RSS को सत्ता की चाह नहीं, लक्ष्य है हिंदू समाज को एकजुट करना: मोहन भागवत
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RSS को सत्ता की चाह नहीं, लक्ष्य है हिंदू समाज को एकजुट करना: मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने मेरठ के माधव कुंज में खिलाड़ियों से संवाद में कहा कि संघ किसी वर्ग के विरोध या सत्ता के लालच के लिए नहीं बना, बल्कि हिंदू समाज को एकजुट करने का उद्देश्य है।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Feb 21, 2026, 10:51 am IST
in उत्तर प्रदेश
RSS Chief Mohan Bhagwat

‘राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ किसी वर्ग के विशेष विरोध, किसी से स्पर्धा के लिए नहीं बना और संघ को किसी प्रकार की सत्ता का लालच भी नहीं है। संघ का मूल उद्देश्य समस्त हिन्दू समाज को एकत्र करना है।’ ये बात राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने माधव कुंज शताब्दी नगर मेरठ व बृज प्रान्त के राष्ट्रीय व अन्तरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के साथ संवाद के दौरान कही।

उन्होंने कहा कि संघ की 100 वर्षों की इस यात्रा को लेकर बात करते हुए कहा कि आज स्थिति यह है कि संघ को लेकर कौतुहल है। लेकिन अगर संघ को समझना है तो उसके अंदर आना पड़ेगा। इसके लिए समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता है।

विविधता में एकता

सरसंघचालक जी कहते हैं कि लोग अक्सर “विविधता में एकता” कहते हैं, लेकिन असल में हमारी संस्कृति “एकता की विविधता” की बात करती है। मतलब, एक ही मूल भावना, एक ही संस्कृति के तहत अलग-अलग रूप, भाषाएं, रीति-रिवाज, परंपराएं सब मौजूद हैं, लेकिन सब एक सूत्र में बंधे हुए हैं। यह कोई जबरदस्ती की एकता नहीं है, बल्कि स्वाभाविक रूप से बनी हुई एकजुटता है। उन्होंने कहा कि भारत की यह विशेषता बहुत पुरानी है और यही वजह है कि हजारों सालों से हमारा देश एक साथ खड़ा रहा है।

इसे भी पढ़ें: सितारा बनीं सीता: खंडवा की मुस्लिम किन्नर गुरु ने अपनाया सनातन धर्म, ढोल-नगाड़ों से हुआ स्वागत 

खेल और संस्कृति का गहरा नाता

उन्होंने कहा कि खेल और संस्कृति दोनों आपस में जुड़े हुए हैं। उनका मानना है कि खेल सिर्फ शारीरिक मजबूती नहीं लाता, बल्कि टीम स्पिरिट, अनुशासन और आपसी समझ बढ़ाता है। ये सब वैसा ही है जैसा हमारी संस्कृति सिखाती है। अलग-अलग पृष्ठभूमि के खिलाड़ी एक टीम बनकर खेलते हैं, जीत-हार साथ झेलते हैं, यही विविधता में एकता का जीता-जागता उदाहरण है। उन्होंने खिलाड़ियों को प्रोत्साहित किया कि मैदान पर जो एकजुटता दिखाते हो, वही भावना समाज और देश के लिए भी अपनाओ।

हिंदू संस्कृति और भारत की एकता

डॉ. भागवत जी ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत की भावनात्मक एकता और विविधता का सम्मान करने की जड़ में हिंदू संस्कृति ही है। हिंदू संस्कृति हर तरह के विचार, मत, भाषा और परंपरा को जगह देती है, लेकिन सबको एक बड़े परिवार की तरह जोड़ती है। उन्होंने कहा कि यही वजह है कि भारत में इतनी सारी भाषाएं, धर्म, जातियां, रीति-रिवाज होने के बावजूद हम एक राष्ट्र के रूप में मजबूती से खड़े हैं। कोई जबरदस्ती या दबाव नहीं, बल्कि दिल से स्वीकार करने वाली भावना है।

इस मौके पर सरसंघचालक जी ने युवा खिलाड़ियों से एक खास अपील की। उन्होंने कहा कि आप सभी देश के लिए खेल रहे हैं। लेकिन आपको ये याद रखना चाहिए कि खेल सिर्फ ट्रॉफी को जीतना ही नहीं है, वरन यह अपनी संस्कृति को मजबूत करने का एक माध्यम भी है। सरसंघचालक जी कहते हैं कि जब अलग-अलग राज्य, अलग-अलग भाषा बोलने वाले खिलाड़ी जब एक टीम बनते हैं, तो यही हमारी संस्कृति की ताकत दिखती है।

Topics: खेल और संस्कृतिMohan Bhagwat MeerutRSS SarsanghchalakMadhav Kunj dialogueRSS सरसंघचालकdiversity of unityसंघ 100 वर्षsports and cultureRSS 100 YearsHindu society unityमोहन भागवत मेरठमाधव कुंज संवादहिंदू समाज एकजुटताएकता की विविधता
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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