डर से मुक्त करते हुए घनबेड़ा, खजुरीगुड़ा सहित विभिन्न गांवों में माओवादी संगठन द्वारा बनाए गए 20 शहीद स्तंभों को तोड़ दिया है। लगातार कमजोर पड़ रहे माओवादी संगठन के अस्तित्व पर संकट गहराने के बीच आम जनता भी उनके प्रभाव से बाहर निकल रही है। पहले मलकानगिरि जिला माओवादियों का गढ़ माना जाता था, लेकिन अब यहां उनके नेटवर्क का प्रभाव काफी कम हो गया है। जिन गांवों को कभी माओवादियों का आधार क्षेत्र माना जाता था, वहां अब ग्रामीण स्वयं माओवादी स्मारकों को ध्वस्त कर रहे हैं।
ऐसी तस्वीरें जिले के स्वाभिमान क्षेत्र सहित कालिमेला, माथिली और खैरपुट इलाकों से सामने आई हैं, जहां ग्रामीणों ने स्वेच्छा से माओवादी स्मारकों को नष्ट कर शांति और विकास का संदेश दिया है। इन सभी क्षेत्रों में पहले माओवादियों द्वारा स्थापित कुल 20 शहीद स्तंभों को सामूहिक निर्णय लेकर गिराया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि माओवादी केवल भय का वातावरण बनाते थे और मूलभूत सुविधाओं के विकास में बाधा डालते थे। अब वे शांति और प्रगति के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं। पिछले कुछ वर्षों से जिला पुलिस और नागरिक प्रशासन के संयुक्त प्रयासों के कारण लोग भयमुक्त होकर सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं।
मलकानगिरि को माओवादी मुक्त जिला घोषित किए जाने की पृष्ठभूमि में यह घटनाक्रम सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। जिला एसपी विनोद पाटिल ने कहा कि लोग संघर्ष और अलगाव के बजाय विकास, शांति और अवसर चाहते हैं। उन्होंने बताया कि मलकानगिरि पुलिस शांति बनाए रखने, सुरक्षा सुनिश्चित करने और विकास को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
माओवादियों नें फूट : ओडिशा के जंगल में साथी नक्सली द्वारा मारे गए माओवादी नेता का शव बरामद
उधर एक अय घटनाक्रम में ओडिशा के कंधमाल जिले के जंगल में साथी नक्सली द्वारा मारे गए माओवादी नेता का शव बरामद किया गया है । मारे गये माओवादी आत्मसमर्पण करना चाहता था। इससे गुस्साए अन्य माओवादियों ने उसकी हत्या कर दी है । इससे बचे कुचे माओवादियों के बीच आपसी फूट का मामला सामने आया है ।
ओडिशा के कंधमाल जिले के कुटीबारी गांव के समीप पाकरी जंगल से एक वरिष्ठ माओवादी नेता का सड़ा-गला शव मिट्टी के नीचे से बरामद किया गया। दारिंगबाड़ी पुलिस ने इसकी पुष्टि की।
मृतक की पहचान छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले निवासी 31 वर्षीय अन्वेष उर्फ रेनू के रूप में हुई है। वह प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) संगठन की कंधमाल-कालाहांडी-बौध-नयागढ़ (केकेबीएन) डिवीजन में दूसरे प्लाटून कमांडर के पद पर कार्यरत था।
यह बरामदगी इसी महीने कंधमाल पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करने वाले दो सक्रिय माओवादी कैडर नीतू और रूपा के खुलासे के बाद हुई। पुलिस के अनुसार दोनों ने बताया कि 28 जनवरी को अन्वेष ने मुख्यधारा में लौटने और आत्मसमर्पण की इच्छा जताई थी, जिसके बाद वरिष्ठ डिवीजनल नेता सुकरू ने उसकी बेरहमी से हत्या कर दी। संगठन से और लोगों के पलायन को रोकने के लिए शव को पाकरी जंगल में गाड़ दिया गया था। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने खुदाई कर अवशेष निकाले और पोस्टमार्टम के लिए दारिंगबाड़ी अस्पताल भेजा।
आत्मसमर्पित कैडरों ने केकेबीएन डिवीजन की वर्तमान स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की है। उनके अनुसार कंधमाल क्षेत्र में संगठन की ताकत घटकर करीब 25 सक्रिय सदस्यों तक रह गई है, जिनका नेतृत्व सुकरू और शीला कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कई सदस्य हिंसा से ऊब चुके हैं और सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ लेना चाहते हैं, लेकिन सुकरू की ओर से मौत की धमकी के कारण डर के माहौल में ऐसा नहीं कर पा रहे हैं। घटना के बाद जिले में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। कंधमाल एसपी हरीशा बी.सी. ने बताया कि पाकरी जंगल क्षेत्र में सुरक्षा बलों की दो प्लाटून तैनात की गई हैं। वहीं, एक वीडियो संदेश में नीतू और रूपा ने शेष 25 माओवादी कैडरों से भय का वातावरण छोड़कर मुख्यधारा में लौटने और सरकारी पुनर्वास योजना का लाभ उठाने की अपील की है।


















