अजमेर दरगाह के शिव मंदिर होने के मामले में चल रहे विवाद के मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष कोर्ट ने इस मामले को प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट से अलग मानते हुए इस मामले पर सुनवाई करने से इंकार कर दिया है। साथ ही सिविल अदालत में चल रही इसकी सुनवाई पर रोक लगाने से साफ इंकार कर दिया है।
क्या है पूरा मामला
मामला कुछ यूं है कि सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। इसी मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने याचिकाकर्ता को कहा कि आप इस मामले में पक्षकार तो हैं ही नहीं, तो आप किस अधिकार से इसमें हस्तक्षेप कर रहे हैं। कोर्ट ने याचिका को अयोग्य करार दे दिया। कोर्ट का कहना था कि चूंकि ये मामला प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट के दायरे में नहीं आता है, इसलिए सिविल कोर्ट में सुनवाई जारी रहेगी।
कर्नाटक के मुस्लिम व्यक्ति ने दायर की थी याचिका
गौरतलब है कि ये बड़ी हैरानी की बात है कि ये मामला संबंधित है राजस्थान की अजमेर दरगाह का। लेकिन इस मामले में याचिका दायर करने वाला व्यक्ति कर्नाटक का इमरान ए है। उसने अपनी याचिका में कहा था कि 12 दिसंबर 2024 को उच्चतम न्यायालय ने देश भर में धार्मिक स्थलों को लेकर नए मुकदमे दर्ज करने पर रोक लगा दी थी। सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने ये भी साफ किया कि वह प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर जल्द ही सुनवाई करेगा। प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट के मामले पर सुनवाई अप्रैल के बाद हो सकती है।
इसे भी पढ़ें: AI Impact Expo: वैश्विक नेताओं की मौजूदगी को देखते हुए कड़े सुरक्षा प्रतिबंध
प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करेगा कोर्ट
इस मामले पर सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट को चुनौती देते हुए कई याचिकाओं पर सुनवाई करने की बात कही है। इन याचिकाओं में कहा गया है कि ये कानून हिन्दू, जैन, सिख और बौद्ध समुदाय को अपने अधिकार से वंचित करता है। किसी भी मसले को कोर्ट तक लेकर आना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।














