फ्रांस को या कहें पूरे ही यूरोप को अभिव्यक्ति की आजादी का स्वर्ग कहा जाता है और भारत विरोधी तमाम गतिविधियां यूरोप में केवल अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर निर्बाध संचालित होती रहती हैं। परंतु फ्रांस से ऐसा एक उदाहरण सामने आया है, जिसमें अभिव्यक्ति की आजादी पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। यह सोचने के लिए बाध्य कर दिया है कि क्या वास्तव में अभिव्यक्ति की आजादी वहाँ पर है? और यह घटना एक फेमिनिस्ट के साथ हुई है।
कट्टरपंथी इस्लाम पर बोला तो किया गिरफ्तार
फ्रांस में योना फेदा नामक एक फेमिनिस्ट को रविवार को गिरफ्तार कर लिया गया। अब यदि उसके अपराध पर दृष्टि डालें तो वह अपनी बात रखने को लेकर था। उसे इसलिए गिरफ्तार कर लिया था क्योंकि उसने सड़क पर एक इंटरव्यू में कट्टरपंथी इस्लाम के विषय में बात रख दी थी। pjmedia ने फ्रांसीसी समाचारपत्र के हवाले से लिखा कि फेदा नेमिसिस कलेक्टिव नामक एक समूह की सदस्य है और यह वर्ष 2019 में फ्रांस में आरंभ हुआ था। इसका नाम प्रतिशोध की ग्रीक देवी के नाम पर रखा गया है और यह समूह जहां महिला विषयक मुद्दों पर बात करता है, तो वहीं यह इस्लामिक शरणार्थियों एवं फ्रांसीसी संस्कृति, वहाँ के लोगों और विशेषकर महिलाओं पर क्या प्रभाव पड़ते हैं, उनपर बात करता है।
फेदा भी इसकी सदस्य है। रविवार को फेदा उन 12 युवा महिलाओं के समूह का हिस्सा थी, जो सड़कों पर लोगों से इस्लामिक कट्टरता पर बात कर रही थीं। जिन लोगों ने उनके साथ बात करने की सहमति दी थी, वे उनलोगों से सड़क पर बात कर रही थीं।
इस्लामिक कट्टरता के इंटरव्यू को डिलीट करने का दवाब
ऐसी ही एक बात करने वाली का मन बदल गया और उसने फेदा से कहा कि वह उसके इंटरव्यू को डिलीट कर दे। उससे पहले वह जबाव दे चुकी थी और फिर वह पुलिस के पास चली गई। पुलिस ने फेदा को हिरासत में ले लिया और पाँच घंटों तक गिरफ्तार रखा। फेदा का फोन पूरी तरह से जांचा गया और तीन दिनों तक पुलिस के पास ही रहा। योना ने रिहा होने के बाद एक्स पर पोस्ट लिखा कि “पुलिस कस्टडी में पाँच घंटे और मेरा फोन तीन दिनों तक जांचा गया। केवल इस कारण कि मैंने इस्लामिज़्म पर सड़क पर इंटरव्यू ले लिया था।“
5 hours in police custody and my phone searched and held as evidence for 3 days… all because of a street interview about Islamism. 🫠
I’m back — thank you all for your support. 🙌🏻 https://t.co/fIMcbXefJT
— Yona Faedda (@yona_faedda) January 21, 2026
योना की गिरफ्तारी को लेकर सोशल मीडिया पर काफी हंगामा हुआ था। लोगों का कहना था कि फ्रांस की मैक्रोन सरकार इस्लामिस्ट ताकतों के आगे झुक गई है और फ्रांस में अब अभिव्यक्ति की आजादी शेष नहीं रह गई है। गौरतलब है कि अन्य यूरोपीय देशों के साथ फ्रांस में भी इस्लाम को लेकर दो फाड़ हैं। एक तरफ लेफ़्टिस्ट लोग हैं जो कट्टरपंथ का समर्थन करते हुए इस्लामोफोबिया की परिभाषा गढ़ रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ वे लोग हैं, जो बढ़ते इस्लामीकरण को अपने देश और संस्कृति पर अतिक्रमण बता रहे हैं।
ऐसे कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
ऐसे कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिनमें कट्टरपंथी इस्लामिस्ट आम लोगों को परेशान आर रहे हैं। एक वीडियो था जिसमें कथित रूप से एक महिला को कहा जा रहा है कि वह गले में क्रॉस न पहले। एक ऐसा ही वीडियो था, जिसमें एक महिला फ्रांस में इसलिए गुस्से में है क्योंकि उसने सुपरमार्केट में हलाल मीट के बगल में डॉग फूड देखा। वह यह कह रही थी कि चूंकि कुत्ते मुसलमानों के लिए हराम हैं। तो हमें अपने मुस्लिम पड़ोसियों के साथ खड़े होना है और इस्लामोफोबिक नहीं होना है।
नेमिसिस कलेक्टिव ने 21 जनवरी को एक्स पर एक और घटना के विषय में पोस्ट किया था। उसमें लिखा था कीए एक 50 वर्षीय अल्जीरियन आदमी ने जॉगिंग करती हुई एक 28 वर्षीय महिला को परेशान किया। और वह युवा महिला बहुत डर गई थी। 6 जनवरी को जॉगिंग करते हुए उसे उस आदमी ने प्रोत्साहित किया तो उसने भी मुस्कराते हुए जबाव दे दिया। मगर अगले ही क्षण वह उसके सामने आ गया और उसने जबरन उसे गले लगाया और उसके गले पर किस कर दिया, वह डर गई और उसके बाद घर से नहीं निकली। वह 14 जनवरी को घर से बाहर निकली और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। जिस आदमी पर यह आरोप है, उसके पास कागजात भी नहीं है और उसे लीओन में डेटेन्शन सेंटर में गिरफ्तार कर के ले जाया गया है।
19 जनवरी को इसी समूह का एक और वीडियो देखा जा सकता है, जिसमें इस समूह की सदस्य ईरान के राष्ट्रपति का पोस्टर जलाती हुईं और बुर्का उतारती हुई नजर आ रही हैं। योना उसी समूह की सदस्य हैं जो अपने देश में इस्लामिक कट्टरता का विरोध कर रही हैं, जो अपने देश में उस अतिक्रमण का विरोध कर रही हैं, जो बाहरी अवैध लोगों के माध्यम से लगातार हो रहा है।











