भारत एक कृषि प्रधान देश है और यहां की आधी से अधिक आबादी आज भी खेती-किसानी पर निर्भर है। किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने और उनकी आय बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार कई योजनाएं चला रही है। इन्हीं में से एक प्रमुख योजना है प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना। इस योजना के तहत पात्र किसानों को हर वर्ष 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है, जो तीन समान किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाती है। प्रत्येक चार महीने में किसानों को 2,000 रुपये की एक किस्त मिलती है।
इस समय देशभर के करोड़ों किसान 22वीं किस्त का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, पिछली किस्त की तरह इस बार भी कई किसानों की राशि अटक सकती है। पिछली 21वीं किस्त में लाखों किसानों को भुगतान नहीं मिल सका था, जिसका मुख्य कारण अधूरी जानकारी, गलत दस्तावेज, e-KYC न होना और बैंक से जुड़ी समस्याएं थीं। यदि किसानों ने समय रहते जरूरी नियमों का पालन नहीं किया, तो 22वीं किस्त भी रुक सकती है।
जमीन और भूमि रिकॉर्ड से जुड़ी शर्त- इस योजना की सबसे अहम शर्त जमीन से संबंधित है। केवल वही किसान इस योजना के पात्र होते हैं, जिनके नाम पर कृषि योग्य भूमि दर्ज हो। जो लोग किराये या बटाई पर खेती करते हैं, लेकिन जिनके नाम पर जमीन नहीं है, वे इस योजना का लाभ नहीं ले सकते। सरकार राज्य सरकारों के भूमि रिकॉर्ड से किसानों का डेटा मिलान करती है। यदि जमीन का रिकॉर्ड अपडेट नहीं है या उसमें कोई त्रुटि है, तो किस्त रुक सकती है। कई राज्यों में फार्मर आईडी भी अनिवार्य कर दी गई है।
e-KYC और बैंक विवरण जरूरी- इसके अलावा e-KYC कराना अनिवार्य है। जिन किसानों ने अब तक e-KYC नहीं कराई है, उनकी राशि रोकी जा सकती है। किसान मोबाइल या कंप्यूटर से ऑनलाइन OTP के माध्यम से e-KYC कर सकते हैं या नजदीकी CSC सेंटर जाकर बायोमेट्रिक सत्यापन करा सकते हैं। बैंक खाते का आधार से लिंक होना और NPCI मैपिंग अपडेट होना भी जरूरी है। यदि बैंक खाते में कोई गलती है, जैसे नाम, जन्मतिथि या अकाउंट नंबर में त्रुटि, तो भुगतान अटक सकता है। फिलहाल 22वीं किस्त की आधिकारिक तारीख घोषित नहीं हुई है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह राशि होली से पहले किसानों के खाते में भेजी जा सकती है। इसलिए किसानों को चाहिए कि वे समय रहते सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर लें, ताकि उनकी किस्त बिना किसी रुकावट के समय पर मिल सके।














