इन दिनों गोवा में चौथा ‘इंडिया एनर्जी वीक’ कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसमें 120 देशों के 75,000 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए। इसके एक प्रतिभागी थे रिचर्ड कैरी। लंदन निवासी कैरी एक बड़ी लाइटिंग कंपनी में ऊंचे पद पर काम करते हैं। इनकी कंपनी इस तरह की विशेष लाइट बनाती है, जोकि कच्चा तेल निकालने से लेकर रिफाइनरी तक में लगाई जाती है। रिचर्ड बताते हैं कि पिछले दो बार से उनकी कंपनी दुनिया के सबसे बड़े ‘एनर्जी वीक’ में हिस्सा ले रही है। यहां आकर वे पूरी दुनिया की सभी बड़ी कंपनियों के लोगों से एक साथ मिल लेते हैं। इससे उनका कारोबार बढ़ता है।
ऊर्जा क्षेत्र में भारत की बढ़ती ताकत
दरअसल, पिछले कुछ वर्षों में भारत कच्चे तेल का दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा खरीदार हो गया है, साथ ही पेट्रोलियम उत्पादों का पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक भी है। इसके दम पर वह दुनिया के सभी देशों के साथ बेहतर तालमेल कर सकता है। ‘इंडिया एनर्जी वीक’ के संदर्भ में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी कहते हैं, “विश्व में भारत अब ऊर्जा क्षेत्र के ‘ड्राइवर’ के तौर पर पहचाना जाने लगा है। ‘इंडिया एनर्जी वीक’ में दुनिया की हर कंपनी आती है, सभी भारत के साथ काम करना चाहती है। यह दुनिया का प्रमुख ऊर्जा कार्यक्रम बन गया है।” उन्होंने कहा, “भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी रिफाइनिंग क्षमता वाला देश भी है। आज हमारी रिफाइनिंग क्षमता सालाना 260 मिलियन मैट्रिक टन है, जोकि अगले कुछ समय में 320 मिलियन मैट्रिक टन होने जा रही है। यह क्षमता जल्दी ही 400 से 450 मिलियन मैट्रिक टन हो जाएगी।”
भारत बनेगा वैश्विक तेल मांग का बड़ा केंद्र
बता दें कि भारत की तेल मांग अगले दो दशक तक दुनिया की कुल मांग का 25 प्रतिशत रहने वाली है। यानी जिस रफ्तार से दुनिया के देशों में तेल की मांग बढ़ेगी, उसके सबसे बड़े हिस्सेदारों में भारत रहेगा। इसके साथ ही सरकार की योजना है कि दुनिया के तेल की मांग का 35 प्रतिशत भारत पूरा करे।
तेल-गैस की नई उम्मीद
हालांकि, भारत अभी भी अपने यहां तेल की खोज नहीं कर पाया है। ओएनजीसी का बांबे हाई में तेल का कुआं भी पहले के मुकाबले कम उत्पादन करने लगा है, साथ ही असम के कुएं भी पुराने हो गए हैं। ऐसे में भारत सरकार की कोशिश है कि नए कुएं खोदे जाएं। इसलिए सरकार ने पिछले कुछ समय में ‘नो गो एरिया’ (एक ऐसा प्रतिबंधित स्थान, जहां सुरक्षा कारणों, खतरे या सरकारी पाबंदी के कारण लोगों का जाना मना होता है) को काफी कम कर दिया है और तेल खोजने वाली कंपनियों के साथ समझौते की शर्तों को भी आसान किया है। हाल ही में अंदमान निकोबार के आसपास के इलाकों
में तेल और गैस मिलने की संभावना बहुत बढ़ी है। यह कब तक होगा! इस पर हरदीप सिंह पुरी कहते हैं, “इसमें समय जरूर लगेगा, लेकिन हमें तेल और गैस खोज के मिशन में कामयाबी जरूर मिलेगी। इस खोज को जारी रखना होगा। हमने समुद्र मंथन योजना में यह फैसला लिया है कि हम बड़ी संख्या में कुएं खोदेंगे।”
निवेश और खोज में नई तेजी
दरअसल, 2006 से लेकर 2014 तक भारत में तेल और गैस खोजने का काम ही नहीं हुआ था। साथ ही पुरानी सरकारों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों को कम रखने के लिए 3.40 लाख करोड़ रुपए के ‘ऑयल बांड’ भी जारी किए थे। इस वजह से तेल कंपनियों की हालत बहुत खराब हो गई थी। इसलिए पुरानी सरकार तेल, गैस खोजने के लिए निवेश नहीं कर पा रही थी। लेकिन अब स्थितियां बदल गई हैं। न सिर्फ अंदमान निकोबार, बल्कि उत्तर-पूर्व के राज्यों में भी बड़ी संख्या में तेल और गैस की खोज हो रही है, जिसका फायदा आने वाले वर्षों में देश को मिलेगा।
















