भारत-अमेरिका के बीच हाल ही में हुए ट्रेड डील से हमारे निर्यातकों के लिए अच्छी खबर प्रकाश में आई है। इस डील से टेक्सटाइल, कार्पेट और लेदर जैसे सेक्टर में काफी राहत मिलने वाली है। ये डील 3 फरवरी 2026 को सामने आई, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इसका ऐलान किया। अभी डिटेल्स पूरी तरह क्लियर नहीं हैं क्योंकि कोई जॉइंट स्टेटमेंट नहीं आया है, लेकिन जो जानकारी आई है, उसके मुताबिक भारतीय सामान पर एक्स्ट्रा टैरिफ 18% रह गया है।
पहले कुछ महीनों में अमेरिका ने भारतीय सामान पर टैरिफ बढ़ाकर 50% तक कर दिया था, जिससे एक्सपोर्ट में काफी गिरावट आई थी। खासकर लेबर-इंटेंसिव सेक्टर जैसे गारमेंट्स, लेदर और जेम्स एंड ज्वेलरी वाले एक्सपोर्टर्स को ऑर्डर कम मिल रहे थे। छोटे प्लेयर्स ने शिपमेंट रोक दिए थे, जबकि बड़े वाले डिस्काउंट देकर किसी तरह टिके हुए थे। अब इस डील से वो दबाव कम होगा।
टेक्सटाइल और गारमेंट्स सेक्टर को फायदा
भारतीय गारमेंट्स अब अमेरिका में थोड़े सस्ते हो जाएंगे। बांग्लादेश या श्रीलंका से आने वाले गारमेंट्स पर 20% टैरिफ है, जबकि अब भारत का 18% अतिरिक्त रह गया है। मतलब कुल मिलाकर भारतीय प्रोडक्ट्स थोड़े कॉम्पिटिटिव हो गए हैं। अमेरिका भारत के टेक्सटाइल एक्सपोर्ट का बड़ा मार्केट है, और ये सेक्टर लाखों लोगों को रोजगार देता है। पिछले कुछ महीनों में ऑर्डर कम होने से काफी दिक्कत हुई थी, अब उम्मीद है कि डिमांड वापस आएगी।
कार्पेट सेक्टर में वापसी की उम्मीद
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय कार्पेट्स को तुर्की से काफी कॉम्पिटिशन था, क्योंकि तुर्की के प्रोडक्ट्स पर टैरिफ कम था। अब 18% के साथ भारतीय हैंडक्राफ्टेड कार्पेट्स दोबारा मार्केट में मजबूती से जगह बना सकते हैं। कार्पेट एक्सपोर्टर्स को पिछले हाई टैरिफ से काफी नुकसान हुआ था, कई यूनिट्स बंद होने की कगार पर थीं। ये डील उनके लिए बड़ी राहत है।
लेदर और फुटवियर को भी राहत
लेदर प्रोडक्ट्स और फुटवियर के एक्सपोर्टर्स भी खुश हैं। पहले हाई टैरिफ की वजह से शिपमेंट घट गए थे। अब कम टैरिफ से प्राइसिंग में दबाव कम होगा, और अमेरिकी स्टोर्स में भारतीय लेदर गुड्स ज्यादा अफोर्डेबल दिखेंगे। ये सेक्टर भी काफी लोगों को काम देता है, खासकर छोटे-मझोले मैन्युफैक्चरर्स को।
झींगा, कीमती पत्थरों और गहनों पर असर
श्रिम्प (झींगा) एक्सपोर्टर्स को भी फायदा होगा क्योंकि प्रोडक्ट अमेरिकी मार्केट में सस्ता पड़ेगा। जेम्स एंड ज्वेलरी में भी भारतीय सामान चीन के मुकाबले बेहतर पोजीशन में आएंगे, जहां चीन पर कई आइटम्स पर 34% तक टैरिफ है। इसके अलावा ऑटो पार्ट्स और मेटल्स जैसे सेक्टर में टैरिफ में कोई बदलाव नहीं आया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा (जो भारत के अमेरिका एक्सपोर्ट का करीब 40% हैं) पहले से ही इन टैरिफ्स से बाहर थे, तो उन पर कोई असर नहीं।
निर्यात के आंकड़े
अप्रैल से नवंबर तक भारत का अमेरिका को एक्सपोर्ट 11.3% बढ़कर 59 बिलियन डॉलर हो गया। इसमें स्मार्टफोन शिपमेंट दोगुने होकर 16.7 बिलियन डॉलर पहुंच गए। ये ग्रोथ काफी हद तक टैरिफ डेडलाइन से पहले एक्सपोर्ट फ्रंटलोडिंग की वजह से थी। कई मंत्री और बिजनेस लीडर्स ने इस डील का स्वागत किया है। अमित शाह ने कहा कि ये भारत-अमेरिका रिलेशंस के लिए बड़ा दिन है।
पीयूष गोयल ने दोनों देशों को नेचुरल एलाइज बताया और कहा कि ये पार्टनरशिप प्रॉस्पेरिटी लाएगी। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि दोनों देश मिलकर टेक्नोलॉजी को-क्रिएट कर सकते हैं। अदित्य बिड़ला ग्रुप के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने कहा कि ये सप्लाई चेन को मजबूत बनाएगा।
















