प्रयागराज जनपद में उमेश पाल हत्याकांड में वांछित अभियुक्त गुड्डू मुस्लिम अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। उमेश पाल हत्याकांड के शूटरों पर एक और एफआईआर दर्ज हुई है। पांच लाख के इनामी शूटर गुड्डू मुस्लिम उर्फ गुड्डू बमबाज, अरमान और साबिर के खिलाफ प्रयागराज जनपद के एयरपोर्ट थाने में एफआईआर दर्ज हुई है।
एयरपोर्ट थाना प्रभारी विनय कुमार सिंह ने स्वयं वादी मुकदमा बन कर थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। पुलिस ने बताया कि न्यायालय से वारंट जारी होने के बाद भी अभियुक्त आत्म समर्पण नहीं कर रहे हैं इसलिए न्यायालय की अवमानना मामले में एफआईआर दर्ज हुई है। जानकारी के अनुसार, गुड्डू मुस्लिम, अरमान और साबिर के खिलाफ धूमनगंज थाने में गैंगस्टर के तहत केस दर्ज किया गया था। इसकी विवेचना एयरपोर्ट थाना प्रभारी विनय कुमार सिंह कर रहे हैं। अभियुक्तों के खिलाफ न्यायालय ने गैर जमानती वारंट जारी किया था। मगर तीनों अभियुक्त न्यायालय में हाजिर नहीं हुए। इसके बाद न्यायालय ने कुर्की का आदेश जारी किया था।
उमेश पाल हत्याकांड में गुड्डू बमबाज को शरण देने का खुलासा
उमेश पाल की हत्या के बाद गुड्डू बमबाज मेरठ पहुंचा था। वहां पर अतीक के बहनोई अखलाक ने गुड्डू बमबाज को अपने घर में शरण दी थी और उसकी आर्थिक सहायता भी की थी। सीसीटीवी फुटेज में अख़लाक़ और आयशा नूरी , गुड्डू बमबाज से मिलते हुए साफ देखे गए थे। बता दें कि गत 24 फरवरी 2023 को प्रयागराज जनपद के धूमनगंज थाना अंतर्गत उमेश पाल की घर के सामने गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उमेश पाल, बसपा विधायक राजू पाल हत्याकांड के मुख्य गवाह थे। इस हमले में दोनों गनर की भी मृत्यु हो गई थी। राजू पाल की हत्या के मुकदमे की सुनवाई काफी तीव्र गति से चल रही थी। इसी दौरान 24 फरवरी को उमेश पाल की हत्या हो गई। वर्ष 2005 में जब विधायक राजू पाल की हत्या के मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई तो सभी गवाह पक्षद्रोही हो गए थे।
गवाहों का अपहरण
जिस समय मुकदमे की सुनवाई हो रही थी। उस समय सपा का शासनकाल था। उसके बाद राजू पाल की पत्नी पूजा पाल ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की थी कि सपा के शासनकाल में अभियुक्तगण अत्यंत प्रभावी हैं इसलिए ट्रायल पर रोक लगा दी जाय। उच्च न्यायालय ने ट्रायल पर रोक लगा दी थी। जैसे ही बसपा की सरकार वर्ष 2007 में बनी। अतीक अहमद और उसके भाई के खिलाफ मुक़दमे दर्ज किये गए। राजू पाल हत्याकांड के गवाह जो कोर्ट में मुकर गए थे , उन सब ने थाने में एफआईआर लिखवाया कि उनका अपहरण कर लिया गया था और यह कहा गया था कि कोर्ट में अगर नहीं मुकरोगे तो जान से मार दिए जाओगे , इसलिए जान के डर से कोर्ट में बयान से मुकरना पड़ा था , राजू पाल हत्याकांड के गवाह उमेश पाल समेत अन्य कई लोगों ने अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया था।
















