इन दिनों पूरे हिमाचल प्रदेश में शिमला आइस स्केटिंग रिंक की चर्चा हो रही है। शिमला की चियोग पंचायत में स्थानीय ग्रामीणों ने मिलकर बिना सरकारी सहायता के एक शानदार आइस स्केटिंग रिंक तैयार कर दिया है। बता दें कि खास बात यह है कि पिछले कई वर्षों से हिमाचल प्रदेश सरकार इस तरह की सुविधा देने का वादा कर रही थी, लेकिन जब काम आगे नहीं बढ़ा तो ग्रामीणों ने खुद ही जिम्मेदारी उठा ली।
आज यहां 84 बच्चे नियमित रूप से स्केटिंग की ट्रेनिंग ले रहे हैं और यह रिंक पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गया है।
ग्रामीणों की मेहनत से तैयार हुआ इंटरनेशनल स्टैंडर्ड रिंक
बता दें कि चियोग के लोगों ने यह पहल बच्चों के खेल के प्रति जुनून को देखते हुए शुरू की जिसके बाद स्थानीय लोगों ने अपने देवता सोगू की भूमि पर पहाड़ी को समतल कर 30×60 मीटर का इंटरनेशनल स्टैंडर्ड आइस रिंक तैयार किया। स्थानीय लोगों ने आपस में धन एकत्र कर इस ग्रामीण खेल पहल को सफल बनाया है।
अब वहां सुबह 6 बजे से ही बच्चे अभ्यास के लिए पहुंच जाते हैं। यहां स्केटिंग क्लास सुबह 7 से 10 बजे और शाम 4 से 6 बजे तक संचालित होती है।
चियोग बना बच्चों के सपनों का नया केंद्र
आपको बताते चलें कि चियोग पंचायत का यह रिंक अब सिर्फ एक खेल मैदान नहीं, बल्कि बच्चों के सपनों का मंच बन चुका है। यहां कई बच्चे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने की तैयारी कर रहे हैं।
इस साल 14 बच्चों ने ओपन नेशनल चैंपियनशिप में भाग लिया, जबकि 6 बच्चे खेलो इंडिया में अपनी प्रतिभा दिखा चुके हैं। वहीं 8 वर्षीय रुद्रवीर गांगटा ने एशियन चैम्पियनशिप में मेडल जीतकर पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित किया है।
रुद्रवीर गांगटा की प्रेरक सफलता
बता दें कि रुद्रवीर गांगटा पिछले एक साल से चियोग रिंक में प्रशिक्षण ले रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं। इसके अलावा एशियन चैम्पियनशिप में भी ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया।
उनकी उपलब्धियां यह साबित करती हैं कि यदि सही प्रशिक्षण और मार्गदर्शन मिले तो ग्रामीण पृष्ठभूमि के बच्चे भी बड़े मंच पर चमक सकते हैं।
स्थानीय युवाओं का बढ़ता उत्साह
वहीं चियोग निवासी शुभम ठाकुर दो साल से स्केटिंग कर रहे हैं और ‘खेलो इंडिया’ समेत राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग ले चुके हैं। इसके अलावा नोर्विन जैसे अन्य बच्चे भी कोच प्रदीप कंवर से प्रशिक्षण लेकर आगे बढ़ रहे हैं। आज 84 बच्चे रोजाना नियमित प्रशिक्षण ले रहे हैं, जो इस प्रयास की सफलता को दर्शाता है।
कोचों की भूमिका और नियमित प्रशिक्षण
कोच रविंद्र वर्मा की माने तो, दिसंबर से नियमित प्रशिक्षण सत्र चल रहे हैं। सुबह आइस स्केटिंग अभ्यास और शाम को फिटनेस के लिए ऑफ-आइस एक्सरसाइज कराई जाती है। यह संतुलित प्रशिक्षण बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में अहम भूमिका निभा रहा है।
सीमित संसाधनों में बड़ी उपलब्धि
हिमाचल प्रदेश में खेल विकास की दिशा में चियोग का यह प्रयास एक मिसाल बन गया है। यह ग्रामीणों की यह सफलता दिखाती है कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती। सामूहिक प्रयास, समर्पण और बच्चों के सपनों के प्रति प्रतिबद्धता से किसी भी गांव को खेलों का केंद्र बनाया जा सकता है।
बरहाल चियोग का यह आइस स्केटिंग रिंक अब पूरे देश के लिए प्रेरणा बन चुका है, जहां मेहनत और लगन से सपनों को नई उड़ान मिल रही है।











