पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के नेताओं की हो रही हत्याओं ने सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं कि राज्य में कानून व्यवस्था किस दयनीय हालत में पहुंच चुकी है। राज्य में सत्ताधारी दल के लोग ही सुरक्षित नहीं तो आम नागरिक की सुरक्षा अभी दूर की कौड़ी वाली बात लगने लगी है।
जालंधर के मॉडल टाऊन इलाके में आज शुक्रवार सुबह एक गुरुद्वारे के बाहर आम आदमी पार्टी (आप) के एक पदाधिकारी लक्की ओबेरॉय की गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस अनुसार घटना सुबह करीब 7.55 बजे हुई, जब वह गुरुद्वारे से बाहर निकले थे। ओबेरॉय अपनी थार गाड़ी में बैठे थे, तभी दो शूटर स्कूटर पर आए और ओबेरॉय पर करीब से गोलियां चलाईं। उन्हें गंभीर हालत में एक प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
ओबेरॉय आम आदमी पार्टी से जालंधर कैंट में वार्ड-35 के हलका इंचार्ज थे। उनका 11 दिन पहले ही जन्मदिन था। वहीं गैंगस्टर जोगा फोलड़ीवाल ने मर्डर की जिम्मेदारी ली है। सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखा- यह हमारे भाईयों को नुकसान पहुंचा रहा था। उसका जवाब आज हमने इसे दे दिया है। खालसा कॉलेज की प्रधानगी को लेकर यह सब कुछ हुआ है।
– अभी एक दिन पहले तरनतारन के गांव चीमा खुर्द में आप के सरपंच गुरभेज सिंह की तेजधार हथियारों से हमला करके हत्या कर दी गई थी।
– इससे पहले 5 जनवरी, 2026 को लुधियाना के जगराओं में आप विधायक सरबजीत कौर माणूके के भतीजे गगनदीप सिंह की गोली मार हत्या की गई थी। हत्यारों ने सरेआम गगनदीप सिंह पर फायरिंग कर दी थी। हत्यारों ने आपसी रंजिश के चलते उसकी हत्या की थी।
– 4-5 जनवरी, 2026 को अमृतसर के मैरिमोल्ड रिजॉर्ट में आम आदमी पार्टी (आप) के सरपंच जरमल सिंह की हत्या कर दी गई। वह तरनतारन जिले के वल्टोहा गांव के रहने वाले थे। वह एक शादी समारोह में शामिल होने आए थे। इसी दौरान 2 बदमाश पैलेस में आए और बिल्कुल नजदीक आकर पॉइंट ब्लैंक से उनके सिर में गोली मार दी। उस वक्त सरपंच खाना खा रहे थे। पुलिस ने इस मामले में पंजाब और छत्तीसगढ़ से हत्यारों को गिरफ्तार किया था।
– 15 जनवरी, 2026 को पंजाब के होशियारपुर में ‘आप’ नेता की गोलियां मारकर हत्या कर दी गई। ‘आप’ नेता बलविंदर सिंह सतकरतार (60) की मियानी गांव में हार्डवेयर की दुकान थी। शाम को बाइक पर आए बदमाशों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं। बाइक सवार एक हमलावर बाहर खड़ा रहा, जबकि दो नकाबपोश सीधे दुकान के अंदर घुस गए। हमलावरों ने बिना कोई बात किए अपनी पिस्तौल से बलविंदर और लखविंदर पर 7 राऊंड फायरिंग कर दी थी।
‘आप’ नेताओं के अलावा भी पंजाब में कांग्रेस व आरएसएस नेताओं, कई व्यापारियों और खिलाडिय़ों की भी हत्याएं हुई हैं। इन हत्याओं के कारण ‘आप’ सरकार विपक्षी दलों के निशाने पर भी है और प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर जन साधारण भी परेशान है।
पंजाब सरकार के दावों व वास्तविकता में अंतर
उपरोक्त स्थिति तब है जब पंजाब पुलिस ने 20 जनवरी से गैंगस्टरों के विरुद्ध सीधी जंग छेड़ी हुई है और 4000 से ऊपर गिरफ्तारियां की गई हैं। इससे पहले पंजाब पुलिस ने पिछले एक वर्ष से ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ शुरू किया था, जिसमें 47000 से ऊपर नशा तस्करों को गिरफ्तार किया जा चुका है और करोड़ों रुपए के नशीले पदार्थ भी पकड़े गए हैं। सरकार के दावों के विपरीत असलीयत यह है कि न तो यहां नशा रुक रहा है और न ही गैंगस्टरवाद।
देशविरोधी ताकतें भी सक्रिय
2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए कहा जा सकता है कि पंजाब व देश विरोधी ताकतें भी नशा तस्करों और गैंगस्टरों के पीछे रहकर एक बड़ी भूमिका निभा रही है। 2027 के विधानसभा चुनाव सभी राजनीतिक दलों के लिए महत्त्वपूर्ण हैं, लेकिन आम आदमी पार्टी के लिए विशेष महत्त्व रखते हैं क्योंकि पार्टी का राजनीतिक भविष्य इन्हीं पर टिका हुआ है। 2027 के विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आयेंगे वैसे-वैसे पंजाब व देश विरोधी ताकतें और सक्रिय होती जाएंगी। नशा तस्करों और गैंगस्टरों के विरुद्ध पंजाब सरकार के अभियानों की सफलता और असफलता पर ही आम आदमी पार्टी की राजनीतिक सफलता और असफलता निर्भर है परंतु सरकार इन मोर्चों पर असफल दिखाई देने लगी है।
जिम्मेवारी भगवंत मान की क्योंकि वे गृहमंत्री भी हैं
पंजाब में बिगड़ी हुई कानून व्यवस्था से मुख्यमंत्री किसी भी सूरत में पल्ला नहीं झाड़ सकते और न ही किसी और पर इसकी जिम्मेवारी थोप सकते क्योंकि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के पास राज्य का गृह मंत्रालय भी है जिसके अंतर्गत कानून व्यवस्था उन्हीं की जिम्मेवारी बनती है।
सरकार पर लगते रहे हैं पुलिस के दुरुपयोग के आरोप
शोचनीय बात यह है कि राज्य में लुंजपुंज कानून व्यवस्था के बावजूद पंजाब पुलिस सत्ताधारी नेताओं की सुरक्षा के नाम पर उनकी खिदमतगारी में लगी दिख रही है। मुख्यमंत्री, उनके परिजनों, मंत्रियों और यहां तक कि दिल्ली से आए आम आदमी पार्टी के नेताओं की सुरक्षा में लंबे चौड़े पुलिस काफिलों के आरोप विपक्ष लगाता रहा है। यह आरोप उस पार्टी पर लग रहे हैं जिनके नेता सादगी की कसमें खाते हुए सत्ता में आने से पहले निजी सुरक्षा न लेने की कसमें खाते रहे और सुरक्षा बलों के काफिलों को लेकर अपने विरोधी दल के नेताओं की नुक्ताचीनी करते रहे हैं। खुद सत्ता में आने के बाद आप के नेता वही काम कर रहे हैं जिसकी कि विपक्ष में रहते हुए आलोचना करते रहे हैं और वह भी तब जब पंजाब की कानून व्यवस्था हाथ से निकलती जा रही है।

















