मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा क्यूबा को तेल सप्लाई करने वाले देशों पर लगाए गए नए टैरिफ से वहां मानवीय संकट गहरा सकता है। यह बात 30 जनवरी 2026 को आई है, जब क्यूबा पहले से ही ईंधन की भारी कमी से जूझ रहा है।
क्यूबा की मौजूदा स्थिति
क्यूबा में तेल के भंडार सिर्फ 15-20 दिनों के लिए बचे हैं। यहां रोजाना 12 घंटे की बिजली कटौती आम हो गई है। लोग खाना पकाने के लिए चारकोल का इस्तेमाल कर रहे हैं। अस्पतालों में दिक्कतें बढ़ रही हैं, खाने-पीने की चीजों की सप्लाई प्रभावित हो रही है। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर कोई नया तेल नहीं आया तो स्थिति और बिगड़ सकती है। क्यूबा सालों से तेल आयात पर निर्भर है, और अब ईंधन की कमी से रोजमर्रा की जिंदगी ठप होने की कगार पर है।
ट्रंप का एक्शन
29 जनवरी 2026 को ट्रंप ने एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किए, जिसमें राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर क्यूबा को तेल बेचने या सप्लाई करने वाले किसी भी देश पर टैरिफ लगाने की अनुमति दी गई है। व्हाइट हाउस ने कहा कि क्यूबा सरकार के रूस, हमास और हिजबुल्लाह से कथित संबंधों की वजह से यह कदम उठाया गया है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा था, “क्यूबा को अब कोई तेल या पैसा नहीं जाएगा – जीरो!” हालांकि ऑर्डर में मेक्सिको का नाम नहीं लिया गया, लेकिन मेक्सिको ही 2025 से क्यूबा का सबसे बड़ा तेल सप्लायर है, रूस और वेनेजुएला से आगे निकलकर। यह कदम क्यूबा पर दबाव बढ़ाने का हिस्सा लगता है। अमेरिकी अधिकारियों ने क्यूबा के आसपास गनबोट भेजने और वहां के कुछ अधिकारियों से सहयोग की बात भी की है।
शीनबाम का बयान
मेक्सिको 2025 से क्यूबा को मुख्य तेल सप्लाई कर रहा है। कुछ दिन पहले रिपोर्ट्स आई थीं कि मेक्सिको ने जनवरी में एक शिपमेंट रोक दिया था, लेकिन शीनबाम ने इसे “संप्रभु फैसला” बताया था, अमेरिकी दबाव से नहीं। ट्रंप के टैरिफ के बाद 30 जनवरी को उन्होंने कहा कि वे अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट से टैरिफ की पूरी जानकारी लेंगे। उन्होंने जोर दिया कि मेक्सिको क्यूबा के लोगों के साथ एकजुटता दिखाएगा, लेकिन अपने हितों को खतरे में नहीं डालेगा। उन्होंने कहा, “हम ऐसा रास्ता तलाशेंगे जिसमें मेक्सिको को जोखिम न हो, लेकिन क्यूबा के लोगों के साथ हमेशा एकजुट रहेंगे।” वे मानवीय मदद के विकल्प ढूंढ रही हैं, जैसे कि तेल सप्लाई जारी रखने के लिए कोई डिप्लोमैटिक तरीका।
संभावित असर
टैरिफ से अगर मेक्सिको या कोई और देश तेल भेजना बंद कर दे, तो क्यूबा में अस्पताल, खाद्य सप्लाई और बुनियादी सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं। ऊर्जा विशेषज्ञ जॉर्ज पिनॉन ने कहा कि बिना क्रूड ऑयल या फ्यूल के क्यूबा में बड़ा संकट आ सकता है। क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनल ने ट्रंप के कदम को “दम घोंटने” वाला बताया है। मेक्सिको के लिए यह मुश्किल है क्योंकि वह USMCA ट्रेड एग्रीमेंट की नेगोशिएशन कर रहा है और अमेरिका से ड्रग कार्टेल्स पर भी दबाव है। शीनबाम ने कहा कि टैरिफ से क्यूबा में बड़े पैमाने पर मानवीय संकट आ सकता है, जो सीधे अस्पतालों, ट्रांसपोर्ट और खाद्य सप्लाई को प्रभावित करेगा।











