
Pan Card
केंद्र सरकार देश की आयकर व्यवस्था को सरल और आम जनता के लिए सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। वित्त मंत्रालय ने इनकम टैक्स ड्राफ्ट रूल 2026 का मसौदा जारी किया है, जिसमें पैन कार्ड से जुड़े कई नियमों में ढील देने का प्रस्ताव रखा गया है। यदि ये नए नियम लागू होते हैं, तो रोजमर्रा के छोटे लेन-देन में बार-बार पैन कार्ड दिखाने की जरूरत खत्म हो जाएगी। इससे आम नागरिकों, छोटे व्यापारियों, किसानों और मध्यम वर्ग के लोगों को सीधा फायदा मिलेगा।
अब तक आयकर कानूनों के तहत कई ऐसे नियम थे, जिनमें छोटे-छोटे लेन-देन पर भी पैन कार्ड देना जरूरी होता था। इससे लोगों को बैंक, होटल, वाहन खरीद और अन्य सेवाओं के दौरान परेशानी का सामना करना पड़ता था। सरकार का मानना है कि इन नियमों को आसान बनाकर लोगों का समय बचाया जा सकता है और अनावश्यक झंझट को कम किया जा सकता है।
नकद लेन-देन के नियम होंगे सरल- फिलहाल नियम यह है कि यदि कोई व्यक्ति एक ही दिन में 50 हजार रुपये से अधिक नकद जमा या निकासी करता है, तो उसे पैन कार्ड देना अनिवार्य होता है। इस वजह से कई बार छोटे व्यापारियों और आम लोगों को दिक्कत होती है, क्योंकि उन्हें बार-बार अपनी पहचान से जुड़े दस्तावेज दिखाने पड़ते हैं। नए ड्राफ्ट नियमों में इस व्यवस्था को बदलने का प्रस्ताव है। अब पूरे वित्तीय वर्ष में एक या एक से अधिक बैंक खातों में कुल 10 लाख रुपये या उससे अधिक की नकद जमा या निकासी होने पर ही पैन कार्ड देना जरूरी होगा। यानी यदि किसी व्यक्ति का साल भर का कुल नकद लेन-देन 10 लाख रुपये से कम रहता है, तो उसे पैन कार्ड दिखाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इस बदलाव से छोटे दुकानदारों, ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों और दैनिक मजदूरी करने वालों को बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि उनके लिए बार-बार पैन कार्ड दिखाना मुश्किल हो जाता था।
वाहन खरीद पर पैन नियमों में ढील- वर्तमान समय में किसी भी कीमत की चार पहिया मोटर गाड़ी खरीदने पर पैन कार्ड देना जरूरी है, जबकि दोपहिया वाहन इस नियम के दायरे में नहीं आते। नए प्रस्ताव में इस नियम को भी सरल बनाने की बात कही गई है। ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, दो पहिया और चार पहिया दोनों वाहनों की कीमत यदि 5 लाख रुपये से अधिक होगी, तभी पैन कार्ड देना अनिवार्य होगा। यदि वाहन की कीमत 5 लाख रुपये से कम है, तो पैन कार्ड की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे मध्यम वर्ग और आम परिवारों को फायदा होगा, जो कम बजट में बाइक, स्कूटर या छोटी कार खरीदते हैं।
होटल, रेस्टोरेंट और इवेंट सेवाओं में राहत- अभी तक यदि कोई व्यक्ति होटल, रेस्टोरेंट या रिसॉर्ट में 50 हजार रुपये से अधिक खर्च करता है, तो उसे पैन कार्ड दिखाना होता है। यही नियम शादी समारोह, बैंक्विट हॉल, कन्वेंशन सेंटर और इवेंट मैनेजमेंट सेवाओं पर भी लागू होता है। नए ड्राफ्ट में इस सीमा को 50 हजार रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसका मतलब यह है कि अब 1 लाख रुपये तक के बिल पर पैन कार्ड देना जरूरी नहीं होगा। इस बदलाव से शादी, जन्मदिन, पारिवारिक कार्यक्रम और अन्य आयोजनों में खर्च करने वालों को बड़ी राहत मिलेगी।
प्रॉपर्टी से जुड़े लेन-देन में बड़ा बदलाव- अचल संपत्ति यानी मकान, जमीन और प्लॉट की खरीद-बिक्री पर भी पैन कार्ड से जुड़े नियमों में बदलाव प्रस्तावित है। फिलहाल 10 लाख रुपये से अधिक की प्रॉपर्टी डील पर पैन कार्ड देना अनिवार्य होता है। नए नियमों में इस सीमा को 20 लाख रुपये करने का प्रस्ताव है। यानी अब 20 लाख रुपये से कम की प्रॉपर्टी डील पर पैन कार्ड अनिवार्य नहीं रहेगा। इससे छोटे मकान और ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन खरीदने वाले लोगों को राहत मिलेगी।
कब से लागू होंगे नए नियम- रिपोर्ट के अनुसार, सरकार और केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) इन ड्राफ्ट नियमों पर हितधारकों और आम जनता की राय लेंगे। इसके बाद आवश्यक सुधार कर इन्हें मार्च 2026 के पहले सप्ताह तक अंतिम रूप देकर अधिसूचित किया जा सकता है। संभावना है कि ये नए नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे और 1962 के पुराने आयकर नियमों की जगह लेंगे। इन बदलावों से सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि आम लोगों को छोटे लेन-देन में बार-बार पैन कार्ड दिखाने की परेशानी से छुटकारा मिलेगा। बैंकिंग सेवाएं आसान होंगी, खरीदारी और खर्च करना सरल होगा और लोगों का समय भी बचेगा।