देहरादून आईएमए भूमि विवाद: महमूद मदनी के ट्रस्ट ने 20 एकड़ कृषि भूमि प्लॉट में बेची, धामी सरकार ने शुरू की जांच
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देहरादून आईएमए भूमि विवाद: महमूद मदनी के ट्रस्ट ने 20 एकड़ कृषि भूमि प्लॉट में बेची, धामी सरकार ने शुरू की जांच

देहरादून में आईएमए के पास शेखुल हिंद एजुकेशन चेरिटेबल ट्रस्ट की 20 एकड़ कृषि भूमि अवैध प्लॉटिंग और बिक्री का मामला गरमाया। महमूद मदनी पर डेमोग्राफी चेंज के आरोप, सीएम धामी ने जांच के आदेश दिए।

Written byउत्तराखंड ब्यूरोउत्तराखंड ब्यूरो — edited by कुलदीप सिंह
Feb 19, 2026, 10:44 am IST
inउत्तराखंड
Uttarakhand

पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड

देहरादून: भारतीय सैन्य अकादमी यानि आईएमए की सुरक्षा को ताक में रख कर इस्लामिक शिक्षण संस्थान ट्रस्ट की सौ बीघा से अधिक भूमि को खुर्द बुर्द किए जाने का मामला उत्तराखंड में सुर्खियों में है, राज्य की धामी सरकार इस मामले में सख्त हो चुकी है और इस पर कोई बड़ा फैसला ले सकती है। बताया जा रहा है देहरादून जिला प्रशासन इस मामले में जांच पड़ताल के बाद एफआईआर दर्ज करने जा रहा है।

क्या है पूरा मामला 

ये भूमि प्रकरण शेखुल हिंद एजुकेशन चेरिटेबल ट्रस्ट से जुड़ा है। इस ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ महमूद  मदनी है। जो कि दारुल उलूम देवबंद और जमीयत उलेमा ए हिंद के कर्ताधर्ता है। जानकारी के मुताबिक, उत्तराखंड की नारायण दत्त तिवारी की कांग्रेस सरकार ने उक्त ट्रस्ट जिसका पता 1 बहादुर शाह जफर मार्ग दिल्ली बताया गया है ,उक्त ट्रस्ट को भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून के पास इस्लामिक शिक्षण संस्थान खोले जाने की प्रारंभिक अनुमति दी थी।

मदनी का है ये ट्रस्ट

कहा जाता है कि मदनी का ये ट्रस्ट, यहां देवबंद दारुल उलूम की तरह विशाल मदरसा अथवा मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनाने जा रहा था, जिसके लिए ट्रस्ट द्वारा 20 एकड़ भूमि ग्राम हरियावाला धौलास पछुवा दून परगना विकासनगर देहरादून में धारित भूमि किसानों से ली गई थी और साथ ही कुछ और ग्राम समाज और वन विभाग की सरकारी विभागों की भूमि पर भी कथित रूप से कब्जा किया गया था।
इंडियन मिलिट्री एकेडमी (आईएमए) को जब यहां मदनी के ट्रस्ट के  इस्लामिक शिक्षण संस्थान खोले जाने के प्रयासों की जानकारी मिली तो उनके द्वारा उत्तराखंड की  तिवारी सरकार के समक्ष आपत्ति दर्ज की गई। जिसके बाद इस योजना पर कई माहों तक ठंडे बस्ते में पड़ी रही। कांग्रेस सरकार के बाद आई बीजेपी सरकार के समय ये मामला एक किनारे में पड़ा रहा उसके बाद जब पुनः कांग्रेस की सरकार आई तो एक बार फिर से यहां इस्लामिक शिक्षण संस्थान खोले जाने के लिए हलचल तेज हुई।

इसे भी पढ़ें: चंपावत में ‘सरस कॉर्बेट महोत्सव 2026’ की धूम! CM धामी ने किए बड़े ऐलान, मां पूर्णागिरी के भक्तों को बड़ा उपहार

ट्रस्ट के अध्यक्ष महमूद मदनी द्वारा मामला उत्तराखंड उच्च न्यायालय में ले जाया गया जो कि कई माहों तक चला जहां उन्हें कोई राहत नहीं मिली और इसके पीछे सबसे बड़ी वजह आईएमए की आपत्ति रही थी। हाई कोर्ट ने इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य सरकार को और ट्रस्ट को दिनांक ये निर्देश दिए थे कि उक्त भूमि का लैंड यूज़ चेंज नहीं किया जाएगा और ये कृषि भूमि ही रहेगी और यदि बेची जाएगी तो भी कृषि भूमि ही रहेगी और इससे जो पैसा आयेगा वो भी ट्रस्ट में सामाजिक कार्यों में लगाया जाएगा। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट लिखा था कि भारतीय सैन्य अकादमी की आपत्ति है और इस आधार पर गृह विभाग ने इसकी अनुमति निरस्त की है।

आईएमए है संवेदनशील

दरअसल इस निर्देश के पीछे तर्क ये दिया गया था कि आई एम ए एक संवेदनशील स्थान है आंतरिक सुरक्षा की दृष्टि से इसके कैंपस के आसपास न तो आबादी की बसावट की जानी चाहिए और न ही व्यापारिक गतिविधियां यहां से संचालित होनी चाहिए। गौरतलब बात ये है ट्रस्ट की ओर से हाई कोर्ट में दी गई याचिका संख्या 1918( एम एस)/2007 ट्रस्ट बनाम राज्य व अन्य के निर्देशों के बाद राज्य सरकार के राजस्व विभाग के अपर सचिव जे पी जोशी ने 19जुलाई 2016 को डीएम देहरादून को पत्र लिख कर कहा कि हाईकोर्ट के द्वारा पारित आदेश 8/6/2010 के अनुपालन में शासनादेश 150/राजस्व/2004/15/3/2004 के संदर्भ में उक्त  कृषि भूमि को अकृषि नहीं किया जाएगा।

रईस अहमद को दी थी पॉवर ऑफ अटार्नी

ये जानकारी मिली है कि ट्रस्ट ने देहरादून स्थित रईस अहमद नाम के व्यक्ति को पावर ऑफ अटॉर्नी दी हुई थी अब उक्त  करीब सौ बीघा भूमि पर मुस्लिम बस्ती बसाने के लिए सड़क डाल कर और बिजली के खंभे खड़े करके प्लॉटिंग कर दी गई और पहले ये भूमि अपने मुस्लिम रिश्तेदारों में बेची गई जिन्होंने आगे कुछ हिंदू परिवारों को बिना सच्चाई बताए बेच दी। जानकारी के मुताबिक, हरियाला वाला कि प्रधान रही रजनी देवी ने इस मामले की शिकायत जिला प्रशासन के समक्ष 2016 में कई बार लिखित रूप में भी दर्ज करवाई गई थी। उस समय तो प्रशासनिक दबाव में ये प्रकरण ठंडे बस्ते में पड़ा था अब ये मामला जैसे ही सुर्खियों में आया तो इसके सच्चाई की परतें खुलने लगी।

उत्तराखंड के किसानों से ली गई थी जमीन

जानकारी के मुताबिक, यहां ट्रस्ट द्वारा इस्लामिक शिक्षण संस्थान खोले जाने के उद्देश्य से वीर सिंह पुंडीर,मंगत राम,कला चंद, हितेंद्र नारायण,महेंद्र सिंह, रणबीर सिंह, लक्ष्मी थापा, कुंती देवी, विक्रम सिंह, बीना ठाकुर, चरण सिंह, सत्येंद्र कुमार, बलवीर सिंह, मदन सिंह, भगवान सिंह, आलोक कुमार, मनजीत सिंह, संदीप कुमार, धर्म सिंह, गुलाब सिंह, रतन देई, जोगेंद्र सिंह आदि से करीब 104 बीघा कृषि भूमि ली गई थी।

पहले इन मुस्लिमों के नाम हो चुकी है रजिस्ट्री

ट्रस्ट द्वारा रईस अहमद को पावर आफ एटर्नी देकर मुस्लिम समुदाय को भूमि बेची जा रही है।अब तक मंजर आलम, शहजाद अली, आसिफ, ताहिर खान, अमजद अली, मोहम्मद तारिक,साहिल अहमद, मोहम्मद इरशाद, शहजाद अली, सलीम अहमद,नवाब नसीम, मोहम्मद शोएब आदि के नाम भूमि बिक्री के बाद दाखिल खारिज भी हो चुका है। भू दस्तावेजों को देख कर सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है  इसके पीछे दारुल उलूम, जमीयत उलेमा ए हिंद या महमूद मदनी का शेखुल हिंद एजुकेशन चेरिटेबल ट्रस्ट की कोई योजना काम कर रही है? जिसने योजनाबद्ध तरीके से ट्रस्ट की भूमि को खुर्दबुर्द किया। विधि जानकार बताते है कि ट्रस्ट के अपने प्रबंधन नियम होते है, भूमि बेचने से पहले क्या उनका पालन किया गया ? इस बारे में देहरादून जिले का प्रशासन जांच पड़ताल कर रहा है।

इस बारे में स्थानीय ग्राम सभा के प्रतिनिधियों द्वारा भी जिला प्रशासन को कई शिकायती पत्र भी दिए गए। जानकारी ये भी मिली है कि ट्रस्ट द्वारा हाल ही में कुछ भूमि हिंदुओं को भी बेची गई और भूमि बेचते वक्त हाई कोर्ट द्वारा जारी निर्देशों के तथ्यों को छुपाया गया जिनमें आई एम ए की आपत्ति भी शामिल है।

मुस्लिम यूनिवर्सिटी पर कांग्रेस-बीजेपी आमने-सामने

2022 के विधान सभा चुनावों के दौरान बीजेपी ने कांग्रेस पर देवभूमि उत्तराखंड में मुस्लिम यूनिवर्सिटी खोले जाने पर सवाल उठाए थे और ये मुद्दा सुर्खियों में रहा और जनमानस में गहराया रहा, आज भी कांग्रेस नेता इस पर सफाई देते रहते है लेकिन शेखुल हिंद एजुकेशन चेरिटेबल ट्रस्ट द्वारा इस्लामिक शिक्षण संस्थान के लिए खरीदी गई हिंदू किसानों की भूमि इस बात का प्रमाण था कि इस्लामिक धार्मिक नेता डॉ महमूद मदनी और कांग्रेस सरकार के बीच कुछ न कुछ तो इस पर सहमति थी जिसे भारतीय सैन्य अकादमी प्रबंधन ने आगे बात बढ़ने नहीं दी। उस समय कांग्रेस नेता अकील अहमद ने ये बयान दिया था कि कांग्रेस सरकार आई तो वो मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनाएगी।  अब ये मुद्दा प्रमाणिक तौर पर जाहिर हो जाने से कांग्रेस के नेताओं के लिए मुसीबत बनता जा रहा है।

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस को कटघरे में खड़ा करते हुए ये सवाल पूछा है कि वे देवभूमि उत्तराखंड का सांस्कृतिक स्वरूप क्यों बिगाड़ने चाहती है। यहां की डेमोग्राफी चेंज क्यों करना चाहती है? जबकि ये मामला आई एम ए की सुरक्षा से जुड़ा भी है।
बीजेपी के प्रवक्ता और धर्मपुर देहरादून से विधायक विनोद चमोली ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया है उन्होंने कहा कि एन डी तिवारी हो या हरीश रावत की सरकार सबने यहां मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनाए जाने के प्रयास किए।

भूमि प्रकरण पर क्या कहते हैं सीएम धामी 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है सहसपुर देहरादून में मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनाए जाने की कांग्रेस ने घोषणा की थी जब पिछले चुनाव में हमने ये विषय उठाया था तब कांग्रेस ने खंडन किया था अब प्रमाण के साथ ये विषय सामने आ गया है। शेकुल एजुकेशनल चेरिटेबल सोसाइटी के अध्यक्ष महमूद  मदनी है और वे यहां देवबंद की तरह इस्लामिक शिक्षण संस्थान या मुस्लिम यूनिवर्सिटी खोलने के प्रयासों में थे जिसे कांग्रेस सरकार ने समर्थन और संरक्षण दिया।
श्री धामी कहते है कि हमने इस प्रकरण पर देहरादून जिलाधिकारी को जांच के आदेश दे दिए है, हाई कोर्ट ने क्या निर्देश दिए है उनका अनुपालन कराया जायेगा।

श्री धामी ये भी कहते हैं कि महमूद मदनी ने हल्द्वानी बनभूलपुरा में हिंसा करने वालों  को संरक्षण दिया, सरकारी  भूमि पर कब्जा करने वाले अब्दुल मलिक को अवैध मदरसा बनाने में मदद की थी।सीएम धामी ने आरोप लगाया कि  मदनी उत्तराखंड में डेमोग्राफी चेंज कराने के लिए घुसपैठियों को अपनी संस्थाओं के जरिए संरक्षण भी प्रदान करते है। इन सभी पहलुओं पर सरकार जांच कर रही है।

कांग्रेस का बयान

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा है कांग्रेस सरकार के समय इस स्थान पर इस्लामिक शिक्षण संस्थान खोले जाने की अनुमति नहीं दी गई थी क्योंकि आई एम ए की आपत्ति थी।अब भूमि को जब बेचा जा रहा है तो सरकार बीजेपी की है।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बीजेपी को नसीहत दी है कि वो मुस्लिम यूनिवर्सिटी का ताबीज बना कर पहन ले।

इन विषयों पर जांच है केंद्रित

मदनी के शेखुल एजुकेशनल चेरिटेबल ट्रस्ट ने अपनी भूमि खुर्दबुर्द करने में क्या तथ्यों को छुपाया ? इस्लामिक शिक्षण संस्था ( मुस्लिम यूनिवर्सिटी) के लिए ट्रस्ट बना था, उक्त ट्रस्ट की नियमावली का क्या उलंघन हुआ क्योंकि चेरिटेबल ट्रस्ट की बेची नहीं जा सकती यदि बेची गई तो उसके लिए ट्रस्टियों की बोर्ड बैठक में सहमति जरूरी होती है और वो हर डीड में लगाई जानी जरूरी है। चेरिटेबल ट्रस्ट नो प्रोफेट नो लॉस पर चलते है क्या इसमें फायदा का लेनदेन भी हुआ ? मदनी के ट्रस्ट ने जिसे पावर ऑफ अटॉर्नी दी वो किन शर्तों पर दी? ये स्पष्ट नहीं है। क्या भूमि बिक्री में फायदे के ये विषय आयकर और ई डी के कार्यक्षेत्र में भी आते हैं।

Topics: महमूद मदनी ट्रस्टशेखुल हिंद एजुकेशन चेरिटेबल ट्रस्टमुस्लिम यूनिवर्सिटी उत्तराखंडधामी सरकार जांचआईएमए सुरक्षा खतराDehradun IMA land disputeMahmood Madani TrustSheikhul Hind Education Charitable TrustDemographic ChangeMuslim University Uttarakhandडेमोग्राफी चेंजDhami government probeदेहरादून आईएमए भूमि विवादIMA security threat
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