स्वामी नन्दलाल जी महाराज: कश्मीर के महान योगी की दिव्य जीवन गाथा, झेला पलायन का दंश
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स्वामी नन्दलाल जी महाराज: कश्मीर के महान योगी की दिव्य जीवन गाथा, झेला पलायन का दंश

कश्मीर के महान संत योगीराज स्वामी नन्दलाल जी महाराज की जीवनी - तपस्या, चमत्कार, टिक्कर-हुशूरा आश्रम और 1968 में समाधि। परोपकार की मिसाल, सिद्ध पुरुष की कहानी जो दिल छू लेती है।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Jan 21, 2026, 07:36 am IST
inधर्म-संस्कृति
Swami nandlal ji maharaj

स्वामी नंदलाल जी महाराज

योगीराज स्वामी नन्दलाल जी महाराज एक ऐसे महान संत थे, जिनकी साधना, तपस्या और चमत्कारों की कहानियां आज भी लोगों के दिलों में बसती हैं। कश्मीर के प्रसिद्ध योगी राज के रूप में जाने जाते थे, वे बाल ब्रह्मचारी थे और जीवन भर मानव सेवा में लगे रहे।

शारदा पीठ के संरक्षक, विस्थापन का दंश झेला

कश्मीरी पंडित स्वामी नंदलाल जी शारदा पीठ से जुड़े संत थे। भारत विभाजन के समय जब पाकिस्तान ने भारत के जम्मू-कश्मीर पर अवैध कब्जा किया तो अध्यात्म का केंद्र ऐतिहासिक शारदा पीठ पीओजेके में चला गया। पाकिस्तानी सेना ने कबाइली आक्रमण के नाम पर वहां भारी तबाही मचाई। इसके बाद उन्हें वहां से विस्थापित कर दिया गया। यह एक व्यक्ति का पलायन नहीं था बल्कि एक आध्यात्मिक चेतना और युग का पलायन था।

विस्थापन के समय स्वामी जी ने इस्लामिक कट्टरपंथियों से कश्मीरियों और हिंदुओं की रक्षा की। बताया जाता है कि उन्होंने स्थानीय निवासियों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया।

शुरुआती जीवन और साधना

स्वामी जी ने अपनी साधना और तपस्या को बहुत गंभीरता से जारी रखा। वे मौन रहते थे। कुपवाड़ा के टिक्कर गांव में उन्होंने अपनी एक छोटी कुटीया बनाई, साथ ही एक आश्रम और धर्मशाला भी स्थापित की। दूर-दूर से लोग उनके दर्शन के लिए आने लगे। हर धर्म के लोग उनसे प्रभावित होते थे। मुस्लिम संगीतकार भी सोफियाना संगीत सुनाने आते और उनके विचार सुनकर खुश हो जाते।

स्वामी जी कहा करते थे कि एक साधु-सन्यासी बड़ा छायादार वृक्ष जैसा होता है। गृहस्थ लोग रोज की परेशानियों से राहत पाने उसके पास आते हैं। साधु उन्हें सांत्वना देता है, हिम्मत बढ़ाता है, पानी पिलाता है और थोड़ी खाने की चीज देता है। इससे उन्हें नई ताकत मिलती है और वे फिर अपने काम पर लग जाते हैं। वे बार-बार कहते थे कि परोपकार सबसे बड़ी साधना और तपस्या है।

जान लेते थे मन की बात

स्वामी जी के पास बैठने से लगता था कि समय थम सा गया है। उनकी मौजूदगी में जैसे काल चक्र रुक जाता था। आने वाले व्यक्ति को देखते ही पता चल जाता था कि वह कहां से आया है, क्यों आया है, उसकी समस्या क्या है और क्या उसका हल संभव है। बिना कुछ पूछे ही उसकी मन की बात जान लेते थे।

उन्होंने कई चमत्कार किए, जिन पर यकीन करना मुश्किल लगता है। कहते हैं कि डॉक्टरों ने जिन्हें लाइलाज बताया था, उन्हें ठीक किया। त्याग दी गई बहुओं को उनके पतियों से मिलवाया। दमा-खांसी वाले रोगियों को चलने-फिरने लायक बनाया।

सभी गुणों से परिपूर्ण थे स्वामी जी

वे सभी गुणों से परिपूर्ण थे। मौका मिलने पर खूब हंसते, आसपास वाले लोट-पोट हो जाते। प्राकृतिक स्वभाव के थे, बहुत सभ्य और अच्छी आदतों वाले। संगीत से लगाव था। व्यंग्य करने में माहिर थे। सूफियाना संगीतकार और गायक उनके आश्रम में उत्सुकता से आते थे। संतूर वादक जैसे पंडित वेदलाल धर, शाम लाल कोतवाल और बड़ी नाथ कौल बार-बार आते थे।

आश्रम और योगदान

उन्होंने दो मुख्य आश्रम बनवाए—एक टिक्कर (कुपवाड़ा के पास) और दूसरा हुशूरा (चादूरा तहसील) में। ये दोनों जगहें तीर्थ स्थल बन गईं। स्वामी जी ने वहां सांप-विषैले जीवों से डरने नहीं दिया। एक बार सोपोर मंदिर के पुजारी की पत्नी की मृत्यु हो गई। पुजारी चुपचाप सुबह चार बजे स्वामी जी के पास पहुंचे। स्वामी जी ने दया की, गड़बे से पानी मंगवाया, अंजलि भर छिड़का। महिला में जान आई, उठ खड़ी हुई और बोली—पता नहीं मैं कहां थी और कैसे आई।

अंतर्ध्यान और विरासत

जब अंतर्ध्यान का समय आया, तो उन्होंने पहले ही बता दिया था कि गौरी तृतीया को समाधि लेनी है। 1968 में दिल्ली की पव्योष कॉलोनी में पंडित प्रेम नाथ साधु के घर पर समाधि लेकर अंतर्ध्यान हो गए। आज भी मुश्किल वक्त में उनके नाम से लोग राहत पाते हैं। उनके कई शिष्य हुए, जैसे सिद्ध मोल (बेद लाल), श्याम लाल सपक, स्वामी विभीषण जी, स्वामी क्राल बब और स्वामी मस्तराम जी।

गीता का श्लोक उनके ऊपर पूरी तरह फिट बैठता है—

“मनुष्याणां सहस्रेषु कश्चिद्यतति सिद्धये…”

Topics: योगीराज स्वामी नन्दलाल जी महाराजस्वामी नन्दलाल जी महाराजटिक्कर आश्रम कुपवाड़ाYogiraj Swami Nandlal Ji MaharajSwami Nandlal Ji MaharajTikkar Ashram Kupwaraशारदा पीठ
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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