ब्रिटेन में “कम श्वेत” योजना? ग्रामीण इलाकों में नया प्रयोग, लोगों ने पूछा क्या यह नस्लवाद नहीं?
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ब्रिटेन में “कम श्वेत” योजना? ग्रामीण इलाकों में नया प्रयोग, लोगों ने पूछा क्या यह नस्लवाद नहीं?

ब्रिटेन में ग्रामीण क्षेत्रों को “कम श्वेत” और अधिक विविध बनाने की सरकारी योजना पर बवाल। डाइवर्सिटी के नाम पर कुत्ते, पब्स और अंग्रेजी संस्कृति पर सवाल।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा — edited by Shivam Dixit
Feb 4, 2026, 09:00 pm IST
inविश्व

क्या समाज में विविधता लाने के लिए यह किया जा सकता है कि वहाँ के निवासियों को ही कम कर दिया जाए? क्या ऐसा हो सकता है? मगर ब्रिटेन में ऐसा हो रहा है और यह सब सरकार के स्तर पर हो रहा है। यह योजना बनाई जा रही है कि ब्रिटेन में जो ग्रामीण क्षेत्र हैं, वहाँ पर विविवधता बढ़ाने के लिए श्वेत लोगों की संख्या कम करनी होगी।

ग्रामीण क्षेत्रों में डाइवर्सिटी बढ़ाने की सरकारी पहल

जीबी न्यूज के अनुसार इंग्लैंड में ग्रामीण अधिकारियों ने ब्रिटिश के ग्रामीण क्षेत्रों को और विविध समुदाय वाले लोगों से भरपूर बनाने के लिए कुछ योजनाओं का निर्माण किया है और इन तमाम योजनाओं में उनका साथ देगा डिपार्ट्मन्ट फॉर एंवयर्नमेंट, फूड एंड रुरल अफेयर्स अर्थात पर्यावरण, भोजन एवं ग्रामीण मामलों के विभाग।

संरक्षित प्राकृतिक स्थानों में डाइवर्सिटी टारगेट

इसके अनुसार देश में जो भी संरक्षित प्राकृतिक स्थान हैं, फिर चाहे वे चिल्टर्न्स, कोट्सवोल्ड्स और माल्वर्न हिल्स हों, वहाँ पर ऐसे डाइवर्सिटी टारगेट अपनाए हैं, जिनका मकसद उन इलाकों में ज़्यादा जातीय अल्पसंख्यक टूरिस्ट को आकर्षित करना है, जहाँ पारंपरिक रूप से “सफेद मिडिल क्लास” ब्रिटिश लोगों का दबदबा रहा है।

ग्रामीण इलाकों को लेकर ‘श्वेत स्थान’ की अवधारणा

जीबी न्यूज की एक क्लिप में पूर्व लेबर एड्वाइज़र स्कार्लिट मैकवायर यह कह रही हैं कि अन्य समुदाय के लोग इसलिए संरक्षित मैदानों में इसलिए नहीं आ पाते हैं, क्योंकि वहाँ पर अनियंत्रित कुत्ते हैं और Defra के अध्ययन के विषय में भी बताया गया है कि कैसे यह अवधारणा है कि स्थानीय पब्स और ग्रामीण क्षेत्रों को “श्वेत स्थान” माना जाता है।

मुस्लिम समुदाय को लेकर उठ रहे सवाल

लोगों का कहना है कि खुलकर बोलना चाहिए, कि यह सारे कदम मुस्लिम समुदाय के लिए उठाया जा रहा है, क्योंकि ब्लैक ईसाई लोगों को कोई समस्या ही नहीं है। वह वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें कुत्तों को लेकर बात की जा रही है और ग्रामीण क्षेत्रों को कम श्वेत बनाने की बात की जा रही है।

कीर स्टर्मर सरकार की योजना और नस्लवाद के संकेत

कीर स्टर्मर की सरकार ने ब्रिटेन के ग्रामीण क्षेत्रों को विविध बनाने की जिस योजना पर कार्य करना आरंभ किया है, उनमें कथित नस्लवाद के तीन संकेतों पर बात की गई है। वे हैं, अंग्रेजी भोजन, पब्स और कुत्ते!

‘कम श्वेत’ का अर्थ और धार्मिक अनुकूलता

कम श्वेत का अर्थ यही है कि वहाँ पर मुस्लिमों को बसाया जाए या उन क्षेत्रों को मुस्लिमों के लिए और सुविधाजनक बनाया जाए, मुस्लिमों के मजहब के अनुसार माहौल बनाया जाए।

एथनिक माइनोरिटीज और संरक्षित प्राकृतिक मैदान

express.co.uk की रिपोर्ट के अनुसार एथिनिक माइनोरिटीज़ अर्थात मुस्लिम अल्पसंख्यक इन प्राकृतिक मैदानों को खुद से नहीं जोड़कर देख पाते हैं और वे यह मानते हैं कि यहाँ पर तो “श्वेत” लोगों का कब्जा है।

डेफ्रा की रिपोर्ट और पहली पीढ़ी के इमिग्रेंट्स

डेफ्रा ने £108,000 में एक दूसरी रिपोर्ट तैयार करवाई, जिसका शीर्षक था “”Improving the ethnic diversity of visitors to England’s protected landscapes अर्थात इंग्लैंड के प्रोटेक्टेड लैंडस्केप में आने वाले विजिटर्स की एथनिक डाइवर्सिटी को बेहतर बनाना”, जिसमें 2022 में पाया गया कि “यह सोच कि संरक्षित प्राकृतिक मैदान गोरे लोगों और मिडिल-क्लास लोगों के लिए है और यह सोच पहली पीढ़ी के इमिग्रेंट्स के लिए एक बड़ी रुकावट हो सकती है।”

स्थानीय श्वेत समुदाय की पहचान और चिंता

वहीं इंग्लैंड के श्वेत और स्थानीय लोगों का कहना है कि जो ग्रामीण क्षेत्रों के मैदान हैं, उनकी एक विशेष पहचान है और उनकी सुंदरता और पहचान को बनाए रखने के लिए वे लोग सरकार को कर देते हैं और अब सरकार कैसे उन स्थानों पर उन लोगों की पहुँच सुगम बनाना चाहती है, जो इन स्थानों से खुद को जोड़कर नहीं देखते हैं और जो इन्हें पराया मानते हैं।

ग्रामीण खानपान, पब्स और सामाजिक दूरी

इस रिपोर्ट में यह भी चिंता जताई गई है कि ग्रामीण जो परिसर हैं, वे केवल श्वेत अंग्रेजी कल्चर के खानपान के अनुसार ही खानापीना करते हैं, अर्थात वे परंपरागत पब्स के साथ जुड़े हैं, जिनमें बहुत ही सीमित खाने के विकल्प होते हैं और वे केवल उन्हीं लोगों के लिए हैं, जिन्हें पीने की आदत है या जहां शराब पीने का रिवाज है, ऐसे में पाकिस्तान या बांग्लादेश के मुस्लिम कहते हैं कि उन्हें ऐसा लगता है कि वे “अवांछित” हैं।

कुत्तों को लेकर आपत्ति और धार्मिक संवेदनशीलता

और यह भी कहा गया कि चूंकि वहाँ पर श्वेत लोग अपने कुत्तों के साथ बाहर आते हैं, तो इससे मुस्लिम “अपसेट” हो जाते हैं।

सोशल मीडिया पर नाराज़गी और सवाल

सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा इस “डाइवर्सिटी” की योजना पर निकल रहा है। लोग कह रहे हैं कि मुस्लिमों का स्वागत करने के लिए वे पब्स में कुत्तों का आना बंद कराएंगे? आखिर कौन यह सब तय करता है। Lucy Connolly नामक यूजर ने लिखा कि ये सब कौन तय करता है? क्या किसी मुस्लिम ने ऐसा सुझाव दिया होगा कि ग्रामीण क्षेत्रों को उनके लिए बेहतर बनाने के लिए कुत्तों पर प्रतिबंध लगाया जाए?

‘हमारे क्षेत्रों को बख्श दो’ की मांग

लोग कह रहे हैं कि उनके क्षेत्रों को बख्श दिया जाए!

श्वेत समुदाय के प्रति घृणा या किसी और के प्रति प्रेम?

लोग पूछ रहे हैं कि आखिर इस सीमा तक श्वेत समुदाय से घृणा का कारण क्या है? ऐसे में प्रश्न यह भी उठता है कि क्या यह श्वेत समुदाय से चिढ़ है या फिर मुस्लिमों से प्रेम? क्या अश्वेत ईसाई पब्स में नहीं जाते हैं या फिर कुत्ते नहीं पालते हैं?

क्या आबादी को मिटाना नस्लवाद नहीं?

लोग पूछ रहे हैं कि क्या एक समुदाय की आबादी को मिटाया जाना नस्लवाद नहीं है?

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