RSS के 100 साल :  ‘घुसपैठियों को बाहर करना होगा’
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RSS के 100 साल :  ‘घुसपैठियों को बाहर करना होगा’

व्याख्यानमाला के दूसरे दिन दो सत्र में प्रश्नोत्तर हुए। श्री भागवत ने राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, सामाजिक तथा सांस्कृतिक विषयों पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दिए...

Written byPanchjanyaPanchjanya
Feb 17, 2026, 07:58 am IST
inविश्लेषण, संघ @100, साक्षात्कार
व्याख्यानमाला के मंच पर श्री मोहनराव भागवत, साथ में महाराष्ट्र के संघ अधिकारी

व्याख्यानमाला के मंच पर श्री मोहनराव भागवत, साथ में महाराष्ट्र के संघ अधिकारी

व्याख्यानमाला के दूसरे दिन दो सत्र में प्रश्नोत्तर हुए। श्री भागवत ने राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, सामाजिक तथा सांस्कृतिक विषयों पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दिए। पूछे गए कुल 143 प्रश्नों को 14 श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया। इनमें संघ नीति, हिंदुत्व, राष्ट्रीय परिदृश्य, शिक्षा, अर्थव्यवस्था, राजनीति, विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा, संस्कृति, कला, खेल व भाषा, जीवनशैली, पर्यावरण आदि विभिन्न विषयों से जुड़े प्रश्न शामिल रहे। यहां प्रश्नोत्तर सत्र के संपादित अंश दिए जा रहे हैं-

बांग्लादेश में हिंदुओं को कैसे बचाया जाए?
बांग्लादेश के सवा करोड़ हिंदू संगठित हों, ऐसा होने पर अत्याचार पर स्वतः ही रोक लग जाएगी।

 किसी भी जाति का व्यक्ति सरसंघचालक बन सकता है?  
ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या शूद्र इनमें से कोई नहीं, बल्कि हिंदू ही संघ का सरसंघचालक होगा। संघ का सरसंघचालक बनने के लिए किसी भी जाति का होना न तो बाधा है और न ही कोई अनिवार्य योग्यता। भविष्य में अनुसूचित जाति या जनजाति के कार्यकर्ता भी सरसंघचालक बन सकते हैं।

आरक्षण पर संघ की क्या राय है?
जिन पर पीढ़ी दर पीढ़ी अन्याय या अत्याचार हुआ है, उनके सर्वांगीण उत्थान होने तक तथा उनके मन में सुरक्षा की भावना उत्पन्न होने तक संविधान सम्मत आरक्षण जारी रहना चाहिए।

 

भ्रष्टाचार कैसे खत्म होगा?
संघ के स्वयंसेवकों को भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनों तथा सभी प्रकार के प्रयासों में सहभागी होना चाहिए, किंतु केवल कानून बनाकर भ्रष्टाचार पर नियंत्रण करना कठिन है। इसके लिए संस्कारित समाज मन का निर्माण उतना ही महत्वपूर्ण है।

कन्वर्जन पर संघ का क्या विचार है?
जबरदस्ती या लालच देकर कन्वर्जन करना निंदनीय है और उसका प्रत्युत्तर घर-वापसी होगा। यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा या स्वप्रेरणा से धर्म-परिवर्तन करता है तो उसका विरोध नहीं किया जाना चाहिए।

घुसपैठ की समस्या कैसे समाप्त होगी?
जनसंख्या का अनुपात केवल जन्मदर में कमी से नहीं बदलता, बल्कि कन्वर्जन और घुसपैठ के कारण भी बदलता है। इसलिए घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें वापस भेजना चाहिए।

हिंदू-सिख संबंधों पर संघ क्या सोचता है?
हिंदू और सिख एक हैं, उनके बीच रोटी-बेटी के संबंध हैं। उनका रक्त संबंध है। पूजा-पद्धति अलग मानी जा सकती है, उनकी विशिष्टता को मान्यता दी जानी चाहिए, लेकिन वे अलग नहीं हैं। गुरुग्रंथ साहिब में केवल सिख गुरुओं की ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारत के संतों की वाणी संकलित की गई है। ‘हिंद की चादर’ के रूप में पहचानी जाने वाली यह प्राचीन एकता पुनः स्थापित करनी है। समाज के नाते हम सभी एक हैं, यह ध्यान में रखना चाहिए। हिंदू नाम से कोई अलग धर्म अस्तित्व में नहीं है। आज जिसे हिंदू धर्म कहा जाता है, वही प्राचीन सनातन धर्म है।

ईसाइयत और इस्लाम पर आपके क्या विचार हैं?
ईसा मसीह द्वारा प्रतिपादित ईसाइयत और पैगंबर मोहम्मद द्वारा बताए गए इस्लाम का स्वरूप आज उसी रूप में दिखाई नहीं देता। इसका कारण यह है कि उनके बाद इन दोनों पंथों पर तत्कालीन राजनीति का प्रभाव बढ़ गया। परिणामस्वरूप इन पंथों की आध्यात्मिकता पीछे रह गई और राजनीतिक हित अधिक प्रभावी हो गए। इन पंथों के मूल आध्यात्मिक तत्वों को प्रोत्साहन दिया जाए तो विश्वभर के राजनीतिक संघर्ष कम हो सकते हैं।

वीर सावरकर को भारत रत्न मिलना चाहिए?
भारत रत्न सम्मान प्राप्त न होने पर भी स्वातंत्र्यवीर सावरकर करोड़ों भारतीयों के हृदय पर राज कर रहे हैं। किंतु यदि उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया जाता है, तो इस सम्मान की प्रतिष्ठा बढ़ेगी।

सत्ता में भाजपा के रहने से संघ को कोई लाभ मिलता है?
भाजपा के सत्ता में आने से संघ को कोई प्रत्यक्ष लाभ हुआ ऐसा नहीं है, बल्कि समाज में संघ की बढ़ती शक्ति और स्वीकार्यता का लाभ समान विचारधारा और भारतीय नीतियों का पालन करने वाले दलों को मिला है।

कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्यजन।

विभिन्न संगठनों में कार्य करने वाले अपने कार्यकर्ताओं पर संघ दबाव डालता है? 
संघ के स्वयंसेवकों के निरंतर परिश्रम तथा समाज द्वारा संघ को मिले स्नेह और विश्वास के कारण ही संघ का कार्य बढ़ा है। यहां कार्य करने वाले स्वयंसेवकों को पर्याप्त स्वतंत्रता होती है, जिससे वे अपने क्षेत्र में आवश्यक निर्णय और प्रयोग जिम्मेदारी से कर सकते हैं। वे जो अच्छे कार्य करते हैं, उसका श्रेय उन्हीं को जाता है, लेकिन जहां कमियां रह जाती हैं, उसके प्रश्न अभिभावक के नाते हमारे पास आते हैं और उसकी नैतिक जिम्मेदारी हम लेते हैं। संघ का कार्य केवल व्यक्ति निर्माण का कार्य है। किसी विशेष क्षेत्र में कार्य करना संघ का कार्य नहीं है।

समान नागरिक संहिता पर क्या विचार हैं?
समाज की मानसिकता तैयार करके तथा सभी समाज घटकों को विश्वास में लेकर समान नागरिक संहिता जैसा कानून लागू किया जाना चाहिए। उत्तराखंड तथा अन्य कुछ राज्यों में ऐसे प्रयोग हो रहे हैं, इसलिए हम उसका स्वागत करते हैं।

युवाओं पर संघ की क्या राय है?
संघ के कार्यकर्ताओं की औसत आयु 28 वर्ष है और इसे 25 वर्ष से नीचे लाने का प्रयास चल रहा है। देश का युवा देशभक्त और नैतिक आचरण करने वाला है। यदि उन्हें उनकी भाषा में विषय समझाया जाए, तो वे उन्हें स्वीकार करते हैं और उसका आचरण भी करते हैं। उन्हें प्रयोग करने की स्वतंत्रता और अवसर देना चाहिए तथा यदि प्रयोग में कोई त्रुटि हो जाए तो उनके पीछे दृढ़ता से खड़ा रहना चाहिए।

संघ को लेकर कई तरह के भ्रम फैलाए जाते हैं। इस पर क्या कहेंगे?
भ्रम की सत्ता तब तक चलती है, जब तक सत्य सामने नहीं आता। संघ के बारे में भी बहुत सारे भ्रम फैलाए जाते हैं। इसीलिए हम संघ का विचार सब तक पहुंचाने में लगे हैं।

क्या संघ में अंग्रेजी को स्वीकारा जाता है?
अंग्रेजी से हमारा बैर नहीं है। जहां अंग्रेजी के बिना काम नहीं चलता, वहां हम अंग्रेजी भाषा का उपयोग करते हैं। पर हमारा प्रयास रहता है कि अपनी भारतीय भाषा या फिर हिंदी भाषा का ही प्रयोग करें। हम अंग्रेजी को अपनी प्रमुख भाषा के रूप में स्वीकार नहीं करेंगे।

आप 75 वर्ष के हो चुके हैं। क्या पद छोड़ेंगे?
मैंने अपनी इच्छा जताई कि 75 वर्ष की आयु के बाद पद से मुक्त होकर कार्य करना चाहिए, लेकिन स्वयंसेवकों ने कहा कि आप ठीकठाक हैं, इसलिए कार्य करते रहिए।

विवाह पर क्या मत है?
विवाह एक संस्कार है। जिम्मेदारी के साथ विवाह को निभाना चाहिए। जनसंख्या संतुलन के लिए तीन बच्चे होना एक आदर्श स्थिति है।

खेती-किसानी पर क्या कहेंगे?
खेती की उपज के लिए भंडारण और उसका प्रसंस्करण होने से किसान को उसकी उपज के बेहतर दाम मिलेंगे। यह काम सरकार को करना चाहिए। जब खेती में खर्चा कम होता है तो किसान को कर्ज नहीं लेना पड़ता है।

ग्राम विकास के लिए संघ क्या करता है?
स्वयंसेवकों के प्रयासों से पूरे भारत में 5,000 गांवों में विकास की बात शुरू हुई है। लगभग 350 गांवों में लोगों ने इकट्ठा होकर भेदभावों को मिटाया और अपने बलबूते गांवों को ऊपर उठाया है।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर क्या राय है?
आज के दौर में कोई देश एकाकी नहीं रह सकता। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘डील’ करनी ही पड़ती है। उसमें कुछ लेना पड़ता है तो कुछ छोड़ना भी पड़ता है। अपने हित में क्या है, इसका ध्यान रखना ही चाहिए। हमें विश्वास है कि वर्तमान समय में उसका ध्यान रखा ही गया होगा।

संघ कोई गुरुकुल चलाता है?
संघ केवल शाखा चलाने का कार्य करता है। संघ कोई गुरुकुल नहीं चलाता, चलाएगा भी नहीं। संघ और समाज के लोग गुरुकुल चलाते हैं तो संघ उनकी सहायता करता है। भारतीय शिक्षण मंडल के माध्यम से देशभर में गुरुकुल आदि का संचालन किया जाता है।

क्या शिक्षा मातृभाषा में होनी चाहिए?
मातृभाषा में उत्तम शिक्षा देने का कार्य विद्या भारती के माध्यम से किया जा रहा है।

कला और खेल के क्षेत्र में संघ क्या करता है?
कला के क्षेत्र में संस्कार भारती और खेल के क्षेत्र में क्रीड़ा भारती के माध्यम से बहुत सारे कार्यक्रम चल रहे हैं।

इन हस्तियों की रही उपस्थिति 

कार्यक्रम में राधाकिशन दमाणी, अभिनेता सलमान खान, रणबीर कपूर, हेमा मालिनी, अक्षय कुमार, विक्की कौशल, शिल्पा शेट्टी, करण जौहर, संजय जिंदल, दीपक पारेख, अजय पिरामल, सुभाष चंद्रा, रोनी स्क्रूवाला, विनीत जैन, नितेश तिवारी, मोहित सूरी, रमेश तौरानी, बोनी कपूर, ओम राउत, सुभाष घई, पार्श्वगायक अदनान सामी, निर्देशक विपुल शाह, इंदर कुमार, प्रसाद ओक, आईआईटी मुंबई के शिरीष केदारे, स्वामी स्वरूपानंद, अक्षत गुप्ता, अभिनेत्री अश्विनी भावे, ज्येष्ठ गायिका अनुराधा पौडवाल, वरिष्ठ पत्रकार भाऊ तोरसेकर, अभिनेता सुनील बर्वे, मुंबई विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. रविंद्र कुलकर्णी, एसएनडीटी विश्वविद्यालय की कुलगुरु डॉ. उज्ज्वला चक्रदेव, इज्राएल–इटली दूतावास के अधिकारी सहित भारत के सिंधी गुरुद्वारा के प्रमुख जसकीरत जी भाईसाहब, अमर सिंह जी, राम सिंह राठौड़, वरिष्ठ अधिवक्ता उज्ज्वल निकम सहित अन्य मान्यवर उपस्थित रहे।

Topics: अखंड भारतपाञ्चजन्य विशेषहिंदू-सिख एकताRSS के 100 सालघर वापसीघुसपैठियेआरक्षणजनसंख्या अनुपातस्वतंत्रताआदर्श स्थिति‘व्यक्ति निर्माण’संघ की नीतिभारत रत्नपंथ और आध्यात्मिकताजबरन कन्वर्जनरक्त संबंधमातृभाषारोटी-बेटी के संबंध
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