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विवाह पूर्व शारीरिक संबंध: जानिए क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस नागरत्ना ने कहा: "शादी से पहले लड़का-लड़की अजनबी होते हैं, फिजिकल रिलेशन में सावधानी बरतें।" दुबई के फॉल्स प्रॉमिस केस में पुरानी सोच वाली टिप्पणी, मीडिएशन का सुझाव।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा — edited by कुलदीप सिंह
Feb 17, 2026, 10:03 am IST
in भारत
supreme court

सुप्रीम कोर्ट

यह शिकायत और मामले अब आम हो गए हैं, जिनमें महिलाएं यह शिकायत करती हैं कि पुरुष ने शादी का झांसा देकर संबंध बना लिए और ऐसे मामलों की सुनवाई में बहुधा अत्यंत महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ न्यायालय से आती हैं। ऐसी ही एक महत्वपूर्ण टिप्पणी अभी हाल ही में न्यायालय ने की।

क्या था मामला?

मामला था एक ऐसे आदमी की जमानत पर सुनवाई का, जिस पर यह आरोप लगा था कि उसने एक महिला के साथ इस आधार पर शारीरिक संबंध बनाए कि वह उससे शादी करेगा और फिर उसने शादी नहीं की। और वह पहले से शादी शुदा भी था। इस पर जस्टिस नागरत्ना ने टिप्पणी की कि ““शायद हम पुराने ख्यालों वाले हैं लेकिन शादी से पहले लड़का और लड़की एक-दूसरे के लिए अजनबी होते हैं। उनके रिश्ते में चाहे जो भी अच्छा-बुरा हो। हम यह समझने में नाकाम रहते हैं कि वे शादी से पहले फिजिकल रिलेशनशिप में कैसे शामिल हो सकते हैं। शायद हम पुराने ख्यालों वाले हैं…आपको बहुत सावधान रहना चाहिए, शादी से पहले किसी पर भी विश्वास नहीं करना चाहिए।“

लाइव लॉ के अनुसार शिकायत करने वाली महिला ने दावा किया था कि आरोपी पुरुष के कहने पर वह दुबई गई, जहाँ उसने कथित तौर पर शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और उसकी सहमति के बिना उनके आपसी पलों के वीडियो भी रिकार्ड कर लिए थे और उसके बाद और विरोध करने पर उन्हें फैलाने की धमकी दी।

इसे भी पढ़ें: भारत दौरे पर आ रहे फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, PM मोदी मुंबई में करेंगे मेजबानी

आगे लिखा है कि शिकायत करने वाली महिला को बाद में पता चला कि उसने 19 जनवरी, 2024 को पंजाब में दूसरी शादी कर ली थी। इस पुरुष की जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान, जस्टिस नागरत्ना ने सवाल किया कि शिकायत करने वाली महिला याचिकाकर्ता से मिलने दुबई क्यों गई। जब सरकारी वकील ने बताया कि दोनों एक मैट्रिमोनियल वेबसाइट पर मिले थे और शादी करने की योजना बना रहे थे तो जज ने कहा कि अगर महिला शादी को लेकर इतनी पक्की थी, तो उसे शादी से पहले यह सब नहीं करना था।

विवाह पूर्व लोग अजनबी रहते हैं

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण टिप्पणी यही है कि विवाह से पूर्व लोग अजनबी ही रहते हैं, ऐसे में इतना विश्वास कि वह शारीरिक संबंध बना ले, अविश्वनीय है। माननीय न्यायालय कई बार ऐसे मामलों में ऐसी टिप्पणियाँ कर चुका है, जिनमें विवाह पूर्व आपसी सहमति से बनाए गए संबंधों को इस आधार पर गलत ठहराया है कि इनके बिगड़ने पर पुरुष को कठघरे में खड़ा कर दिया जाता है। बार-बार न्यायालय ने यह टिप्पणियाँ की हैं कि जब मामला आपसी सहमति से आरंभ हुआ हो और बाद में खराब हो गया हो। तो उसे कानून का दुरुपयोग करते हुए बलात्कार का मामला नहीं बनाना चाहिए।

और इस मामले में तो न्यायालय की स्पष्ट टिप्पणी है कि यदि महिला इस बात को लेकर इतनी ही कठोर थी कि उसे शादी करनी है, तो उसे दुबई जाना ही नहीं चाहिए था। न्यायालय ने कहा कि हम उन्हें मध्यस्थता के लिए भेजेंगे। जिन मामलों में आपसी सहमति से शारीरिक संबंध बने हों, उन मामलों पर अदालत में मुकदमे नहीं चलाने चाहिए। हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय में भी ऐसी ही टिप्पणी की थी कि अगर दो वयस्क, चाहे उनमें से एक शादीशुदा ही क्यों न हो, आपसी सहमति से साथ रहते हैं या शारीरिक संबंध बनाते हैं, तो उन्हें उसके परिणाम की जिम्मेदारी भी स्वीकार करनी होगी।

रिश्ते खराब होने पर दुष्कर्ष का केस सही नहीं

इसमें भी एक पुरुष के खिलाफ दुष्कर्म के मामले को रद्द कर दिया गया था। न्यायमूर्ति स्वर्णा कांता शर्मा ने 10 सितंबर को दिए गए फैसले में कहा कि रिश्ता खराब होने के बाद उसे दुष्कर्म जैसे अपराध में बदलना ठीक नहीं है। ऐसा ही एक मामला मुंबई से भी आया था, जब एक व्यक्ति पर शादी का झांसा देकर बलात्कार का आरोप एक ऐसी महिला ने लगाया था, जिसने अपने पति से मेन्टीनेंस के केस के दौरान वकील के साथ संबंध बनाए थे।  महिला ने पहले अपने पति पर मेन्टीनेंस का केस किया था और इसी दौरान उसकी मुलाकात अपीलकर्ता वकील से हुई। दोनों के बीच साल 2022 से मई 2024 तक संबंध थे। दोनों के बीच नजदीकियां भी बढ़ीं। इसी बीच जब अपीलकर्ता ने शादी की बात कही तब महिला ने अपने पिछले वैवाहिक विवाद के कारण शुरू में वकील के प्रस्ताव को मना कर दिया था।

अपीलकर्ता ने कहा था कि महिला ने उससे ₹1.5 लाख मांगे थे। पैसे देने से मना करने पर ही उसने उसके खिलाफ रेप का मामला दर्ज कराया। वकील ने यह भी कहा कि तीन साल के रिश्ते में महिला ने कभी किसी तरह के यौन उत्पीड़न की शिकायत नहीं की थी। इस पर सर्वोच्च न्यायालय ने यह टिप्पणी की थी कि “हमें लगता है कि यह ऐसा मामला नहीं है जिसमें अपीलकर्ता ने शिकायतकर्ता को सिर्फ शारीरिक संबंधों के लिए फुसलाया और फिर गायब हो गया। यह रिश्ता तीन साल तक चला, जो काफी लंबा समय है।“

16 फरवरी को आई एक ताजे मामले की टिप्पणियाँ भी बहुत कुछ कहती हैं। यह कानून के गलत इस्तेमाल की बात तो है ही, साथ ही उन मूल्यों की भी बात है जो लुप्त होते जा रहे हैं।

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