प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को उत्तर प्रदेश के मेरठ में मेरठ मेट्रो और नमो भारत ट्रेन (RRTS) की सेवाओं का उद्घाटन किया। उन्होंने शताब्दी नगर नमो भारत स्टेशन से इन दोनों का हरी झंडी दिखाई। इसके साथ ही उ साथ ही, करीब 12,930 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण भी किया। ये दोनों सिस्टम एक ही इंफ्रास्ट्रक्चर पर चलते हैं, जो भारत में पहली बार हुआ है।
देश की सबसे तेज मेट्रो
मेरठ मेट्रो मेरठ साउथ से मोदीनगर (मोदीपुरम) तक 21 किलोमीटर के कॉरिडोर पर चलती है, जिसमें 12 स्टेशन हैं। इसकी अधिकतम स्पीड करीब 120 किमी/घंटा है, जो इसे भारत की सबसे तेज मेट्रो बनाती है। पूरा 21 किमी का रूट, सभी स्टॉप्स के साथ, लगभग 30 मिनट में पूरा हो जाता है।
ट्रेनें तीन कोच वाली हैं, पूरी तरह एयर-कंडीशन्ड, हल्के स्टेनलेस स्टील से बनी हुईं। इनका रंग ग्रीन, ब्लू और ऑरेंज है। हर ट्रेन में 700 से ज्यादा पैसेंजर बैठ सकते हैं, जिसमें 173 सीटें हैं। महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए आरक्षित सीटें भी हैं। ट्रेनों में एनर्जी एफिशिएंट सिस्टम, रिजेनरेटिव ब्रेकिंग, CCTV, USB पोर्ट और आधुनिक ऑटोमेशन जैसी सुविधाएं हैं। उद्घाटन के बाद पीएम मोदी खुद मेट्रो से मेरठ साउथ स्टेशन तक राइड भी किए।
नमो भारत ट्रेन (RRTS)
नमो भारत RRTS का पूरा 82 किमी का दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर अब क्रियाशील हो गया है। इसमें दिल्ली में 14 किमी (9 किमी एलिवेटेड, 5 किमी अंडरग्राउंड) और उत्तर प्रदेश में 68 किमी (61 किमी एलिवेटेड, 7 किमी अंडरग्राउंड) है। ट्रेनों की डिजाइन स्पीड 180 किमी/घंटा तक है, और ये दिल्ली से मेरठ के बीच 1 घंटे से कम समय में पहुंचाती हैं। उदाहरण के लिए, सराय काले खान से मोदीपुरम तक करीब 58 मिनट, बेगमपुल तक 54 मिनट और शताब्दी नगर तक 50 मिनट लगते हैं।
इस कॉरिडोर से दिल्ली को सहिबाबाद, गाजियाबाद, मोदीनगर और मेरठ से तेज कनेक्टिविटी मिलती है। सराय काले खान स्टेशन एक मल्टी-मॉडल हब है, जो हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन, दिल्ली मेट्रो की पिंक लाइन, ISBT और रिंग रोड से जुड़ा है। मेरठ में शताब्दी नगर, बेगमपुल और मोदीपुरम जैसे स्टेशन अब चालू हो गए हैं।
रोड ट्रैफिक होगा कम
ये प्रोजेक्ट्स इंटरसिटी और इंट्रासिटी ट्रैवल को बहुत तेज और आसान बनाते हैं। रोड ट्रैफिक कम होगा, वाहनों से होने वाला CO2 उत्सर्जन घटेगा। दोनों सिस्टम एक साथ चलने से लोगों को बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट मिलेगा, जो मॉडर्न, सीमलेस और सस्टेनेबल है। इससे दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी यूपी में लोगों की जिंदगी आसान होगी, काम-धंधे और रोजमर्रा की आवाजाही बेहतर बनेगी।

















