मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर लंबे समय से धार्मिक और कानूनी विवाद का विषय रहा है। हाल ही में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा किए गए वैज्ञानिक सर्वे की विस्तृत रिपोर्ट ने इस विवाद को एक नई दिशा दे दी है। 98 दिनों तक चले सर्वे के बाद तैयार की गई 2189 पृष्ठों की रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की गई, जिसमें भोजशाला को प्राचीन सरस्वती (वाग्देवी) मंदिर होने के मजबूत प्रमाण मिलने की बात कही गई है। इस रिपोर्ट को हिंदू पक्ष के दावों के समर्थन में एक महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है।
भोजशाला विवाद- भोजशाला का ऐतिहासिक संबंध परमार वंश के महान शासक राजा भोज से जोड़ा जाता है। इतिहासकारों के अनुसार यह स्थल कभी शिक्षा, ज्ञान और संस्कृति का प्रमुख केंद्र था। मान्यता है कि यहां देवी सरस्वती का भव्य मंदिर स्थित था, जहां विद्या और शास्त्रों का अध्ययन होता था। समय के साथ इस स्थल पर कमाल मौलाना की दरगाह-मस्जिद का निर्माण हुआ, जिससे इसके मूल धार्मिक स्वरूप को लेकर विवाद खड़ा हो गया। वर्षों से यह प्रश्न बना हुआ है कि भोजशाला का वास्तविक स्वरूप मंदिर था या मस्जिद।
वैज्ञानिक सर्वे में भोजशाला परिसर में प्राचीन मंदिर के ठोस प्रमाण- मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के आदेश पर एएसआई ने 22 मार्च 2024 से 27 जून 2024 तक भोजशाला परिसर का वैज्ञानिक सर्वे किया। इस दौरान आधुनिक तकनीकों और पुरातात्विक तरीकों से स्थल की गहन जांच की गई। खुदाई के माध्यम से जमीन के नीचे छिपे अवशेषों को खोजा गया और संरचनाओं का सूक्ष्म अध्ययन किया गया। जुलाई 2024 में प्रस्तुत रिपोर्ट में मूर्तियों, शिलालेखों, स्तंभों और स्थापत्य अवशेषों का विस्तृत विवरण शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार, परिसर से प्राप्त नायिका, अर्धनारीश्वर और भगवान कुबेर की मूर्तियां इस बात की ओर संकेत करती हैं कि यहां मंदिर मौजूद था। ये सभी मूर्तियां हिंदू धार्मिक परंपराओं और मंदिर स्थापत्य से स्पष्ट रूप से जुड़ी हैं। इसके अतिरिक्त, मिले हुए खंभे, दीवारों के अवशेष और अन्य संरचनात्मक प्रमाण भी मंदिर के अस्तित्व को मजबूत करते हैं।
ब्रिटिश काल से जुड़े तथ्यों में बताया गया है कि उस समय कुछ महत्वपूर्ण पुरातात्विक अवशेष भोजशाला परिसर से बाहर ले जाए गए थे, जो मंदिर के प्रमाण हो सकते थे। यह तथ्य भी इस विवाद को और गंभीर बनाता है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों को एएसआई रिपोर्ट का अध्ययन कर 16 मार्च तक अपने-अपने पक्ष और आपत्तियां प्रस्तुत करने को कहा है। इसके बाद विस्तृत सुनवाई होगी, जो भोजशाला के ऐतिहासिक और धार्मिक स्वरूप पर अंतिम निर्णय तय करेगी।
















